सितारगंज में रिश्वतखोरी का खुलासा, अमीन और सहायक गिरफ्तार

Update: 2026-07-29 15:57 GMT

ऊधम सिंह नगर। उत्तराखंड के सितारगंज तहसील में भ्रष्टाचार के खिलाफ सतर्कता अधिष्ठान (विजिलेंस) ने बड़ी कार्रवाई की है। तहसील परिसर में रिश्वत लेते हुए संग्रह अमीन और वरिष्ठ सहायक को रंगेहाथ गिरफ्तार किया गया है। दोनों कर्मचारियों पर भूमि कुर्की आदेश खत्म कराने, जमीन को बंधनमुक्त कराने और किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) ऋण से जुड़ी आरसी कार्रवाई समाप्त कराने के नाम पर रिश्वत मांगने का आरोप है।

विजिलेंस की इस कार्रवाई से तहसील परिसर में हड़कंप मच गया। अचानक हुई गिरफ्तारी के बाद कर्मचारी और वहां मौजूद लोग पूरे मामले की जानकारी जुटाने में लगे रहे। गिरफ्तार किए गए कर्मचारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी गई है।

जानकारी के अनुसार, शिकायतकर्ता ने सतर्कता अधिष्ठान को शिकायत दी थी कि सितारगंज तहसील में तैनात संग्रह अमीन मदन लाल शर्मा और वरिष्ठ सहायक भूपेंद्र सिंह राणा उसके सरकारी काम को पूरा कराने के बदले रिश्वत की मांग कर रहे हैं। शिकायत में आरोप लगाया गया कि भूमि कुर्की के आदेश को समाप्त कराने और जमीन को बंधनमुक्त कराने के लिए 10 हजार रुपये की मांग की गई थी।

इसके अलावा शिकायतकर्ता की पत्नी के नाम पर जारी केसीसी ऋण से संबंधित आरसी कार्रवाई खत्म कराने के लिए भी 6 हजार रुपये रिश्वत मांगी गई थी। शिकायत मिलने के बाद विजिलेंस अधिकारियों ने मामले का सत्यापन कराया। जांच में आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए जाने के बाद कार्रवाई की योजना बनाई गई।

सतर्कता अधिष्ठान सेक्टर हल्द्वानी के पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में प्रभारी निरीक्षक प्रभात कुमार के नेतृत्व में एक ट्रैप टीम गठित की गई। टीम ने पूरी योजना के साथ तहसील परिसर में कार्रवाई को अंजाम दिया।

पूर्व निर्धारित योजना के तहत बुधवार को शिकायतकर्ता को रिश्वत की रकम के साथ तहसील भेजा गया। जैसे ही कर्मचारियों ने रिश्वत की रकम स्वीकार की, पहले से मौजूद विजिलेंस टीम ने दोनों को पकड़ लिया। कार्रवाई के दौरान संग्रह अमीन मदन लाल शर्मा को 8 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया, जबकि वरिष्ठ सहायक भूपेंद्र सिंह राणा को 6 हजार रुपये लेते हुए गिरफ्तार किया गया।

विजिलेंस टीम दोनों आरोपित कर्मचारियों को अपने साथ ले गई और आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई। अधिकारियों के मुताबिक, मामले में अन्य पहलुओं की भी जांच की जा रही है। यह पता लगाया जा रहा है कि रिश्वतखोरी के इस मामले में कोई अन्य कर्मचारी या व्यक्ति भी शामिल तो नहीं है।

सतर्कता अधिष्ठान के अधिकारियों ने बताया कि भ्रष्टाचार के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है। सरकारी कार्यालयों में आम जनता से जुड़े कार्यों में रिश्वत मांगने वाले कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

सतर्कता अधिष्ठान के निदेशक डॉ. वी. मुरुगेशन ने आम लोगों से अपील की है कि यदि कोई सरकारी कर्मचारी किसी काम के बदले रिश्वत की मांग करता है तो इसकी सूचना तुरंत विभाग को दें। उन्होंने बताया कि शिकायतकर्ता की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाती है और शिकायतों का सत्यापन करने के बाद दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाती है।

इसके लिए सतर्कता अधिष्ठान ने टोल फ्री नंबर 1064 और वाट्सएप हेल्पलाइन नंबर 9456592300 जारी किया है। अधिकारियों का कहना है कि भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए आम जनता की भागीदारी बेहद जरूरी है। सितारगंज तहसील में हुई इस कार्रवाई को इसी दिशा में एक बड़ी सफलता माना जा रहा है।

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