चमोली। टीएचडीसी की 444 मेगावाट क्षमता वाली निर्माणाधीन विष्णुगाड पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना की टेल रेस टनल में हुए हादसे ने वहां काम करने वाले कर्मचारियों को गहरे सदमे में डाल दिया है। घटना के प्रत्यक्षदर्शी अभी भी उस खौफनाक मंजर को भूल नहीं पा रहे हैं। हादसे के दौरान टनल के अंदर मौजूद कर्मचारियों ने जिस तरह अचानक पानी और मलबे का तेज बहाव देखा, वह उनके लिए जिंदगी भर की डरावनी याद बन गया है।

हालांकि राहत की बात यह है कि हादसे में घायल हुए कर्मचारियों की हालत अब धीरे-धीरे बेहतर हो रही है। जिला चिकित्सालय में भर्ती कई घायलों का इलाज जारी है। डॉक्टरों के अनुसार, उपचार के बाद उनकी स्थिति में सुधार देखने को मिल रहा है। लेकिन हादसे की भयावह यादों ने कर्मचारियों के मन में डर और चिंता पैदा कर दी है।

परियोजना में कार्यरत मैकेनिकल सेवक सिंह निवासी पंजाब भी इस हादसे में घायल हुए हैं और उनका इलाज जिला चिकित्सालय में चल रहा है। सेवक सिंह ने हादसे के समय का अनुभव साझा करते हुए बताया कि वह रोज की तरह टनल के अंदर अपने काम में लगे हुए थे। उन्हें इस बात का अंदाजा भी नहीं था कि कुछ ही देर में वहां ऐसा खतरनाक मंजर सामने आने वाला है।

उन्होंने बताया कि काम के दौरान अचानक जोरदार धमाका हुआ। धमाके की आवाज इतनी तेज थी कि पूरा टनल क्षेत्र दहल गया। इसके बाद टनल के अंदर से तूफान जैसी आवाज सुनाई देने लगी। देखते ही देखते पानी और मिट्टी का तेज बहाव टनल के अंदर फैलने लगा। कुछ ही क्षणों में स्थिति इतनी भयावह हो गई कि वहां मौजूद लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला।

सेवक सिंह के मुताबिक, अचानक आए इस सैलाब के कारण कर्मचारियों में अफरा-तफरी मच गई। हर कोई अपनी जान बचाने के लिए सुरक्षित स्थान की ओर भागने लगा। टनल के अंदर अंधेरा और पानी का तेज दबाव होने के कारण हालात बेहद मुश्किल हो गए थे। उन्होंने बताया कि उस समय सिर्फ अपनी जान बचाने की चिंता थी।

प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि टनल में काम करना रोज की दिनचर्या का हिस्सा था। कर्मचारी हमेशा सुरक्षा नियमों का पालन करते हुए काम करते हैं, लेकिन इस तरह की अचानक घटना ने सभी को झकझोर कर रख दिया है। हादसे के बाद कई कर्मचारी मानसिक रूप से परेशान हैं और उस पल को याद कर सहम जाते हैं।

विष्णुगाड पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना क्षेत्र में हुई इस घटना के बाद राहत और बचाव कार्य तेज कर दिए गए थे। प्रशासन, परियोजना प्रबंधन और बचाव दल ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभाला। प्रभावित कर्मचारियों को बाहर निकालकर तत्काल उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया।

अस्पताल में भर्ती घायल कर्मचारियों की देखभाल की जा रही है। डॉक्टरों की टीम लगातार उनके स्वास्थ्य पर नजर बनाए हुए है। वहीं, परियोजना प्रबंधन की ओर से भी हादसे के कारणों की जांच की जा रही है।

हादसे के बाद सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। परियोजना से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि घटना की विस्तृत जांच की जाएगी और हादसे के वास्तविक कारणों का पता लगाया जाएगा। इसके साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे।

स्थानीय लोगों और कर्मचारियों ने भी परियोजना क्षेत्र में सुरक्षा उपायों को और मजबूत करने की मांग की है। उनका कहना है कि बड़ी परियोजनाओं में काम करने वाले कर्मचारियों की सुरक्षा सबसे पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।

सेवक सिंह जैसे प्रत्यक्षदर्शियों के अनुभव से साफ है कि हादसा कितना भयावह था। अचानक आए पानी और मिट्टी के सैलाब ने कुछ ही पलों में पूरी स्थिति बदल दी। अब जबकि घायल कर्मचारी धीरे-धीरे स्वस्थ हो रहे हैं, सभी की उम्मीद है कि इस घटना से सीख लेकर भविष्य में सुरक्षा व्यवस्था को और बेहतर बनाया जाएगा।

विष्णुगाड पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना हादसे ने एक बार फिर बड़े निर्माण कार्यों में सुरक्षा के महत्व को सामने ला दिया है। कर्मचारियों की जिंदगी की सुरक्षा सुनिश्चित करना ही किसी भी परियोजना की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।

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