देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में डेंगू और चिकनगुनिया के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को डेंगू के आठ और चिकनगुनिया के 10 नए मरीज मिलने की जानकारी सामने आई है। इसके साथ ही जिले में डेंगू के कुल मामलों की संख्या 356 और चिकनगुनिया के मामलों का आंकड़ा 237 तक पहुंचने की बात कही जा रही है। मच्छरजनित बीमारियों के लगातार सामने आ रहे नए मामलों ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है।
हालांकि, 23 अक्टूबर के इन ताजा आंकड़ों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है। इससे पहले 18 अक्टूबर की प्रकाशित रिपोर्ट में जिले में डेंगू के 335 मरीज दर्ज किए गए थे। उस समय 322 मरीज स्वस्थ हो चुके थे, जबकि 13 का अस्पतालों में इलाज चल रहा था।
एक दिन में सामने आए 18 नए मरीज
प्राप्त जानकारी के अनुसार, शुक्रवार को जिले में डेंगू और चिकनगुनिया के कुल 18 नए मामले सामने आए।इनमें आठ मरीज डेंगू और 10 मरीज चिकनगुनिया से संक्रमित बताए गए हैं।डेंगू के कुल मामलों की संख्या 356 और चिकनगुनिया की 237 होने की जानकारी मिली है।दोनों बीमारियां मच्छरों के काटने से फैलती हैं। ऐसे में नए मरीजों का सामने आना स्वास्थ्य विभाग के साथ आम नागरिकों के लिए भी चिंता का विषय है।मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी को देखते हुए लोगों को विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है।
अक्टूबर में लगातार बढ़े संक्रमण के मामले
देहरादून में अक्टूबर की शुरुआत से ही डेंगू और चिकनगुनिया के मरीज सामने आ रहे हैं।छह अक्टूबर को प्रकाशित स्वास्थ्य रिपोर्ट के अनुसार, जिले में एक दिन में डेंगू के 13 नए मरीज मिले थे। उस समय कुल संक्रमितों की संख्या 273 पहुंच गई थी।इसके बाद 13 अक्टूबर की रिपोर्ट में डेंगू के नौ और चिकनगुनिया के सात नए मरीज सामने आने की जानकारी दी गई।उस समय डेंगू के कुल 314 और चिकनगुनिया के 203 मामले दर्ज किए गए थे।लगातार बढ़ते संक्रमण को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग की ओर से जांच और जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है।
अस्पतालों में बढ़ रहे बुखार के मरीज
मौसम में बदलाव के बीच दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल में बुखार, जुकाम और शरीर में दर्द की शिकायत लेकर आने वाले मरीजों की संख्या भी बढ़ी है।13 अक्टूबर को प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, अस्पताल की एक दिन की ओपीडी में 2,711 मरीज पहुंचे थे।इनमें मेडिसिन विभाग में 501 मरीजों ने चिकित्सकीय परामर्श लिया।चिकित्सकों ने बताया था कि बुखार, जुकाम और शरीर में अकड़न की शिकायत वाले मरीज बड़ी संख्या में अस्पताल पहुंच रहे हैं।हालांकि, बुखार के सभी मरीज डेंगू या चिकनगुनिया से संक्रमित नहीं होते। सही बीमारी की पहचान के लिए चिकित्सकीय परीक्षण जरूरी है।
घर-घर सर्वे में मिल रहे मच्छरों के लार्वा
डेंगू और चिकनगुनिया की रोकथाम में मच्छरों के प्रजनन स्थलों की पहचान बेहद महत्वपूर्ण है।स्वास्थ्य विभाग की टीमें घरों और आसपास के क्षेत्रों में जमा पानी की जांच कर रही हैं।18 अक्टूबर की रिपोर्ट के अनुसार, देहरादून में 7,101 घरों का सर्वे किया गया था। इनमें 54 घरों में मच्छरों के लार्वा मिले थे।इससे स्पष्ट होता है कि संक्रमण का खतरा कम करने के लिए मच्छरों के प्रजनन स्थलों को समाप्त करना जरूरी है।घरों की छतों, कूलर, गमलों, पानी की टंकियों और पुराने टायरों में जमा पानी मच्छरों के पनपने का स्थान बन सकता है।
डेंगू के लक्षण क्या हैं?
