NDPS केस में गवाही में देरी पर फटकार, अदालत ने इंस्पेक्टर के खर्च की जांच के दिए संकेत

Update: 2026-07-25 15:06 GMT

गाजीपुर  :   एनडीपीएस अधिनियम से जुड़े वर्षों पुराने लंबित मुकदमों की सुनवाई में लगातार हो रही देरी पर न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाया है। अपर सत्र न्यायाधीश कक्ष संख्या-एक शक्ति सिंह की अदालत ने वर्ष 2009 से लंबित एक एनडीपीएस मुकदमे तथा नौ वर्ष पुराने दूसरे मामले में गवाही के लिए बार-बार अनुपस्थित रहने पर वर्तमान में रॉबर्ट्सगंज (सोनभद्र) के प्रभारी निरीक्षक रामस्वरूप वर्मा के प्रति गंभीर नाराजगी जताई है। अदालत ने न केवल उनकी अनुपस्थिति पर सवाल उठाए, बल्कि जनवरी 2026 से वेतन रोके जाने के बावजूद उनके जीविकोपार्जन को लेकर भी टिप्पणी करते हुए मामले की जांच कराने के संकेत दिए हैं।

अदालत ने इस संबंध में पुलिस उपमहानिरीक्षक (डीआईजी) मिर्जापुर रेंज तथा अपर पुलिस महानिदेशक (एडीजी) वाराणसी जोन को भी पत्र भेजा है, ताकि पूरे मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जा सके। न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई 23 जुलाई निर्धारित की है।

17 वर्षों से लंबित है मुकदमा

अदालत के आदेश के अनुसार संबंधित एनडीपीएस मामला वर्ष 2009 से लंबित है। मुकदमे में अंतिम गवाह पीडब्ल्यू-3 का बयान 24 जुलाई 2019 को दर्ज किया गया था, लेकिन इसके बाद से प्रभारी निरीक्षक रामस्वरूप वर्मा की गवाही पूरी नहीं हो सकी। करीब सात वर्ष बीत जाने के बावजूद उनका बयान अधूरा रहने से मुकदमे का निस्तारण संभव नहीं हो पाया।

न्यायालय ने इसे न्यायिक प्रक्रिया में गंभीर बाधा बताते हुए कहा कि 17 वर्षों तक किसी आपराधिक मुकदमे का लंबित रहना न्याय व्यवस्था की प्रभावशीलता पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। अदालत ने कहा कि गवाहों की अनुपस्थिति और अधिकारियों की लापरवाही के कारण न्याय मिलने में अनावश्यक देरी हो रही है।

वेतन रोके जाने पर भी उठे सवाल

सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि प्रभारी निरीक्षक रामस्वरूप वर्मा का वेतन जनवरी 2026 से रोका गया है। ऐसे में न्यायालय ने सवाल किया कि पिछले लगभग छह माह से उनका जीविकोपार्जन किस प्रकार हो रहा है। अदालत ने इस पहलू की भी जांच कराने की आवश्यकता जताई और संबंधित वरिष्ठ अधिकारियों को मामले पर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।

न्यायिक प्रक्रिया में सहयोग की अपेक्षा

अदालत ने स्पष्ट किया कि आपराधिक मामलों में पुलिस अधिकारियों की गवाही अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। यदि जांच अधिकारी या संबंधित अधिकारी समय पर न्यायालय में उपस्थित नहीं होते हैं, तो इससे मुकदमों के निस्तारण में वर्षों की देरी होती है और न्याय प्रक्रिया प्रभावित होती है।

न्यायालय ने पुलिस विभाग से अपेक्षा की कि वह लंबित मामलों में गवाहों की समय पर उपस्थिति सुनिश्चित करे, ताकि पुराने मामलों का शीघ्र निस्तारण हो सके और न्यायिक व्यवस्था में लोगों का विश्वास बना रहे।

अगली सुनवाई पर रहेगी नजर

अब इस मामले की अगली सुनवाई 23 जुलाई को होगी। न्यायालय को उम्मीद है कि तब तक संबंधित अधिकारियों की ओर से आवश्यक रिपोर्ट और स्पष्टीकरण प्रस्तुत किया जाएगा। यह मामला न्यायिक जवाबदेही, पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली और लंबित मुकदमों के समयबद्ध निस्तारण के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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