Cyber ठगी के बड़े नेटवर्क का खुलासा, तीन आरोपी गिरफ्तार

Update: 2026-07-20 13:23 GMT

Varanasi वाराणसी :  साइबर अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान ऑपरेशन सीवाई-वज्र के तहत रामनगर पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने विभिन्न राज्यों में साइबर ठगी की वारदातों को अंजाम देने वाले तीन शातिर साइबर ठगों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों पर दो करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी में शामिल होने का आरोप है। पुलिस ने इनके कब्जे से ठगी में इस्तेमाल किए गए सामान और नकदी भी बरामद की है।

रामनगर पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों के पास से एक एटीएम कार्ड, चार एंड्रॉयड मोबाइल फोन और 24,880 रुपये नकद बरामद किए गए हैं। पुलिस की जांच में सामने आया है कि यह गिरोह लोगों के बैंक खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी की रकम के लेन-देन के लिए करता था।

रामनगर थाना प्रभारी संजय कुमार मिश्रा ने बताया कि ऑपरेशन सीवाई-वज्र के तहत पुलिस संदिग्ध बैंक खातों की जांच और सत्यापन कर रही थी। इसी दौरान एक बैंक खाते में साइबर ठगी से जुड़ी रकम के अवैध लेन-देन की जानकारी मिली। पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और सर्विलांस की मदद से आरोपियों तक पहुंचने में सफलता हासिल की।

जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि गिरोह के सदस्य कमीशन के लालच में लोगों से बैंक खाते खुलवाते थे। इसके बाद उन खातों की पासबुक, एटीएम कार्ड और ओटीपी जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां हासिल कर लेते थे। इन बैंक खातों का इस्तेमाल साइबर अपराध से मिली रकम को इधर-उधर ट्रांसफर करने और निकालने के लिए किया जाता था।

पुलिस ने बताया कि गिरोह के सदस्य अलग-अलग राज्यों में सक्रिय थे और लोगों को फोन कॉल के जरिए अपने जाल में फंसाते थे। आरोपी कभी बैंक अधिकारी तो कभी अन्य संस्थाओं के कर्मचारी बनकर लोगों से संपर्क करते थे और उनके बैंक खाते या यूपीआई से जुड़ी जानकारी हासिल कर लेते थे। इसके बाद खातों से पैसे निकालकर अलग-अलग माध्यमों से ठिकाने लगाए जाते थे।

पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि साइबर ठगी से मिलने वाली रकम को गिरोह के सदस्यों के बीच पहले से तय हिस्सेदारी के अनुसार बांटा जाता था। जिन लोगों के बैंक खाते इस्तेमाल किए जाते थे, उन्हें भी कमीशन का लालच दिया जाता था। पुलिस अब इस गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों की तलाश में जुट गई है।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि साइबर अपराधियों के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है। लोगों को भी सलाह दी जा रही है कि वे किसी अनजान व्यक्ति के साथ बैंक संबंधी जानकारी, ओटीपी, एटीएम विवरण या यूपीआई पासवर्ड साझा न करें। थोड़ी सी लापरवाही साइबर ठगी का कारण बन सकती है।

रामनगर पुलिस की इस कार्रवाई को साइबर अपराध पर लगाम लगाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि उन्होंने अब तक कितने लोगों को अपना शिकार बनाया और इस नेटवर्क में कितने अन्य लोग शामिल हैं।

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