कानपुर। भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारी अंजली विश्वकर्मा इन दिनों अपने कैडर परिवर्तन को लेकर चर्चा में हैं। वर्ष 2021 बैच की आईपीएस अधिकारी अंजली विश्वकर्मा ने शादी के आधार पर उत्तर प्रदेश कैडर छोड़कर छत्तीसगढ़ कैडर चुन लिया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने उनके अंतर-कैडर स्थानांतरण को मंजूरी दे दी है। इस फैसले के बाद उनके करियर, संघर्ष और निजी जीवन को लेकर लोगों में रुचि बढ़ गई है।
अंजली विश्वकर्मा का जन्म जनवरी 1993 में उत्तराखंड में हुआ था। पढ़ाई के शुरुआती दौर से ही वह एक मेधावी छात्रा रही हैं। उन्होंने वर्ष 2011 में कानपुर के कांवेंट ऑफ जीसस एंड मैरी स्कूल से 12वीं की परीक्षा 97.7 प्रतिशत अंकों के साथ पास की थी और प्रदेश स्तर पर टॉपर रहीं। बचपन में उनका सपना डॉक्टर बनने का था, लेकिन बाद में उनकी रुचि इंजीनियरिंग की ओर बढ़ी।
इसके बाद उन्होंने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) कानपुर से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्हें एक प्रतिष्ठित कंपनी में करीब 48 लाख रुपये सालाना पैकेज वाली नौकरी का अवसर मिला था। हालांकि, उन्होंने कॉर्पोरेट करियर को छोड़कर सिविल सेवा में जाने का फैसला किया।
अंजली विश्वकर्मा ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा की तैयारी की और सफलता हासिल कर वर्ष 2021 बैच की आईपीएस अधिकारी बनीं। उनकी मेहनत और लगन ने उन्हें पुलिस सेवा में पहुंचाया। आईपीएस बनने के बाद उन्हें उत्तर प्रदेश कैडर आवंटित किया गया था।
अब केंद्रीय गृह मंत्रालय की मंजूरी के बाद उनका कैडर बदलकर छत्तीसगढ़ कर दिया गया है। यह बदलाव शादी के आधार पर किया गया है। उनके पति उदित पुष्कर भी वर्ष 2021 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं और वर्तमान में छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर स्थित राजभवन में राज्यपाल के परिसहाय (एडीसी) के पद पर तैनात हैं।
पति-पत्नी दोनों के अलग-अलग कैडर में होने के कारण अंजली विश्वकर्मा ने अंतर-कैडर स्थानांतरण के लिए आवेदन किया था। गृह मंत्रालय ने नियमों के तहत उनके आवेदन को मंजूरी देते हुए उन्हें छत्तीसगढ़ कैडर में स्थानांतरित कर दिया।
अंजली विश्वकर्मा की कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा मानी जाती है, जो अच्छे करियर विकल्पों के बीच समाज सेवा और प्रशासनिक जिम्मेदारी को चुनना चाहते हैं। उन्होंने आईआईटी से पढ़ाई करने के बाद निजी क्षेत्र में शानदार अवसर मिलने के बावजूद सिविल सेवा को प्राथमिकता दी।
उनका सफर शिक्षा, मेहनत और लक्ष्य के प्रति समर्पण का उदाहरण है। स्कूल में शानदार प्रदर्शन से लेकर इंजीनियरिंग और फिर आईपीएस अधिकारी बनने तक उन्होंने कई उपलब्धियां हासिल की हैं।
कैडर परिवर्तन के बाद अब अंजली विश्वकर्मा छत्तीसगढ़ में अपनी सेवाएं देंगी। उनके अनुभव और प्रशिक्षण को देखते हुए उम्मीद की जा रही है कि वह नई जिम्मेदारी को भी पूरी निष्ठा के साथ निभाएंगी।