Maghrib के बाद दारुल उलूम में नो एंट्री, प्रबंधन ने बताई वजह

Update: 2026-07-27 09:11 GMT

उत्तर प्रदेश  :   सहारनपुर जिले के देवबंद स्थित प्रसिद्ध इस्लामिक शिक्षण संस्थान दारुल उलूम ने परिसर में प्रवेश को लेकर नया आदेश जारी किया है। संस्था ने अब मगरिब की नमाज के बाद शहरवासियों और बाहर से आने वाले लोगों के प्रवेश पर रोक लगा दी है। प्रबंधन ने यह फैसला छात्रों की निर्बाध पढ़ाई और संस्थान की सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए लिया है।

दारुल उलूम के इस निर्णय के बाद शहर के कुछ लोगों ने नाराजगी जताई है। कुछ लोगों ने प्रबंधन के जिम्मेदारों से इस संबंध में बातचीत कर अपनी आपत्ति भी दर्ज कराई है। हालांकि, संस्था का कहना है कि यह फैसला किसी वर्ग विशेष को रोकने के उद्देश्य से नहीं लिया गया है, बल्कि शैक्षणिक माहौल बनाए रखने और सुरक्षा कारणों से व्यवस्था लागू की गई है।

संस्था के छात्रावास प्रभारी मौलाना मुफ्ती अशरफ अब्बास ने जारी निर्देशों के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि दारुल उलूम एक शैक्षणिक संस्थान है। उन्होंने कहा कि शाम का समय छात्रों की पढ़ाई के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है। मगरिब और ईशा की नमाज के बाद तलबा (छात्र) अपने पाठ की तैयारी करते हैं और एक-दूसरे को सबक सुनाते हैं।

उन्होंने बताया कि इसी अवधि में बाहरी लोगों की आवाजाही होने से छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो सकती है। इसलिए ऐसे लोगों से परिसर में आने से बचने का अनुरोध किया गया है, जिनका संस्थान से कोई शैक्षणिक संबंध नहीं है।

शहरवासियों की नाराजगी पर प्रबंधन ने दी सफाई

प्रबंधन ने शहर के लोगों में नाराजगी की बात पर सफाई देते हुए कहा कि आदेश में कहीं भी "शहरी" शब्द का इस्तेमाल नहीं किया गया है। संस्था ने स्पष्ट किया कि अगर किसी व्यक्ति के घर कोई मेहमान आया है, कोई आपात स्थिति है या कोई जरूरी काम है तो ऐसी परिस्थितियों में प्रवेश पर रोक नहीं होगी।

मौलाना मुफ्ती अशरफ अब्बास ने कहा कि दारुल उलूम की स्थापना और विकास में देवबंद के लोगों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने कहा कि संस्था और शहर के लोगों का संबंध काफी पुराना है और शहरवासियों का संस्था से विशेष जुड़ाव रहा है।

सुरक्षा कारणों से लिया गया फैसला

प्रबंधन ने बताया कि पिछले कुछ समय में परिसर में सुरक्षा से जुड़े कुछ मामले सामने आए हैं। संस्था के अनुसार, कुछ लोगों ने छात्रों जैसा पहनावा अपनाकर परिसर में प्रवेश करने का प्रयास किया और चोरी जैसी घटनाओं को अंजाम देने की कोशिश की।

इन घटनाओं को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत महसूस हुई। प्रबंधन का कहना है कि नए नियम का उद्देश्य बाहरी लोगों की अनावश्यक आवाजाही को नियंत्रित करना है, ताकि छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न हो और परिसर की सुरक्षा बनी रहे।

दिन में प्रवेश पर कोई रोक नहीं

दारुल उलूम प्रबंधन ने साफ किया है कि दिन के समय सामान्य रूप से लोगों के आने-जाने पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया गया है। यह व्यवस्था केवल शाम के बाद लागू की गई है, जब छात्रों का अध्ययन समय होता है।

संस्था का कहना है कि छात्रों को बेहतर शैक्षणिक माहौल उपलब्ध कराने और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत रखने के लिए यह कदम उठाया गया है। वहीं, शहर के कुछ लोगों की आपत्तियों को देखते हुए आने वाले दिनों में इस व्यवस्था को लेकर चर्चा भी हो सकती है।

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