ग्रेटर नोएडा : 29 अक्टूबर 2026। उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर जिले में स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर गुरुवार को बड़े स्तर पर आपातकालीन तैयारी अभ्यास आयोजित किया गया। इस दौरान विमान दुर्घटना जैसी काल्पनिक आपात स्थिति बनाकर राहत एवं बचाव कार्यों की तैयारियों को परखने की व्यवस्था की गई। अभ्यास का उद्देश्य यह जांचना था कि किसी वास्तविक विमान हादसे की स्थिति में प्रशासन, पुलिस, अग्निशमन विभाग, स्वास्थ्य विभाग और आपदा राहत एजेंसियां कितनी तेजी से प्रतिक्रिया दे सकती हैं। इस मॉक ड्रिल के लिए 16 अस्पतालों और 60 एंबुलेंस की व्यवस्था की गई थी। अभ्यास में विमान के 200 यात्रियों के घायल होने की काल्पनिक स्थिति निर्धारित की गई। एयरपोर्ट प्रबंधन ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि यह एक पूर्व निर्धारित सुरक्षा अभ्यास है और इससे वास्तविक विमान दुर्घटना का कोई संबंध नहीं है।
विमान दुर्घटना जैसी स्थिति बनाकर परखी गई तैयारियां
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर 29 अक्टूबर को दोपहर 2 बजे से शाम 6 बजे तक पूर्ण-स्तरीय आपातकालीन अभ्यास निर्धारित किया गया था। इस दौरान विमान हादसे जैसी काल्पनिक परिस्थिति में यात्रियों को सुरक्षित निकालने और घायलों को तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने की तैयारियों का परीक्षण किया जाना था।एयरपोर्ट प्रशासन के अनुसार, इस प्रकार के अभ्यास का उद्देश्य आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली की प्रभावशीलता का आकलन करना है।अभ्यास में दुर्घटना की सूचना मिलने, संबंधित विभागों को सतर्क करने, राहत दलों को मौके पर पहुंचाने और घायलों को अस्पताल तक पहुंचाने जैसी प्रक्रियाओं पर विशेष ध्यान दिया गया।इस दौरान विभागों के बीच संचार व्यवस्था और आपसी समन्वय को भी महत्वपूर्ण माना गया।
200 यात्रियों के घायल होने की काल्पनिक स्थिति
मॉक ड्रिल के लिए एक ऐसा परिदृश्य तैयार किया गया, जिसमें विमान दुर्घटना के बाद 200 यात्रियों के घायल होने की सूचना मिलती है।इस काल्पनिक दुर्घटना के आधार पर बचाव टीमों को सक्रिय करने और घायलों को विमान से सुरक्षित बाहर निकालने की प्रक्रिया का अभ्यास निर्धारित था।योजना के अनुसार, बचाव दलों को गंभीर रूप से घायल यात्रियों की पहचान कर उन्हें प्राथमिकता के आधार पर उपचार उपलब्ध कराने की तैयारी करनी थी।वहीं, सामान्य रूप से घायल यात्रियों को प्राथमिक उपचार देकर आवश्यकता के अनुसार अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था का भी आकलन किया जाना था।इस अभ्यास से यह समझने में मदद मिलेगी कि किसी बड़े विमान हादसे के समय उपलब्ध संसाधनों का कितनी प्रभावी तरीके से इस्तेमाल किया जा सकता है।
16 अस्पतालों की 60 एंबुलेंस की व्यवस्था
अभ्यास में स्वास्थ्य सेवाओं की तैयारियों की जांच के लिए जिले के 16 अस्पतालों को शामिल किया गया।इन अस्पतालों से आवश्यकता पड़ने पर 60 एंबुलेंस उपलब्ध कराने की योजना बनाई गई थी।स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, इसमें कैलाश सुपरस्पेशियलिटी अस्पताल, शारदा अस्पताल, जिम्स, निम्स, फोर्टिस, मैक्स, यथार्थ, जिला अस्पताल और अन्य चिकित्सा संस्थानों की सेवाएं शामिल थीं।आपात स्थिति में अस्पतालों की इमरजेंसी, आईसीयू, वेंटिलेटर बेड, ब्लड बैंक, बर्न यूनिट और विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता का भी आकलन किया जाना था।मॉक ड्रिल के नोडल अधिकारी एवं डिप्टी सीएमओ डॉ. चंदन सोनी ने बताया था कि विमान दुर्घटना की सूचना मिलने पर अस्पतालों से एंबुलेंस रवाना करने और मरीजों को तत्काल उपचार उपलब्ध कराने की व्यवस्था तैयार की गई है।
घायलों को अस्पताल पहुंचाने के लिए ग्रीन कॉरिडोर
आपातकालीन अभ्यास के दौरान यातायात प्रबंधन की तैयारियों को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया गया।योजना के अनुसार, ट्रैफिक पुलिस को घायलों को अस्पताल पहुंचाने के लिए ग्रीन कॉरिडोर बनाने की तैयारी करनी थी।इस व्यवस्था का उद्देश्य एंबुलेंस को सड़क पर यातायात संबंधी बाधाओं से बचाते हुए कम से कम समय में अस्पताल पहुंचाना है।किसी बड़ी विमान दुर्घटना में घायलों को समय पर चिकित्सा सहायता मिलना बेहद महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में राहत दलों और यातायात पुलिस के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है।प्रशासन की तैयारी में अस्पतालों तक पहुंचने वाले मार्गों और आपातकालीन वाहनों की आवाजाही को सुचारू बनाए रखने पर विशेष जोर दिया गया।
