कांग्रेस के राज्य केरल में स्टूडेंट और टीचर घास खाकर कर रहे अनोखा प्रदर्शन
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Kerala. केरल। केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम में शनिवार को लोअर प्राइमरी स्कूल टीचर के रैंक होल्डर्स ने सरकार के खिलाफ अनोखे तरीके से प्रदर्शन किया। एक तरफ कांग्रेस के राज्य केरल मेंलोअर प्राइमरी स्कूल टीचर के रैंक होल्डर्स घास खा रहे है। वही दूसरी तरफ कांग्रेस नेता राहुल गांधी प्रयागराज में अधेड़ युवाओं को संबोधन कर रहे है। सचिवालय के बाहर प्रदर्शनकारियों ने प्रतीकात्मक रूप से घास खाकर अपना विरोध जताया। इन अभ्यर्थियों का कहना है कि केरल लोक सेवा आयोग (PSC) की रैंक लिस्ट में जगह बनाने के बावजूद उन्हें अब तक अपॉइंटमेंट ऑर्डर जारी नहीं किया गया है। इनका आंदोलन 34 दिन से जारी है। आरोप है कि सरकार लगातार उनकी मांगों को नजरअंदाज कर रही है और नियुक्ति को लेकर कोई जानकारी नहीं दी जा रही है। केरल में सरकारी स्कूलों में नियुक्ति आदेश जारी करने की मांग को लेकर लोअर प्राइमरी स्कूल टीचर (LPST) रैंक होल्डर्स का विरोध प्रदर्शन लगातार जारी है।
सचिवालय के बाहर चल रहे इस आंदोलन ने शनिवार को उस समय ध्यान खींचा, जब प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों ने सांकेतिक रूप से घास खाकर सरकार के प्रति अपना विरोध जताया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि वे नियुक्ति की पात्रता और रैंक सूची में शामिल होने के बावजूद लंबे समय से नियुक्ति आदेश का इंतजार कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि नियुक्ति की मांग को लेकर LPST रैंक होल्डर्स का आंदोलन अब 34वें दिन में पहुंच गया है। प्रदर्शनकारी राज्य सरकार से जल्द नियुक्ति आदेश जारी करने की मांग कर रहे हैं। शनिवार को प्रदर्शन के दौरान कुछ अभ्यर्थियों ने घास खाकर अपना विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह कदम सरकार का ध्यान उनकी स्थिति और लंबे समय से चल रहे आंदोलन की ओर आकर्षित करने के लिए प्रतीकात्मक रूप से उठाया गया। सचिवालय के बाहर जारी प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में रैंक होल्डर्स अपनी मांगों को लेकर जुटे हुए हैं। प्रदर्शनकारियों के हाथों में नियुक्ति आदेश जारी करने की मांग से जुड़े पोस्टर और बैनर भी दिखाई दिए। उनका कहना है कि सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया में देरी के कारण बड़ी संख्या में योग्य अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित हो रहा है।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि वे नियुक्ति के लिए आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर चुके हैं और रैंक सूची में स्थान हासिल करने के बाद अब सरकार की ओर से नियुक्ति आदेश का इंतजार कर रहे हैं। उनका कहना है कि लंबे समय तक नियुक्ति नहीं होने से आर्थिक और मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इसी वजह से उन्होंने सरकार के खिलाफ आंदोलन को लगातार जारी रखने का फैसला किया है। शनिवार को घास खाने का प्रदर्शन इसी विरोध का हिस्सा बताया जा रहा है। प्रदर्शनकारियों ने इसके जरिए यह संदेश देने की कोशिश की कि यदि सरकार उनकी मांगों पर ध्यान नहीं देती है तो उनकी स्थिति बेहद कठिन होती जा रही है। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो और तस्वीरों के बाद यह प्रदर्शन चर्चा में आ गया है। आंदोलनकारी शिक्षकों का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी राजनीतिक दल का समर्थन या विरोध करना नहीं, बल्कि अपनी नियुक्ति का अधिकार मांगना है। वे चाहते हैं कि सरकार उनकी मांग पर गंभीरता से विचार करे और जल्द से जल्द नियुक्ति आदेश जारी करे। प्रदर्शनकारियों ने यह भी कहा कि जब तक उनकी मांग पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।