कुल्लू। देवी-देवताओं का भव्य देव मिलन अंतरराष्ट्रीय दशहरा उत्सव के छठे दिन खास रहा। देवआस्था बारिश की बछौरों पर भारी पड़ी और देवी-देवता एक साल बाद भगवान रघुनाथ जी मिले और देवी-देवताओं ने भव्य देव मिलन किया। विश्व के सबसे बड़े देव महाकुंभ यानी अंतरराष्ट्रीय दशहरा उत्सव के छठे दिन का नजारा अद्भुत, आलौकिक रहा। भगवान रघुनाथ जी के साथ देवी-देवताओं का भव्य देव मिलन, फिर मोहल्ले से चानणी राज परिवार से मिलना आकर्षण का केंद्र रहा। हजारों लोग इस नजारे के साक्षी बने। वहीं, लोगों ने एक जगह 300 से देवी-देवताओं के दर्शन किए। बता दें कि कुल्लू की रूपी रियासत के राजा जगत सिंह के वंशज एवं भगवान रघुनाथ के छड़ीबरदार महेश्वर सिंह पारंपरिक राजाओं की वेशभूषा में सज धज कर ढालपुर में लगी चानणी में राजगद्दी पर बैठे। इस दौरान देवी-देवता यहां विराजमान हुए। इस दृश्य ने दर्शकों को पूरी तरह से भाव विभोर किया। लिहाजा, 1660 इस्वी में शुरू हुई दशहरा उत्सव की परंपरा का सोमवार को निर्वहन किया गया।
उस दौरान दशहरा उत्सव का आगाज तत्कालीन राजा जगत सिंह द्वारा किया गया था। आज भी परंपरा का निर्वहन किया जा रहा है। राजा ने उस दौरान अपनी गद्दी को नरसिंह भगवान को सौंप दिया था और स्वयं भगवान रघुनाथ के छड़ीबरदार बन गए थे। उस घटना को याद रखने और उस दौरान की परंपरा जिंदा रहे इसके लिए इस घटना को परंपराओं में दोहराया जाता है। लिहाजा, जब राजा गद्दी पर बैठा होता है तो देवता भी अपने हारियानों के साथ ढोल नगाड़ों की थाप पर नाचते हुए राजा की गद्दी तक आते हैं। लिहाजा, आज भी इस दृश्य को दोहराया गया। विश्व के सबसे बड़े देव महाकुंभ अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा पर्व में मंगलवार को सभी देवी-देवताओं ने भगवान रघुनाथ जी के अस्थायी शिविर में जाकर हाजिरी भरी। यही नहीं सभी देवी-देवताओं का रघुनाथ जी के रजिस्टर में बाकायदा एंट्री होने के बाद देव महामिलन हुआ। इस देव महामिलन को मोहल्ला कहते हैं। देवी हडिंबा माता ने फूलों का गुच्छ दिया गया, जिसे शेश कहा जाता है, उसके मिलते ही मोहल्ला पर्व शुरू हुआ। मोहल्ला पर्व में ही देवी-देवता रघुनाथ जी के दर हाजिरी भरी और रघुनाथ जी के कारकूनों ने बाकायदा देवताओं के नाम रजिस्टर में दर्ज किए।