Jaipur. जयपुर। राजधानी जयपुर के बजाज नगर इलाके में सोमवार शाम एक बड़ा हादसा हो गया, जब जवाहरलाल नेहरू मार्ग पर स्थित फॉरेस्ट ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (एफटीआई) ऑफिस की छत अचानक भरभराकर गिर गई। इस दर्दनाक घटना में वहां काम कर रहे करीब 10 मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी और चीख-पुकार मच गई। जानकारी के अनुसार, घटना उस समय हुई जब एफटीआई कार्यालय परिसर में निर्माण या मरम्मत से जुड़े कार्य चल रहे थे। इसी दौरान अचानक छत का एक हिस्सा टूटकर नीचे गिर गया, जिसकी चपेट में कई मजदूर आ गए। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि हादसा इतना अचानक हुआ कि किसी को संभलने का मौका ही नहीं मिला।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंच गई। राहत और बचाव कार्य तुरंत शुरू किया गया। सिविल डिफेंस के स्वयंसेवकों की मदद से मलबे में फंसे मजदूरों को बाहर निकाला गया और तुरंत एंबुलेंस के माध्यम से सवाई मानसिंह (एसएमएस) अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर भेजा गया। एक साथ कई घायलों के अस्पताल पहुंचने से ट्रॉमा सेंटर में भी हड़कंप मच गया। अस्पताल प्रशासन और मेडिकल स्टाफ ने तुरंत सभी घायलों के इलाज की व्यवस्था शुरू की। एसएमएस थाना पुलिस भी मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया। थानाधिकारी राजेश कुमार शर्मा ने बताया कि सभी घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद अस्पताल में भर्ती किया गया है। डॉक्टरों की टीम लगातार उनकी स्थिति पर नजर बनाए हुए है। घायलों में दौसा निवासी फोरमैन लालचंद, बिहार से आए मजदूर नीतीश कुमार मंडल, राजीव मंडल, ननकू मंडल, कार्तिक, प्रमोद कुमार, सोनू उजीत सहित अन्य मजदूर शामिल हैं। दो अन्य घायलों की पहचान की प्रक्रिया जारी है।
अस्पताल प्रशासन के अनुसार, दो मजदूरों की हालत गंभीर बताई जा रही है। इनमें स्पाइनल और हेड इंजरी की आशंका जताई गई है, जिनका विशेष परीक्षण किया जा रहा है। बाकी घायलों का इलाज जारी है और उनकी स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। ट्रॉमा सेंटर के नोडल अधिकारी डॉ. राजेंद्र मांड्या ने बताया कि सभी घायलों को एडमिट कर लिया गया है और विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम उनकी स्थिति का मूल्यांकन कर रही है। गंभीर मरीजों को विशेष निगरानी में रखा गया है ताकि किसी भी तरह की जटिलता से निपटा जा सके।
घटना के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। फिलहाल छत गिरने के कारणों का स्पष्ट पता नहीं चल पाया है। प्रारंभिक जांच में आशंका जताई जा रही है कि निर्माण कार्य के दौरान शटरिंग या तकनीकी खामी के कारण यह हादसा हुआ हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी निर्माणाधीन भवन में सुरक्षा मानकों का पालन बेहद जरूरी होता है। यदि शटरिंग और संरचना की नियमित जांच नहीं की जाती, तो ऐसे हादसों की संभावना बढ़ जाती है। इस घटना के बाद निर्माण कार्य की गुणवत्ता और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस तरह के कार्यों में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए। फिलहाल पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर मौजूद है और पूरे मामले की जांच की जा रही है। अस्पताल में घायलों का इलाज जारी है और परिजन भी मौके पर पहुंचने लगे हैं।