प्रयागराज। जिस तरह मादक पदार्थों और अवैध हथियारों के कारोबार में तस्कर पुलिस और जांच एजेंसियों से बचने के लिए कोड वर्ड का इस्तेमाल करते हैं, उसी तरह नकली खाद का कारोबार करने वाले गिरोह ने भी अपना नेटवर्क चलाने के लिए एक खास तरीका अपनाया था। किसानों को खाद बेचने वाले इस गिरोह ने फोन पर बातचीत के दौरान असली नाम लेने के बजाय कोड वर्ड का इस्तेमाल करने की हिदायत दी थी।

जानकारी के अनुसार, नकली खाद का कारोबार करने वाले लोग किसानों को फोन पर ऑर्डर देते समय खाद का नाम लेने से मना करते थे। इसके बदले उन्हें ‘नमकीन’ शब्द का इस्तेमाल करने को कहा जाता था, ताकि किसी को भी बातचीत सुनने पर असली कारोबार का पता न चल सके। इतना ही नहीं, किसानों को यह भी निर्देश दिया जाता था कि खाद इस्तेमाल करने के बाद बची हुई बोरियों को तुरंत जला दें, जिससे किसी तरह का सबूत न बच पाए।

जिले में खाद की कमी का फायदा उठाकर इस गिरोह ने किसानों को अपना शिकार बनाया। खरीफ सीजन में खाद की मांग बढ़ने और समितियों में पर्याप्त उपलब्धता नहीं होने के कारण कई किसान मजबूरी में निजी लोगों से खाद खरीदने लगे। इसी स्थिति का फायदा उठाकर नकली खाद बेचने वालों ने किसानों को बड़े पैमाने पर ठगा।

किसानों का कहना है कि खाद की कमी के कारण उन्हें अपनी फसल बचाने की चिंता थी। इसी मजबूरी में उन्होंने बिना ज्यादा जांच-पड़ताल किए निजी विक्रेताओं से खाद खरीद ली। गिरोह के लोगों ने किसानों को भरोसा दिलाया कि वे समितियों से मिलीभगत कर खाद उपलब्ध करा रहे हैं और उन्हें आसानी से डीएपी मिल जाएगी।

किसानों के अनुसार, असली डीएपी खाद की कीमत करीब 1350 रुपये प्रति बोरी है, लेकिन कमी का फायदा उठाकर नकली खाद बेचने वालों ने एक बोरी के लिए 1800 रुपये तक वसूले। मजबूरी में कई किसानों ने अधिक कीमत देकर खाद खरीदी, ताकि समय पर खेतों में इसका उपयोग किया जा सके।

लेकिन जब किसानों ने इस खाद का इस्तेमाल खेतों में किया तो उन्हें इसका असर दिखाई नहीं दिया। कई किसानों का कहना है कि खाद डालने के बाद भी फसल में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। इससे उन्हें शक हुआ कि उनके साथ धोखा किया गया है। अब किसानों को अपनी मेहनत और लगाई गई पूंजी की चिंता सताने लगी है।

किसानों का कहना है कि नकली खाद के कारण उन्हें दोहरा नुकसान उठाना पड़ रहा है। एक तरफ उन्होंने महंगे दामों पर खाद खरीदी, वहीं दूसरी तरफ खेतों में उसका कोई लाभ नहीं मिला। ऐसे में उनकी फसल प्रभावित होने का खतरा बढ़ गया है।

प्रभावित किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि नकली खाद बेचने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और उनसे वसूली गई रकम वापस दिलाई जाए। किसानों का कहना है कि उन्होंने अपनी जरूरत और फसल बचाने के लिए खाद खरीदी थी, लेकिन अब उन्हें आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।

कृषि विभाग और प्रशासन के सामने अब इस पूरे नेटवर्क की जांच करना बड़ी चुनौती है। यह पता लगाया जा रहा है कि नकली खाद कहां से लाई गई, इसे किन लोगों के माध्यम से किसानों तक पहुंचाया गया और इस गिरोह में कितने लोग शामिल हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि नकली खाद का इस्तेमाल किसानों के लिए बेहद नुकसानदायक हो सकता है। इससे न केवल फसल की गुणवत्ता प्रभावित होती है, बल्कि मिट्टी की उर्वरता पर भी नकारात्मक असर पड़ सकता है। इसलिए किसानों को खाद खरीदते समय सावधानी बरतनी चाहिए और अधिकृत विक्रेताओं से ही खरीदारी करनी चाहिए।

किसानों की शिकायतों के बाद प्रशासन से उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही पूरे मामले की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी। साथ ही किसानों को हुए नुकसान की भरपाई के लिए भी कदम उठाए जाएंगे।

यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि किसानों की मजबूरी और बाजार में उपलब्धता की कमी का फायदा उठाकर कुछ लोग किस तरह अवैध कारोबार को बढ़ावा देते हैं। नकली खाद जैसे मामलों में सख्त कार्रवाई जरूरी है, ताकि भविष्य में किसान ऐसी ठगी का शिकार न हों।

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