डेंगू एडीज मच्छर के काटने से फैलने वाला वायरल संक्रमण है।इसके प्रमुख लक्षणों में तेज बुखार, सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द, शरीर और जोड़ों में दर्द, कमजोरी तथा त्वचा पर लाल चकत्ते शामिल हो सकते हैं।कुछ मरीजों में उल्टी और भूख कम लगने की शिकायत भी हो सकती है।गंभीर मामलों में पेट में तेज दर्द, लगातार उल्टी, नाक या मसूड़ों से खून आना और अत्यधिक कमजोरी जैसे चेतावनी संकेत दिखाई दे सकते हैं।ऐसे लक्षण मिलने पर तत्काल अस्पताल जाना चाहिए।डेंगू में प्लेटलेट्स की संख्या कम हो सकती है, लेकिन केवल प्लेटलेट्स का आंकड़ा बीमारी की गंभीरता निर्धारित नहीं करता। मरीज की पूरी चिकित्सकीय स्थिति का आकलन आवश्यक होता है।
चिकनगुनिया में जोड़ों का दर्द प्रमुख लक्षण
चिकनगुनिया भी एडीज मच्छरों के माध्यम से फैलने वाला वायरल रोग है।इसमें अचानक तेज बुखार और जोड़ों में दर्द प्रमुख लक्षण होते हैं।कई मरीजों में हाथों, पैरों, घुटनों और कलाइयों में तेज दर्द महसूस हो सकता है।इसके अलावा मांसपेशियों में दर्द, सिरदर्द, थकान और त्वचा पर चकत्ते भी दिखाई दे सकते हैं।कुछ मरीजों में बुखार ठीक होने के बाद भी जोड़ों का दर्द लंबे समय तक बना रह सकता है।इसलिए चिकनगुनिया के लक्षण दिखाई देने पर चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।
दोनों बीमारियों के लक्षणों में समानता
डेंगू और चिकनगुनिया के कई लक्षण मिलते-जुलते हैं।दोनों बीमारियों में बुखार, बदन दर्द और कमजोरी हो सकती है।यही कारण है कि केवल लक्षण देखकर दोनों संक्रमणों के बीच अंतर करना हमेशा संभव नहीं होता।चिकित्सक मरीज की स्थिति और बीमारी की अवधि के अनुसार आवश्यक जांच कराने की सलाह दे सकते हैं।बिना जांच और चिकित्सकीय परामर्श के स्वयं दवाएं लेना नुकसानदायक हो सकता है।विशेष रूप से डेंगू की आशंका होने पर एस्पिरिन या आइबुप्रोफेन जैसी दवाओं से बचना चाहिए, क्योंकि इनसे
रक्तस्राव
का जोखिम बढ़ सकता है।
स्वास्थ्य विभाग ने बढ़ाई निगरानी
देहरादून में डेंगू के बढ़ते मामलों के बीच मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. मनोज कुमार शर्मा ने पहले ही अस्पतालों को आवश्यक व्यवस्थाएं बनाए रखने और लोगों को जागरूक करने के निर्देश दिए थे।स्वास्थ्य विभाग की ओर से डेंगू के मरीजों के उपचार के लिए अस्पतालों में विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं।इसके अलावा आशा कार्यकर्ताओं और स्वयंसेवकों की सहायता से घर-घर सर्वे कराया जा रहा है।इस अभियान का उद्देश्य मच्छरों के लार्वा की पहचान करना और लोगों को संक्रमण से बचाव के प्रति जागरूक करना है।
डेंगू और चिकनगुनिया से ऐसे करें बचाव
मच्छरजनित बीमारियों से बचाव के लिए घर और आसपास साफ-सफाई बनाए रखना जरूरी है।कूलर, गमलों और पानी के बर्तनों में लंबे समय तक पानी जमा नहीं रहने देना चाहिए।पानी की टंकियों को ढककर रखना चाहिए और सप्ताह में कम से कम एक बार संभावित प्रजनन स्थलों की सफाई करनी चाहिए।पूरी बांह के कपड़े पहनना, मच्छररोधी उपाय अपनाना और खिड़कियों पर जाली लगाना भी उपयोगी है।एडीज मच्छर दिन में भी काट सकते हैं, इसलिए केवल रात में मच्छरों से बचाव करना पर्याप्त नहीं है।
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