लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी ने संगठन को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। भाजपा ने अपनी नई प्रदेश कार्यसमिति का ऐलान कर दिया है, जिसमें कुल 712 नेताओं को शामिल किया गया है। प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी की ओर से जारी इस सूची में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, दोनों उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक समेत कई वरिष्ठ नेताओं को जगह दी गई है। हालांकि, इस कार्यसमिति की सबसे अधिक चर्चा समाजवादी पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हुए तीन विधायकों को जगह नहीं मिलने को लेकर हो रही है। इनमें गोसाईंगंज से विधायक अभय सिंह, गौरीगंज से विधायक राकेश प्रताप सिंह और कालपी से विधायक विनोद चतुर्वेदी शामिल हैं। तीनों नेताओं के नाम नई कार्यसमिति की सूची में नहीं होने से राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं।
सपा से भाजपा में आए इन तीन विधायकों को नहीं मिली जगह
भाजपा की नई प्रदेश कार्यसमिति में समाजवादी पार्टी से आए तीन विधायकों को शामिल नहीं किया गया है। ये वही विधायक हैं जिन्होंने पिछले दिनों अमेठी में आयोजित एक बड़ी रैली के दौरान भाजपा की सदस्यता ग्रहण की थी।
गोसाईंगंज विधायक अभय सिंह, गौरीगंज विधायक राकेश प्रताप सिंह और कालपी विधायक विनोद चतुर्वेदी के नाम सूची से गायब हैं। विधानसभा चुनाव से पहले इन नेताओं के भाजपा में शामिल होने को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना गया था।
हालांकि, पार्टी की नई कार्यसमिति में इन्हें शामिल नहीं करने का कारण आधिकारिक तौर पर स्पष्ट नहीं किया गया है। ऐसे में इसे संगठन की ओर से किसी विशेष संदेश या नाराजगी का संकेत मानना फिलहाल जल्दबाजी होगी।
मनोज पांडेय को मिली कार्यसमिति में जगह
जहां सपा से आए तीन विधायकों को कार्यसमिति में स्थान नहीं मिला है, वहीं समाजवादी पार्टी छोड़कर भाजपा में आए मनोज पांडेय को विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में शामिल किया गया है।रायबरेली की ऊंचाहार विधानसभा सीट से विधायक मनोज पांडेय उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री भी हैं। कार्यसमिति में उनकी मौजूदगी इसलिए चर्चा में है क्योंकि अन्य दलों से भाजपा में आने वाले नेताओं के संगठनात्मक समायोजन को लेकर अलग-अलग निर्णय सामने आए हैं।राजनीतिक जानकारों के अनुसार, किसी दल की कार्यसमिति में नेताओं का चयन उनकी वरिष्ठता, संगठनात्मक भूमिका, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और पार्टी की प्राथमिकताओं के आधार पर किया जा सकता है।
तीन श्रेणियों में बांटी गई 712 सदस्यीय कार्यसमिति
भाजपा ने अपनी नई प्रदेश कार्यसमिति को तीन श्रेणियों में विभाजित किया है। इसमें 30 स्थायी आमंत्रित सदस्य, 134 विशेष आमंत्रित सदस्य और 548 सामान्य प्रदेश कार्यसमिति सदस्य शामिल हैं।पार्टी ने वरिष्ठ नेतृत्व के साथ विभिन्न क्षेत्रों और संगठन से जुड़े नेताओं को प्रतिनिधित्व देने का प्रयास किया है।इससे पहले 2021 में प्रदेश कार्यसमिति के सामान्य सदस्यों की संख्या 343 थी, जो अब बढ़कर 548 हो गई है। यानी इस श्रेणी में 205 सदस्यों की बढ़ोतरी हुई है।भाजपा की यह विस्तारित कार्यसमिति आने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारियों और संगठनात्मक कार्यक्रमों के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
पीएम मोदी और सीएम योगी समेत कई बड़े नेता शामिल
