उत्तरप्रदेश : दस तेंदुओं की खाल के साथ गिरफ्तार किए गए चार वन्यजीव तस्करों को मंगलवार सुबह से पांच दिन की रिमांड मिल गई है। अब वन विभाग के साथ केंद्र सरकार की वाइल्डलाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो (WCCB) और मध्य प्रदेश स्पेशल टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स (MPSTPF) के अधिकारी आरोपितों से पूछताछ करेंगे।
जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास करेंगी कि तस्करी का यह नेटवर्क कितना बड़ा है और इसमें कितने लोग शामिल हैं। अधिकारियों को आशंका है कि गिरफ्तार आरोपितों के तार वन्यजीवों के अवैध शिकार और खाल की अंतरराज्यीय तस्करी से जुड़े हो सकते हैं।
पूछताछ में खुलेगा तस्करी नेटवर्क का राज
रिमांड मिलने के बाद जांच एजेंसियों ने आरोपितों से पूछताछ शुरू कर दी है। अधिकारियों का मुख्य फोकस यह पता लगाना है कि तेंदुओं का शिकार कहां किया गया, खाल किस माध्यम से एकत्र की गई और इसे कहां पहुंचाने की योजना थी।
जांच एजेंसियां आरोपितों से उनके संपर्कों, सहयोगियों और खरीदारों के बारे में भी जानकारी जुटाएंगी। वन विभाग यह भी पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि इस गिरोह ने इससे पहले कितनी वन्यजीव तस्करी की घटनाओं को अंजाम दिया है।
WCCB और MPSTPF भी जांच में शामिल
मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार की वाइल्डलाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो और मध्य प्रदेश स्पेशल टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स को भी जांच में शामिल किया गया है।
वन्यजीव अपराधों की जांच में इन एजेंसियों को विशेषज्ञता हासिल है। दोनों एजेंसियां आरोपितों से पूछताछ कर तस्करी के पूरे नेटवर्क तक पहुंचने का प्रयास करेंगी।
अधिकारियों का मानना है कि बड़ी संख्या में तेंदुओं की खाल बरामद होना किसी संगठित गिरोह की सक्रियता की ओर संकेत करता है।
तेंदुओं के शिकार पर बढ़ी चिंता
तेंदुआ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत संरक्षित प्रजाति है। इसके शिकार, अंगों की खरीद-फरोख्त और तस्करी पर कड़े कानूनी प्रावधान हैं।
इसके बावजूद अंतरराष्ट्रीय बाजार में वन्यजीवों के अंगों की मांग के कारण अवैध तस्करी के मामले सामने आते रहते हैं। तेंदुए की खाल का इस्तेमाल अवैध रूप से सजावटी वस्तुओं और अन्य सामानों में किया जाता है।
वन विभाग लगातार ऐसे गिरोहों के खिलाफ अभियान चला रहा है।
आरोपितों से जुटाए जाएंगे अहम सुराग
जांच अधिकारियों के अनुसार, रिमांड के दौरान आरोपितों से कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिलने की उम्मीद है। उनसे यह पता किया जाएगा कि उन्होंने तेंदुओं का शिकार किस इलाके में किया और खाल को कहां से कहां तक पहुंचाया जाना था।
इसके अलावा यह भी जांच की जा रही है कि क्या इस गिरोह के संबंध किसी बड़े वन्यजीव तस्कर या अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से हैं।
वन विभाग ने तेज की कार्रवाई
वन विभाग ने घटना के बाद जांच का दायरा बढ़ा दिया है। अधिकारियों की अलग-अलग टीमें मामले से जुड़े साक्ष्य जुटा रही हैं।
बरामद तेंदुए की खालों की जांच विशेषज्ञों के माध्यम से कराई जा रही है, ताकि उनकी उम्र, स्रोत और अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आ सकें।
पर्यावरण संरक्षण के लिए बड़ी चुनौती
वन्यजीवों की तस्करी पर्यावरण संरक्षण के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। किसी भी संरक्षित प्रजाति के शिकार से जैव विविधता को नुकसान पहुंचता है।
वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में केवल तस्करों की गिरफ्तारी पर्याप्त नहीं होती, बल्कि पूरे नेटवर्क को खत्म करना जरूरी होता है।
आगे की जांच पर नजर
फिलहाल चारों आरोपित पांच दिन की रिमांड पर हैं और उनसे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां मामले की हर कड़ी को जोड़ने में जुटी हैं।
उम्मीद है कि पूछताछ के बाद वन्यजीव तस्करी से जुड़े अन्य लोगों तक भी पहुंच बनाई जा सकेगी। दस तेंदुओं की खाल बरामद होने का मामला वन विभाग और सुरक्षा एजेंसियों के लिए गंभीर चुनौती बना हुआ है।