आगरा: ताजमहल और उसके आसपास बंदरों के हमलों से पर्यटकों की परेशानी बढ़ रही है। स्मारक देखने पहुंचने वाले भारतीय और विदेशी सैलानी इनके निशाने पर आ रहे हैं। बंदरों के काटने के अलावा सामान छीनने की घटनाएं भी सामने आई हैं। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, 23 सितंबर से 11 अक्टूबर के बीच स्मारक के अंदर और बाहर 10 से अधिक पर्यटकों को बंदरों ने काटा। रोकथाम के पुराने उपायों के बावजूद समस्या बनी हुई है। 

हालिया घटना रविवार, 11 अक्टूबर की है। अमेरिका की महिला पर्यटक कासिक शैनन जाय और आंध्र प्रदेश के सैयद ख्वाजा को बंदरों ने काट लिया। दोनों को ताजमहल परिसर स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। वहां प्राथमिक उपचार और एंटी-रैबीज इंजेक्शन दिया गया। उपचार के बाद दोनों पर्यटकों ने स्मारक का भ्रमण किया। 
आंध्र प्रदेश के 51 वर्षीय सैयद ख्वाजा सुबह लगभग साढ़े 11 बजे मस्जिद के पास घूम रहे थे। इसी दौरान पीछे से आए बंदर ने उनके दाएं पैर की एड़ी में काट लिया। उनके चिल्लाने पर आसपास मौजूद पर्यटकों ने बंदर को भगाया। दूसरी घटना में 57 वर्षीय अमेरिकी महिला के बाएं हाथ में कोहनी के पास बंदर ने काटा। दोनों घटनाओं ने परिसर में पर्यटकों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ाई। 
इससे पहले भी विभिन्न राज्यों और देशों के पर्यटक बंदरों के हमलों का शिकार हो चुके हैं। अगस्त में केरल से आए पर्यटक और हरियाणा के छह वर्षीय बच्चे को काटने की घटनाएं सामने आई थीं। सितंबर में दिल्ली, ब्रिटेन, ब्राजील और पश्चिम बंगाल के पर्यटक भी प्रभावित हुए। लगातार अलग-अलग स्थानों पर हमले होने से समस्या केवल किसी एक प्रवेश द्वार तक सीमित नहीं दिखाई देती। jagran.कॉम जुलाई में दक्षिण कोरिया की एक महिला पर्यटक को बंदर ने हाथ में काटा था। उस घटना में चिकित्सा सहायता की व्यवस्था पर भी सवाल उठे थे। एंबुलेंस पहुंचने में कथित देरी के बाद उन्हें दूसरे वाहन से अस्पताल भेजा गया। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने मुख्य चिकित्साधिकारी को पत्र लिखकर मामले में कार्रवाई की मांग की थी। पर्यटक दंपती उस समय ताजमहल देखे बिना लौट गया था। 
बंदरों को पकड़ने के लिए अक्टूबर की शुरुआत में नगर निगम ने दशहरा घाट पर पिंजरा लगाया था। पहले दिन 25 बंदर पकड़े गए और वन विभाग द्वारा चिह्नित वन क्षेत्रों में छोड़े गए। निगम के पशु कल्याण अधिकारी ने उस समय बताया था कि पर्यटकों के पीछे दौड़ने, खाद्य सामग्री झपटने और काटने की घटनाओं को देखते हुए अभियान शुरू किया गया है। इससे पहले भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने 28 सितंबर को नगर निगम को पत्र भेजकर कार्रवाई की मांग की थी। पत्र में पिछले वर्ष जुलाई से कई बार समस्या की जानकारी देने का उल्लेख था। इसके बाद पिंजरा लगाने की कार्रवाई हुई। निगम ने तब अन्य क्षेत्रों में भी टीम और पिंजरे बढ़ाने की योजना बताई थी। 
वर्ष 2023 में भी हमले बढ़ने पर बंदरों के प्रवेश वाले स्थानों पर फेंसिंग कराई गई थी। ताज सुरक्षा पुलिस ने विशेष दल बनाया और आसपास अल्ट्रासोनिक मशीनें लगाने की योजना तैयार की। हालांकि, 11 मशीनें खरीदने का प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ सका। स्मार्ट पोल से ध्वनि बजाने का प्रयास भी बाद में बंद हो गया। 
अब बंदर पकड़ने की जिम्मेदारी पर विभागों के अलग-अलग बयान हैं। वन विभाग इसे नगर निगम का काम बता रहा है, जबकि निगम का कहना है कि नौ अक्टूबर के शासनादेश के बाद जिम्मेदारी वन विभाग की है। इन दावों के बीच पर्यटकों को राहत देने वाली नियमित व्यवस्था और विभागीय समन्वय का सवाल बना हुआ है।
Tags: