आगरा। विश्व प्रसिद्ध ऐतिहासिक स्मारक ताजमहल की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर रविवार को गंभीर सवाल खड़े हो गए। उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) की प्रारंभिक अर्हता परीक्षा (PET) के बाद ताजमहल के पश्चिमी गेट पर पर्यटकों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। इस दौरान प्रवेश द्वार के बाहर लोहे की सुरक्षा जालियों और आसपास लगे पेड़ों पर बड़ी संख्या में बैग लटके दिखाई दिए। ताजमहल के अंदर बड़े बैग ले जाने की अनुमति नहीं होने और लॉकर सुविधा में जगह कम पड़ने के कारण पर्यटकों तथा अभ्यर्थियों को अपना सामान बाहर छोड़ना पड़ा। सबसे गंभीर सवाल यह है कि संवेदनशील क्षेत्र में इस तरह बिना निगरानी रखे गए सामान की जांच और सुरक्षा को लेकर पर्याप्त व्यवस्था क्यों नहीं दिखाई दी।

रविवार, 1 नवंबर को आगरा में PET परीक्षा के चलते बड़ी संख्या में अभ्यर्थी और उनके परिजन मौजूद थे। जिले के 49 परीक्षा केंद्रों पर कुल 45,552 अभ्यर्थियों के लिए परीक्षा आयोजित की गई थी। परीक्षा समाप्त होने के बाद कई अभ्यर्थी अपने परिजनों के साथ ताजमहल देखने पहुंच गए। इससे पश्चिमी गेट पर पर्यटकों का दबाव अचानक बढ़ गया।

लॉकर फुल होने से पेड़ों पर टांगे बैग

ताजमहल परिसर में सुरक्षा कारणों से बड़े बैग और कई प्रतिबंधित वस्तुएं ले जाने की अनुमति नहीं है। पर्यटकों को अपना सामान प्रवेश द्वार से पहले निर्धारित लॉकर में जमा कराना होता है। लेकिन रविवार को पर्यटकों की संख्या बढ़ने से पश्चिमी गेट पर लॉकर रूम और बैग जमा करने वाले काउंटरों पर दबाव बढ़ गया।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, लॉकर रूम की क्षमता पूरी होने के बाद कई पर्यटकों को बैग जमा करने में परेशानी हुई। कुछ पर्यटकों ने बताया कि उन्हें लंबे समय तक कतार में इंतजार करना पड़ा, इसके बावजूद सामान जमा करने की सुविधा नहीं मिल सकी। मजबूरी में लोगों ने अपने बैग पेड़ों की डालियों और लोहे की जालियों पर टांग दिए। आसपास की बेंचों पर भी सूटकेस और बैग रखे दिखाई दिए।

मौके पर मौजूद लोगों के मुताबिक, कुछ पेड़ों की डालियों पर आठ से दस बैग तक लटके दिखाई दिए। कई पर्यटक अपना सामान बाहर छोड़कर ताजमहल देखने के लिए अंदर चले गए। इससे सामान की सुरक्षा को लेकर भी चिंता पैदा हो गई।

सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

ताजमहल देश के सबसे महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्मारकों में शामिल है। इसकी सुरक्षा के लिए कई स्तरों पर व्यवस्था की गई है। प्रवेश द्वार पर पर्यटकों और उनके सामान की जांच की जाती है। ऐसे संवेदनशील स्मारक के बाहर बड़ी संख्या में बैग बिना निगरानी पड़े रहना सुरक्षा व्यवस्था के लिहाज से चिंता का विषय है।

विशेष रूप से पश्चिमी गेट के आसपास की व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। जब पर्यटकों के बैग निर्धारित लॉकर में जमा नहीं हो सके, तो उन्हें खुले में रखने की नौबत क्यों आई? क्या अतिरिक्त लॉकर या बैग रखने की वैकल्पिक व्यवस्था की जा सकती थी? भीड़ बढ़ने की संभावना के बावजूद अतिरिक्त इंतजाम क्यों नहीं किए गए? ये सवाल स्थानीय लोगों और पर्यटकों के बीच चर्चा का विषय बने हुए हैं।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि खुले में रखे गए सामान की जांच और निगरानी की व्यवस्था कैसी थी। हालांकि, इन बैगों में किसी संदिग्ध वस्तु के मिलने या सुरक्षा संबंधी कोई वास्तविक घटना होने की जानकारी सामने नहीं आई है।

45 हजार से अधिक अभ्यर्थियों के कारण बढ़ा दबाव

रविवार को आगरा में PET परीक्षा के लिए 45,552 अभ्यर्थियों की व्यवस्था की गई थी। परीक्षा दो पालियों में आयोजित हुई। पहली पाली सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक और दूसरी पाली दोपहर 3 बजे से शाम 5 बजे तक निर्धारित थी।

परीक्षा में शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में अभ्यर्थी दूसरे जिलों से भी आगरा पहुंचे थे। उनके साथ परिवार के सदस्य भी आए थे। परीक्षा समाप्त होने के बाद कई लोगों ने आगरा के पर्यटन स्थलों का रुख किया। ताजमहल में अचानक बढ़ी भीड़ ने टिकट काउंटर, लॉकर रूम और प्रवेश व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव डाल दिया।

पर्यटकों का कहना था कि इतनी बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की संभावना पहले से थी। इसके बावजूद बैग जमा करने के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने से उन्हें परेशानी उठानी पड़ी।

पहले भी बैग स्कैनर को लेकर उठ चुके हैं सवाल

ताजमहल की सुरक्षा व्यवस्था में बैग जांच को लेकर पहले भी सवाल उठ चुके हैं। अगस्त 2026 में प्रकाशित एक रिपोर्ट में बताया गया था कि पश्चिमी गेट पर लगा बैग स्कैनर करीब तीन महीने से खराब था। उस समय सीआईएसएफ के जवान हैंडहेल्ड डिटेक्टर से सामान की जांच कर रहे थे। स्कैनर खराब होने के कारण मैनुअल जांच में समय अधिक लग रहा था और पर्यटकों को लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ रहा था।

अगस्त में सामने आई इस समस्या के बाद अब नवंबर में खुले में बड़ी संख्या में बैग रखे जाने की तस्वीरों ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि रविवार को बैग स्कैनर की स्थिति क्या थी और बैग जमा करने वाले काउंटरों पर कितने कर्मचारी तैनात थे।

प्रशासन से व्यवस्था सुधारने की मांग

ताजमहल देखने आने वाले पर्यटकों की संख्या रविवार और छुट्टियों के दिनों में अधिक रहती है। ऐसे में प्रशासन और संबंधित सुरक्षा एजेंसियों के सामने भीड़ नियंत्रण के साथ-साथ सामान की सुरक्षित व्यवस्था सुनिश्चित करने की चुनौती रहती है।

इस घटना के बाद अतिरिक्त लॉकर, बैग जमा करने के लिए अलग काउंटर और खुले में रखे सामान की निगरानी जैसी व्यवस्थाओं की जरूरत महसूस की जा रही है। खासकर परीक्षा या अन्य बड़े आयोजनों के बाद पर्यटकों की संख्या बढ़ने पर पहले से इंतजाम करना जरूरी है।

ताजमहल की सुरक्षा केवल प्रवेश द्वार के भीतर तक सीमित नहीं है। उसके आसपास के संवेदनशील क्षेत्रों में भी सतर्कता बनाए रखना आवश्यक है। लावारिस या बिना निगरानी रखे गए किसी भी सामान की नियमानुसार जांच की जानी चाहिए।

फिलहाल रविवार की घटना को लेकर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI), स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों की ओर से विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि खुले में रखे गए सभी बैगों की जांच की गई थी या नहीं।

ताजमहल जैसे विश्व धरोहर स्मारक की सुरक्षा और पर्यटकों की सुविधाएं दोनों महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में इस घटना ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है कि भारी भीड़ के दौरान सुरक्षा और व्यवस्थाओं के बीच बेहतर तालमेल कैसे सुनिश्चित किया जाए।

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