नई कार्यसमिति के स्थायी आमंत्रित सदस्यों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और दोनों उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य तथा ब्रजेश पाठक के नाम शामिल हैं।
इसके अलावा भाजपा के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी, पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह, भूपेंद्र सिंह चौधरी, महेंद्र नाथ पांडेय और विनय कटियार को भी जगह दी गई है।केंद्रीय मंत्रियों में हरदीप सिंह पुरी, बीएल वर्मा और कीर्तिवर्धन सिंह समेत कई नेताओं को शामिल किया गया है।पार्टी ने पूर्व पदाधिकारियों, केंद्रीय नेतृत्व और राज्य सरकार के मंत्रियों को विभिन्न श्रेणियों में स्थान दिया है।
सिनोद शाक्य के नाम को लेकर भी चर्चा
भाजपा की नई कार्यसमिति में पूर्व विधायक सिनोद कुमार शाक्य का नाम भी शामिल है। दिलचस्प बात यह है कि कार्यसमिति की घोषणा वाले दिन ही उन्होंने समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया था।रिपोर्टों के अनुसार, सिनोद शाक्य ने अखिलेश यादव की मौजूदगी में समाजवादी पार्टी की सदस्यता ली थी। इसके कुछ घंटे बाद सामने आई भाजपा की कार्यसमिति सूची में उनका नाम भी दर्ज पाया गया।इस घटनाक्रम ने सूची तैयार करने और उसे जारी करने के समय को लेकर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, इस संबंध में भाजपा की ओर से किसी संशोधन या स्पष्टीकरण की पुष्टि नहीं हुई है।
30 अक्टूबर से लखनऊ में होगी अहम बैठक
नई कार्यसमिति की घोषणा के बाद भाजपा ने लखनऊ में 30 अक्टूबर से दो दिवसीय बैठक प्रस्तावित की है।इस बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन को आमंत्रित किया गया है।पार्टी सूत्रों के अनुसार, बैठक में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर संगठनात्मक तैयारियों की रूपरेखा तय किए जाने की उम्मीद है। इसमें बूथ स्तर पर संगठन को सक्रिय करने, पार्टी कार्यक्रमों के संचालन और कार्यकर्ताओं के बीच बेहतर समन्वय जैसे विषय महत्वपूर्ण हो सकते हैं।हालांकि, बैठक के अंतिम एजेंडे और उसमें लिए जाने वाले फैसलों की आधिकारिक जानकारी बैठक के बाद ही स्पष्ट होगी।
क्षेत्रीय और सामाजिक प्रतिनिधित्व पर भी ध्यान
उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में राजनीतिक दलों के लिए क्षेत्रीय और सामाजिक प्रतिनिधित्व महत्वपूर्ण संगठनात्मक विषय है।भाजपा की नई कार्यसमिति में प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से नेताओं को शामिल किया गया है। विशेष आमंत्रित सदस्यों की श्रेणी में ब्रज क्षेत्र से 32 नेताओं को जगह मिलने की जानकारी सामने आई है।इसके अलावा पश्चिमी उत्तर प्रदेश, पूर्वांचल, अवध, कानपुर-बुंदेलखंड और अन्य क्षेत्रों से भी नेताओं को कार्यसमिति में प्रतिनिधित्व दिया गया है।पार्टी के इस विस्तार को 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले संगठनात्मक तैयारियों के संदर्भ में देखा जा रहा है।
2027 विधानसभा चुनाव से पहले संगठनात्मक तैयारियां तेज
उत्तर प्रदेश में अगला विधानसभा चुनाव 2027 में होना है। ऐसे में भाजपा के लिए नई कार्यसमिति का गठन एक महत्वपूर्ण संगठनात्मक कदम माना जा रहा है।इस समिति के माध्यम से पार्टी अपने कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों के बीच समन्वय बढ़ाने तथा आगामी कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार करने पर ध्यान दे सकती है।
वहीं, सपा छोड़कर भाजपा में आए तीन विधायकों को सूची में जगह नहीं मिलने से राजनीतिक चर्चाएं शुरू हो गई हैं। हालांकि, पार्टी ने उनके नाम शामिल नहीं किए जाने के पीछे कोई आधिकारिक कारण सार्वजनिक नहीं किया है।
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