अयोध्या। राम मंदिर आंदोलन के प्रमुख संतों में शामिल रहे दिग्गज संत रामचंद्र दास परमहंस की 23वीं पुण्यतिथि पर शुक्रवार को अयोध्या स्थित दिगंबर अखाड़े में श्रद्धांजलि समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पहुंचकर संत परमहंस को श्रद्धासुमन अर्पित किए और उनके योगदान को याद किया।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संत रामचंद्र दास परमहंस को नमन करते हुए कहा कि उनका पूरा जीवन श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माण के संकल्प को पूरा करने के लिए समर्पित रहा। उन्होंने कहा कि संत परमहंस ने अपने जीवन का एकमात्र उद्देश्य श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन को आगे बढ़ाना माना और अंतिम समय तक इसी लक्ष्य के लिए संघर्ष करते रहे।
श्रद्धांजलि समारोह में मुख्यमंत्री ने कहा कि संत रामचंद्र दास परमहंस केवल एक संत नहीं थे, बल्कि राम मंदिर आंदोलन की एक मजबूत आवाज थे। उन्होंने कहा कि 1949 से लेकर अपने जीवन के अंतिम क्षण तक संत परमहंस श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन से प्रत्यक्ष रूप से जुड़े रहे और मंदिर निर्माण के संकल्प को लेकर निरंतर प्रयास करते रहे।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि संत परमहंस का जीवन त्याग, तपस्या और संकल्प का प्रतीक था। उन्होंने अपनी पूरी ऊर्जा और जीवन समाज तथा धर्म से जुड़े कार्यों के लिए समर्पित कर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि राम मंदिर निर्माण के लिए संत परमहंस का योगदान हमेशा याद किया जाएगा।
दिगंबर अखाड़े में आयोजित इस कार्यक्रम में संत समाज, श्रद्धालु और कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। सभी ने संत रामचंद्र दास परमहंस के जीवन और उनके संघर्षों को याद किया। कार्यक्रम के दौरान उनके विचारों और राम मंदिर आंदोलन में उनकी भूमिका पर चर्चा की गई।
संत रामचंद्र दास परमहंस का नाम राम मंदिर आंदोलन के प्रमुख चेहरों में लिया जाता है। उन्होंने लंबे समय तक श्रीराम जन्मभूमि से जुड़े आंदोलन का नेतृत्व किया। उनका मानना था कि अयोध्या में भगवान श्रीराम का भव्य मंदिर बनना चाहिए और इसके लिए उन्होंने दशकों तक संघर्ष किया।
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि संत परमहंस जैसे महापुरुष समाज को दिशा देने का काम करते हैं। उनके विचार और संकल्प आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत रहेंगे। उन्होंने कहा कि संत परमहंस ने धर्म, संस्कृति और आस्था के लिए जो योगदान दिया, उसे कभी भुलाया नहीं जा सकता।
श्रद्धांजलि समारोह में संतों ने भी संत रामचंद्र दास परमहंस को याद करते हुए कहा कि उनका जीवन रामभक्ति और राष्ट्र सेवा का उदाहरण था। उन्होंने समाज को एकजुट करने और धार्मिक चेतना को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
संत परमहंस का जीवन अयोध्या और राम मंदिर आंदोलन से गहराई से जुड़ा रहा। उन्होंने आंदोलन के कठिन दौर में भी अपना विश्वास बनाए रखा और मंदिर निर्माण के संकल्प से पीछे नहीं हटे। उनके अनुयायी उन्हें एक ऐसे संत के रूप में याद करते हैं, जिन्होंने अपने जीवन का हर क्षण भगवान श्रीराम की सेवा और मंदिर निर्माण के उद्देश्य को समर्पित किया।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आज जब अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण हो चुका है, तब संत रामचंद्र दास परमहंस जैसे संतों के संघर्ष और योगदान को याद करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि वर्तमान पीढ़ी को उनके जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए और उनके आदर्शों को आगे बढ़ाना चाहिए।
कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री ने संत परमहंस की स्मृति को नमन करते हुए कहा कि उनका योगदान भारतीय संस्कृति और आस्था के इतिहास में हमेशा अमर रहेगा। उन्होंने कहा कि अयोध्या और श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन के इतिहास में संत रामचंद्र दास परमहंस का नाम सदैव सम्मान के साथ लिया जाएगा।
संत परमहंस की पुण्यतिथि पर आयोजित यह श्रद्धांजलि समारोह उनके संघर्ष, तपस्या और श्रीराम के प्रति उनकी अटूट श्रद्धा को याद करने का अवसर बना। संत समाज और श्रद्धालुओं ने उनके दिखाए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।