Muzaffarnagar में बच्चे की अभिरक्षा को लेकर अनोखा मामला, कोर्ट ने भेजा नोटिस

Update: 2026-07-24 16:01 GMT

मुजफ्फरनगर  :   जनपद में तीन वर्षीय मासूम बच्चे की कस्टडी को लेकर फैमिली कोर्ट के आदेश पर हुई एक अनोखी कानूनी कार्रवाई चर्चा का विषय बन गई है। शुक्रवार शाम न्यायालय के निर्देश पर प्रतिवादी महिला के घर पहुंचकर ढोल बजाकर मुनादी कराई गई और न्यायालय का नोटिस दरवाजे पर चस्पा किया गया। इस कार्रवाई को देखने के लिए मौके पर आसपास के लोग भी जुट गए।

जानकारी के अनुसार, यह मामला नगर कोतवाली क्षेत्र के प्रेमपुरी निवासी अंश मित्तल और उनकी पत्नी स्नेह गर्ग से जुड़ा है। अंश मित्तल ने फैमिली कोर्ट में याचिका दायर कर अपने तीन वर्षीय पुत्र सारांश मित्तल की अभिरक्षा (कस्टडी) की मांग की है। याचिका में उन्होंने स्वयं को बच्चे का विधिक संरक्षक घोषित किए जाने और बच्चे की जिम्मेदारी उन्हें सौंपे जाने की मांग की है।

याचिका के अनुसार, वर्तमान में मासूम बच्चा अपनी मां के साथ ब्रह्मपुरी स्थित ननिहाल में रह रहा है। पिता की ओर से अदालत में बच्चे की कस्टडी को लेकर कानूनी प्रक्रिया शुरू की गई है। इसी मामले में अदालत की ओर से जारी आदेश के तहत शुक्रवार को न्यायालय की कार्रवाई टीम प्रतिवादी पक्ष के घर पहुंची।

बताया गया कि न्यायालय के आदेश के अनुपालन में नोटिस की जानकारी देने के लिए ढोल बजाकर मुनादी कराई गई। इसके बाद न्यायालय का नोटिस महिला के घर के दरवाजे पर चस्पा किया गया। सामान्य तौर पर न्यायालय के नोटिस की तामील के लिए कर्मचारी संबंधित व्यक्ति तक पहुंचते हैं, लेकिन इस मामले में अपनाई गई प्रक्रिया के कारण यह कार्रवाई लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गई।

फैमिली कोर्ट से जुड़े मामलों में बच्चों की अभिरक्षा को लेकर अदालत हमेशा बच्चे के हित को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है। ऐसे मामलों में अदालत माता-पिता दोनों पक्षों की दलीलों, बच्चे की स्थिति और उसके भविष्य को ध्यान में रखते हुए फैसला करती है।

कानूनी जानकारों के अनुसार, बच्चे की कस्टडी से जुड़े विवादों में सिर्फ माता-पिता का दावा ही महत्वपूर्ण नहीं होता, बल्कि बच्चे के मानसिक, भावनात्मक और सामाजिक हितों को भी ध्यान में रखा जाता है। अदालत सभी तथ्यों और परिस्थितियों की समीक्षा के बाद उचित निर्णय लेती है।

इस मामले में भी पिता ने अदालत से बच्चे की कस्टडी और कानूनी संरक्षक घोषित किए जाने की मांग की है। वहीं, मामले से जुड़े दूसरे पक्ष की दलीलें भी न्यायालय के सामने रखी जाएंगी। फिलहाल अदालत की प्रक्रिया जारी है और आगे की सुनवाई में दोनों पक्षों की बात सुनी जाएगी।

मुजफ्फरनगर में हुई इस कार्रवाई ने लोगों का ध्यान इसलिए भी आकर्षित किया क्योंकि न्यायालय के नोटिस की तामील के दौरान ढोल बजाकर मुनादी कराई गई। हालांकि, यह कदम न्यायालय के आदेश के तहत उठाया गया है और इसका उद्देश्य संबंधित पक्ष को कानूनी प्रक्रिया की जानकारी देना है।

अब सभी की नजरें फैमिली कोर्ट की आगामी सुनवाई पर टिकी हैं, जहां बच्चे की कस्टडी को लेकर आगे की कानूनी प्रक्रिया तय होगी। इस मामले में अदालत का अंतिम फैसला बच्चे के हित और प्रस्तुत किए गए तथ्यों के आधार पर होगा।

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