देहरादून : भानियावाला-जालीग्रांट-ऋषिकेश फोरलेन राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना को लेकर पर्यावरण और वन संरक्षण से जुड़े सवालों पर भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने अपनी स्थिति स्पष्ट की है। प्राधिकरण ने कहा है कि परियोजना के निर्माण में पर्यावरण संरक्षण और वन्यजीवों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।
NHAI ने उन दावों को भ्रामक बताया है, जिनमें हाईकोर्ट के आदेशों की अवहेलना कर पेड़ों के कटान का आरोप लगाया गया था। प्राधिकरण का कहना है कि परियोजना की योजना बनाते समय ही पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं।
वन क्षेत्र में सड़क की चौड़ाई घटाई गई
NHAI के परियोजना निदेशक (PIU) सौरभ सिंह ने बताया कि परियोजना की डिजाइन तैयार करते समय पर्यावरणीय संतुलन का विशेष ध्यान रखा गया है।
उन्होंने कहा कि वन क्षेत्र में सड़क निर्माण के लिए राइट ऑफ वे (ROW) को 60 मीटर से घटाकर केवल 23 मीटर किया गया है। इसका उद्देश्य कम से कम वन क्षेत्र प्रभावित हो और पेड़ों की कटाई को न्यूनतम रखा जा सके।
उन्होंने बताया कि परियोजना में पर्यावरण संरक्षण से जुड़े सभी मानकों का पालन किया जा रहा है और संबंधित विभागों से आवश्यक अनुमतियां लेने के बाद ही कार्य आगे बढ़ाया जा रहा है।
हाथियों की आवाजाही के लिए विशेष व्यवस्था
राजाजी राष्ट्रीय उद्यान और आसपास के वन क्षेत्रों में वन्यजीवों की आवाजाही को देखते हुए परियोजना में विशेष प्रावधान किए गए हैं।
NHAI के अनुसार, हाथियों और अन्य वन्यजीवों की सुरक्षित आवाजाही के लिए एक ब्रिज-कम-एलीफेंट अंडरपास, चार एलीफेंट अंडरपास, छह बॉक्स कल्वर्ट और 13 पाइप कल्वर्ट बनाए जा रहे हैं।
इन संरचनाओं का उद्देश्य वन्यजीवों के प्राकृतिक रास्तों को सुरक्षित रखना और सड़क पार करते समय दुर्घटनाओं की संभावना को कम करना है।
वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए आधुनिक उपाय
प्राधिकरण ने बताया कि परियोजना क्षेत्र में वन्यजीवों और पर्यावरण की सुरक्षा के लिए कई अन्य उपाय भी किए जा रहे हैं।
इनमें ग्रीन गाइड हेज, साउंड बैरियर, एंटी-ग्लेयर स्क्रीन, वन्यजीव चेतावनी संकेतक और नो हॉर्न जोन जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं।
ग्रीन गाइड हेज और अन्य सुरक्षा उपायों से वन्यजीवों को सड़क क्षेत्र से दूर रखने में मदद मिलेगी, जबकि एंटी-ग्लेयर स्क्रीन और साउंड बैरियर से मानव गतिविधियों का वन्यजीवों पर प्रभाव कम होगा।
वन्यजीव गलियारों का रखा जा रहा ध्यान
NHAI अधिकारियों के अनुसार, परियोजना तैयार करते समय वन्यजीव गलियारों का विशेष अध्ययन किया गया है। सड़क निर्माण के दौरान यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि जानवरों की प्राकृतिक आवाजाही बाधित न हो।
हाथियों के आवागमन वाले क्षेत्रों में विशेष संरचनाएं बनाई जा रही हैं ताकि वे बिना किसी खतरे के एक स्थान से दूसरे स्थान तक जा सकें।
पर्यावरण संगठनों की चिंताओं पर जवाब
फोरलेन परियोजना को लेकर कुछ पर्यावरण प्रेमियों और संगठनों ने वन क्षेत्र और पेड़ों पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर चिंता जताई थी।
इसके जवाब में NHAI ने कहा कि परियोजना में पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। प्राधिकरण ने कहा कि निर्माण कार्य पर्यावरणीय नियमों और निर्धारित प्रक्रियाओं के अनुसार किया जा रहा है।
विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन का प्रयास
NHAI का कहना है कि भानियावाला-जालीग्रांट-ऋषिकेश फोरलेन परियोजना क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और यातायात सुविधा के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके साथ पर्यावरण संरक्षण भी उतना ही जरूरी है।
प्राधिकरण ने कहा कि परियोजना का उद्देश्य केवल सड़क निर्माण नहीं है, बल्कि ऐसा बुनियादी ढांचा तैयार करना है जिसमें विकास के साथ प्रकृति और वन्यजीवों का संरक्षण भी सुनिश्चित हो।
यात्रियों को मिलेगी बेहतर सुविधा
फोरलेन परियोजना पूरी होने के बाद देहरादून, जौलीग्रांट एयरपोर्ट और ऋषिकेश के बीच यातायात व्यवस्था में सुधार की उम्मीद है।
NHAI के अनुसार, बेहतर सड़क सुविधा से यात्रा का समय कम होगा और क्षेत्र के लोगों को आवागमन में आसानी होगी। साथ ही पर्यावरण सुरक्षा के उपायों के कारण परियोजना को संतुलित और टिकाऊ बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
प्राधिकरण ने दोहराया कि परियोजना में पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण से जुड़े सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए काम किया जा रहा है।