लखनऊ में संपत्ति तलाशने के मामले में बड़ा खुलासा, चोरी के आरोपों के बीच कर्मचारियों पर एक्शन
अयोध्या से लखनऊ तक जांच का दायरा बढ़ा, राम मंदिर ट्रस्ट और SBI कर्मचारियों पर कार्रवाई
UTTAR-PRADESH: अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और भारतीय स्टेट बैंक (SBI) से जुड़े एक मामले में बड़ी कार्रवाई सामने आई है। कथित वित्तीय अनियमितताओं और चोरी के पैसे के इस्तेमाल की जांच के बीच राम मंदिर ट्रस्ट ने करीब 30 कर्मचारियों को हटाने और SBI ने 13 कर्मचारियों के खिलाफ बर्खास्तगी की कार्रवाई किए जाने की जानकारी सामने आई है।
जांच एजेंसियां और संबंधित विभाग अब इस बात की पड़ताल कर रहे हैं कि कथित रूप से निकाले गए धन का इस्तेमाल कहां-कहां किया गया। इसी क्रम में लखनऊ में संपत्तियों की तलाश और जांच की जा रही है। अधिकारियों को आशंका है कि अवैध तरीके से प्राप्त धन को संपत्ति खरीदने या निवेश करने में लगाया गया हो सकता है।
बैंक कर्मचारियों पर भी गिरी गाज
मामले में SBI के कुछ कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आई है। बैंक स्तर पर की गई जांच के बाद 13 कर्मचारियों पर कार्रवाई की गई है। बैंक प्रशासन ने कहा है कि वित्तीय सुरक्षा और ग्राहकों के हितों से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
बैंकिंग प्रणाली में धोखाधड़ी रोकने के लिए आंतरिक जांच, रिकॉर्ड की समीक्षा और संदिग्ध लेन-देन की निगरानी की जा रही है। जांच के आधार पर आगे भी कार्रवाई संभव है।
राम मंदिर ट्रस्ट ने की सख्त कार्रवाई
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने भी मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की है। ट्रस्ट का कहना है कि संस्था की पारदर्शिता और श्रद्धालुओं के विश्वास को बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है।
ट्रस्ट से जुड़े मामलों में वित्तीय अनुशासन और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए अतिरिक्त कदम उठाए जा रहे हैं। कर्मचारियों की भूमिका, जिम्मेदारियों और कार्यप्रणाली की भी समीक्षा की जा रही है।
लखनऊ में संपत्ति की जांच क्यों?
जांच में यह पता लगाया जा रहा है कि कथित तौर पर प्राप्त धन का इस्तेमाल किसी संपत्ति या अन्य निवेश में तो नहीं किया गया। इसी वजह से लखनऊ समेत कुछ स्थानों पर संपत्तियों से जुड़े दस्तावेजों और लेन-देन की जानकारी जुटाई जा रही है।
जांच अधिकारी बैंक रिकॉर्ड, रजिस्ट्री दस्तावेज और वित्तीय लेन-देन की कड़ियों को जोड़ने में लगे हैं। यदि अवैध संपत्ति या धन के दुरुपयोग के प्रमाण मिलते हैं, तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
आगे क्या होगा?
फिलहाल मामले की जांच जारी है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही पूरे नेटवर्क और इसमें शामिल लोगों की भूमिका स्पष्ट हो पाएगी। वित्तीय अपराधों से जुड़े मामलों में सबूतों के आधार पर ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।