पीठ पर उठाकर सडक़ तक पहुंचाया बीमार बुजुर्ग

Update: 2026-08-02 12:00 GMT
कुल्लू। जिला मुख्यालय कुल्लू से सटी लगघाटी की ग्राम पंचायत तिउन आज भी सडक़ जैसी बुनियादी सुविधा से वंचित है। आजादी के 79 वर्ष बीत जाने के बाद भी यहां के लोगों की जिंदगी पगडंडियों के सहारे चल रही है। गांव तक सडक़ नहीं पहुंचने का खामियाजा सबसे ज्यादा बीमार, बुजुर्ग, महिलाओं और स्कूली बच्चों को भुगतना पड़ रहा है। शुक्रवार को एक बार फिर सडक़ सुविधा के अभाव की दर्दनाक तस्वीर सामने आई। गांव के 63 वर्षीय बुजुर्ग की तबीयत बिगडऩे पर ग्रामीणों ने उन्हें पीठ पर उठाकर करीब अढ़ाई से तीन किलोमीटर लंबी पगडंडी पार कर सडक़ तक पहुंचाया। इसके बाद ही उन्हें अस्पताल ले जाया जा सका। ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय पर सडक़ होती तो मरीज को इस तरह जान जोखिम में डालकर नहीं लाना पड़ता। करीब 300 की आबादी वाले तिउन गांव के लोगों के लिए हर दिन संघर्ष से भरा है।
स्कूल और कॉलेज जाने वाले विद्यार्थियों को रोज कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है। बारिश और बर्फबारी के दौरान यह सफर और भी मुश्किल तथा जोखिम भरा हो जाता है। गर्भवती महिलाओं बुजुर्गों और गंभीर मरीजों के लिए तो यह रास्ता किसी परीक्षा से कम नहीं है। सिर्फ मरीज ही नहीं, बल्कि गांव तक राशन, गैस सिलेंडर, निर्माण सामग्री और रोजमर्रा का अन्य सामान भी लोगों को अपनी पीठ पर ढोकर पहुंचाना पड़ता है। सडक़ न होने के कारण हर छोटी-बड़ी जरूरत ग्रामीणों के लिए भारी मेहनत और अतिरिक्त खर्च का कारण बन जाती है। आधुनिक दौर में भी तिउन के लोग दशकों पुरानी परिस्थितियों में जीवन जीने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि हर चुनाव में गांव को सडक़ से जोडऩे के बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं।
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