NDRF, SDRF और CISF सहित कई एजेंसियां शामिल
पूर्ण-स्तरीय आपातकालीन अभ्यास में जिला प्रशासन, पुलिस, अग्निशमन विभाग, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF), राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF), स्वास्थ्य विभाग और केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) सहित विभिन्न एजेंसियों की भागीदारी निर्धारित की गई थी।प्रत्येक एजेंसी को अपनी जिम्मेदारी के अनुसार प्रतिक्रिया देने की तैयारी करनी थी।अग्निशमन विभाग को विमान में आग लगने जैसी स्थिति से निपटने, जबकि बचाव दलों को यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकालने की व्यवस्था पर काम करना था।पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों की भूमिका घटनास्थल की सुरक्षा तथा राहत कार्यों के लिए आवश्यक व्यवस्था बनाए रखने से संबंधित थी।नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट की एडीसीपी पूनम मिश्रा ने पहले बताया था कि अभ्यास के दौरान एयरपोर्ट थाने की पुलिस मौजूद रहेगी और आवश्यकता पड़ने पर अन्य थानों से भी अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया जा सकेगा।
12 अक्टूबर को भी हुई थी टेबलटॉप एक्सरसाइज
इस बड़े अभ्यास से पहले 12 अक्टूबर को एयरपोर्ट परिसर में टेबलटॉप एक्सरसाइज आयोजित की गई थी।इसमें विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने संभावित आपात स्थितियों के दौरान अपनी भूमिकाओं और जिम्मेदारियों पर चर्चा की थी।टेबलटॉप एक्सरसाइज में आमतौर पर किसी काल्पनिक आपदा की स्थिति में संबंधित अधिकारियों की कार्ययोजना और निर्णय लेने की प्रक्रिया की समीक्षा की जाती है।इसके बाद पूर्ण-स्तरीय मॉक ड्रिल के माध्यम से तैयारियों का व्यावहारिक परीक्षण करने की योजना बनाई गई।एयरपोर्ट प्रबंधन के अनुसार, इस स्तर का अभ्यास एयरपोर्ट पर पहली बार आयोजित करने की तैयारी की गई थी।
एयरपोर्ट ने लोगों के लिए जारी की एडवाइजरी
मॉक ड्रिल को लेकर नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट ने आसपास रहने वाले लोगों और यात्रियों के लिए पहले ही एडवाइजरी जारी की थी।इसमें बताया गया कि 29 अक्टूबर को दोपहर 2 बजे से शाम 6 बजे तक एयरपोर्ट के आसपास आपातकालीन वाहनों और राहतकर्मियों की गतिविधियां बढ़ी हुई दिखाई दे सकती हैं।एयरपोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह गतिविधियां निर्धारित सुरक्षा अभ्यास का हिस्सा होंगी और वास्तविक आपात स्थिति नहीं है।एडवाइजरी के अनुसार, अभ्यास के दौरान एयरपोर्ट की सामान्य गतिविधियां प्रभावित नहीं होंगी।लोगों से अभ्यास के दौरान सहयोग करने और आपातकालीन वाहनों की मौजूदगी को वास्तविक दुर्घटना समझकर अफवाहें नहीं फैलाने की अपील की गई थी।
विमानन सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की पहल
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के संचालन की तैयारियों के बीच यह अभ्यास महत्वपूर्ण माना जा रहा है।किसी भी बड़े हवाई अड्डे पर विमान दुर्घटना, आग लगने या अन्य आपात स्थितियों से निपटने के लिए विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक होता है।ऐसे अभ्यासों से प्रतिक्रिया समय, संसाधनों की उपलब्धता, संचार व्यवस्था और राहत कार्यों में संभावित कमियों की पहचान करने में मदद मिल सकती है।एयरपोर्ट प्रबंधन का उद्देश्य आपातकालीन योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाना और किसी वास्तविक संकट की स्थिति में यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।हालांकि, अभ्यास के बाद वास्तविक प्रतिक्रिया समय, बचाव अभियान के परिणाम और पहचानी गई कमियों का विस्तृत आधिकारिक मूल्यांकन उपलब्ध नहीं हुआ है।इस पूर्ण-स्तरीय आपातकालीन अभ्यास को यात्रियों की सुरक्षा, आपदा प्रबंधन और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।