कन्नौज में मत्स्य पालन की छह योजनाओं के लिए ऑनलाइन आवेदन शुरू, 31 July तक मिलेगा मौका

Update: 2026-07-24 11:02 GMT

कन्नौज। जिले में मत्स्य पालन को बढ़ावा देने और मत्स्य पालकों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के उद्देश्य से चालू वर्ष के लिए छह प्रमुख योजनाओं के तहत ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। मत्स्य पालन विभाग की ओर से संचालित इन योजनाओं का लाभ लेने के इच्छुक लोग ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन की प्रक्रिया 16 जुलाई 2026 से शुरू हो चुकी है और 31 जुलाई 2026 तक जारी रहेगी।

मत्स्य पालक विकास अभिकरण के प्रभारी मुख्य कार्यकारी अधिकारी हिमांशू यादव ने बताया कि सरकार की ओर से मत्स्य पालन क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इन योजनाओं के माध्यम से मत्स्य पालकों को तकनीकी सहायता, उपकरण, उत्पादन बढ़ाने और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

उन्होंने बताया कि आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन रखी गई है, जिससे इच्छुक लाभार्थी आसानी से आवेदन कर सकें। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कोई व्यक्ति एक से अधिक योजनाओं का लाभ लेना चाहता है तो उसे प्रत्येक योजना के लिए अलग-अलग ऑनलाइन आवेदन करना होगा। एक ही आवेदन के माध्यम से कई योजनाओं का लाभ नहीं लिया जा सकेगा।

वर्तमान में जिन प्रमुख योजनाओं के लिए आवेदन मांगे गए हैं, उनमें मुख्यमंत्री मत्स्य संपदा योजना भी शामिल है। इस योजना का उद्देश्य मत्स्य उत्पादन को बढ़ावा देना और मत्स्य पालकों को आधुनिक तकनीक से जोड़ना है। इसके अलावा सघन मत्स्य पालन एरेशन सिस्टम की स्थापना योजना के लिए भी आवेदन किए जा सकते हैं। इस तकनीक के माध्यम से तालाबों में ऑक्सीजन की मात्रा बनाए रखने में मदद मिलती है, जिससे मछलियों की वृद्धि और उत्पादन बेहतर होता है।

इसके साथ ही उत्तर प्रदेश मत्स्य पालक कल्याण कोष के अंतर्गत दो महत्वपूर्ण परियोजनाओं को भी शामिल किया गया है। इनमें मत्स्य पालकों के लिए मोटरयुक्त आइसबाक्स परियोजना और माता शबरी महिला मत्स्य पालक सशक्तिकरण परियोजना शामिल हैं। मोटरयुक्त आइसबाक्स परियोजना के तहत मछलियों के सुरक्षित परिवहन और संरक्षण के लिए सुविधाएं उपलब्ध कराने का उद्देश्य है।

वहीं माता शबरी महिला मत्स्य पालक सशक्तिकरण परियोजना के माध्यम से महिला मत्स्य पालकों को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर दिया जा रहा है। इस योजना के तहत श्रेणी एक, दो और तीन के जलाशयों वाले जनपदों में केज स्थापना का प्रावधान किया गया है। केज कल्चर तकनीक से जलाशयों में वैज्ञानिक तरीके से मत्स्य पालन किया जा सकता है, जिससे उत्पादन बढ़ाने में सहायता मिलती है।

विभाग की ओर से अंतरदेशीय खारे जल क्षेत्रों में मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए नए तालाब निर्माण एवं प्रथम वर्ष निवेश योजना भी संचालित की जा रही है। इस योजना का उद्देश्य ऐसे क्षेत्रों में मत्स्य पालन को प्रोत्साहित करना है, जहां पारंपरिक खेती के विकल्प सीमित हैं। नए तालाब निर्माण के साथ शुरुआती निवेश में सहायता मिलने से लोगों को मत्स्य पालन व्यवसाय शुरू करने में मदद मिलेगी।

इसके अलावा प्रदेश में मोती संवर्धन योजना और विशिष्ट प्रजाति की मत्स्य हैचरी स्थापना योजना के लिए भी आवेदन लिए जा रहे हैं। मोती उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए यह योजना लोगों को नए रोजगार अवसर उपलब्ध करा सकती है, जबकि हैचरी स्थापना योजना से गुणवत्तापूर्ण मत्स्य बीज उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा।

मत्स्य विभाग ने यह भी जानकारी दी है कि पिछले वर्षों में जिन आवेदकों के आवेदन किसी कारण से निरस्त हो गए थे या जो प्रतीक्षा सूची में रह गए थे, वे भी इस बार दोबारा आवेदन कर सकते हैं। इससे पुराने आवेदकों को फिर से अवसर मिलेगा।

विभाग का कहना है कि योजनाओं का लाभ पात्र और योग्य लाभार्थियों तक पहुंचाने के लिए आवेदन प्रक्रिया में पारदर्शिता बरती जा रही है। ऑनलाइन आवेदन व्यवस्था से चयन प्रक्रिया को सरल और निष्पक्ष बनाने में मदद मिलेगी।

मत्स्य पालन विभाग ने इच्छुक लोगों से अपील की है कि वे अंतिम तिथि से पहले आवेदन प्रक्रिया पूरी कर लें, ताकि किसी तकनीकी समस्या या देरी के कारण उनका आवेदन प्रभावित न हो। इन योजनाओं के माध्यम से सरकार का लक्ष्य ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार बढ़ाना और मत्स्य उत्पादन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाना है।

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