Dehradun में अवैध दवा फैक्ट्री पकड़ी गई, दो आरोपी गिरफ्तार

Update: 2026-07-24 13:20 GMT

गाजियाबाद  :   नकली और मिलावटी दवाओं के अवैध कारोबार के खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) उत्तर प्रदेश ने बड़ी कार्रवाई की है। एफएसडीए उत्तर प्रदेश, एफएसडीए उत्तराखंड और गाजियाबाद क्राइम ब्रांच की संयुक्त टीम ने देहरादून में संचालित एक अवैध दवा निर्माण इकाई का पर्दाफाश किया है। कार्रवाई के दौरान करीब एक करोड़ रुपये कीमत की नकली दवाएं, दवा बनाने वाली मशीनरी और बड़ी मात्रा में पैकेजिंग सामग्री बरामद की गई है।

इस मामले में पुलिस और जांच एजेंसियों ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की तलाश जारी है। अधिकारियों का कहना है कि प्रारंभिक जांच में यह मामला एक संगठित नेटवर्क से जुड़ा हुआ सामने आया है, जो नकली दवाओं का निर्माण और सप्लाई कर रहा था।

अधिकारियों के मुताबिक, इस पूरे मामले की शुरुआत लखनऊ के अमीनाबाद थाने में 19 जुलाई को दर्ज नकली दवा प्रकरण की जांच से हुई। जांच के दौरान पुलिस और एफएसडीए टीम को कई महत्वपूर्ण सुराग मिले। इन सुरागों के आधार पर पता चला कि नकली दवाओं का एक बड़ा नेटवर्क उत्तराखंड के देहरादून से संचालित किया जा रहा है।

इसके बाद जांच एजेंसियों ने कार्रवाई का दायरा बढ़ाया और संदिग्धों की गतिविधियों पर नजर रखनी शुरू की। इसी क्रम में 22 जुलाई को गाजियाबाद के राजनगर एक्सटेंशन स्थित केडब्ल्यू मॉल के पास से गिरोह के मुख्य सप्लायर राजेंद्र सिंह उर्फ अरुण टुंडा को गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में उससे मिली जानकारी के आधार पर टीम देहरादून स्थित अवैध दवा निर्माण इकाई तक पहुंची।

संयुक्त टीम ने देहरादून में छापेमारी कर वहां से बड़ी मात्रा में नकली दवाएं बरामद कीं। इसके अलावा दवा बनाने में इस्तेमाल होने वाली मशीनें, कच्चा माल और पैकिंग सामग्री भी जब्त की गई। अधिकारियों के अनुसार, आरोपी नकली दवाओं को तैयार कर विभिन्न स्थानों पर सप्लाई करते थे।

एफएसडीए अधिकारियों ने बताया कि नकली दवाओं का कारोबार आम लोगों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है। ऐसे मामलों में दवाओं की गुणवत्ता और सुरक्षा से समझौता किया जाता है, जिससे मरीजों की जान तक जोखिम में पड़ सकती है। इसी वजह से विभाग लगातार ऐसे गिरोहों के खिलाफ अभियान चला रहा है।

जांच एजेंसियां अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान करने में जुटी हैं। यह भी पता लगाया जा रहा है कि नकली दवाओं की सप्लाई किन-किन राज्यों और शहरों में की गई थी। इसके अलावा आरोपियों के आर्थिक लेन-देन और दवा बाजार से जुड़े संपर्कों की भी जांच की जा रही है।

अधिकारियों का कहना है कि नकली दवा बनाने और बेचने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने लोगों से भी अपील की है कि वे दवाएं खरीदते समय सावधानी बरतें और संदिग्ध दवा या बिल संबंधी गड़बड़ी मिलने पर तुरंत संबंधित विभाग को सूचना दें।

इस कार्रवाई को नकली दवा कारोबार पर बड़ी चोट माना जा रहा है। जांच आगे बढ़ने के साथ इस पूरे नेटवर्क से जुड़े कई और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

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