RANCHI रांची। झारखंड में JPSC और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर चल रहा छात्र आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। आंदोलनरत छात्रों के बीच बॉलीवुड अभिनेत्री और अधिवक्ता कुनिका सदानंद पहुंचीं और उनकी मांगों का समर्थन किया। छात्रों से मुलाकात के दौरान उन्होंने कहा कि शिक्षा और रोजगार से जुड़े सवालों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए और सरकार को अभ्यर्थियों के साथ बातचीत कर समाधान निकालने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। कुनिका सदानंद ने आंदोलनरत अभ्यर्थियों से बातचीत कर उनकी समस्याओं और मांगों की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि धीरे-धीरे झारखंड में छात्रों का यह आंदोलन काफी बड़ा रूप ले चुका है। अब छात्र बिना न्याय और अपनी मांगों पर ठोस समाधान के वापस लौटने के लिए तैयार नहीं हैं। ऐसी स्थिति में सरकार और छात्रों के बीच सार्थक संवाद बेहद जरूरी है।
उन्होंने कहा कि नौकरी और शिक्षा व्यवस्था युवाओं के भविष्य से सीधे जुड़े विषय हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले अभ्यर्थी वर्षों तक मेहनत करते हैं और उनके भविष्य से जुड़े मामलों में किसी भी तरह की अनिश्चितता गंभीर चिंता का विषय बनती है। ऐसे में छात्रों की बात सुनकर उनकी समस्याओं का समयबद्ध तरीके से समाधान किया जाना चाहिए। कुनिका सदानंद ने कहा कि उन्हें लगता है कि झारखंड सरकार केंद्र सरकार की तुलना में अधिक संवेदनशील है और इसी संवेदनशीलता के साथ छात्र आंदोलन का समाधान भी निकाला जा सकता है। उन्होंने सरकार से छात्रों के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत करने और ऐसा रास्ता निकालने की अपील की, जिससे आंदोलन को समाप्त करने की दिशा में ठोस प्रगति हो सके। उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार छात्रों को 10 से 15 दिन का समय दे और इस अवधि में उनकी मांगों का गंभीरता से परीक्षण कर ठोस निर्णय सामने रखे। उनका कहना था कि आंदोलन को लंबे समय तक खींचने से न तो छात्रों का फायदा होगा और न ही सरकार का। इसलिए बातचीत के माध्यम से ऐसा समाधान निकालना चाहिए, जिस पर दोनों पक्ष सहमत हो सकें।
छात्रों के बीच बॉलीवुड अभिनेत्री और अधिवक्ता के पहुंचने से आंदोलन को नया समर्थन मिला है। कुनिका सदानंद ने स्पष्ट किया कि युवाओं की शिक्षा, नौकरी और भविष्य से जुड़े मुद्दों की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए। सरकार को छात्रों के प्रति संवेदनशील रवैया अपनाते हुए उनकी समस्याओं का समाधान करना चाहिए। इधर, आंदोलनरत छात्र अपनी मांगों को लेकर डटे हुए हैं। उनका कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर न्यायसंगत और ठोस फैसला नहीं होता, आंदोलन जारी रहेगा। बढ़ते छात्र आंदोलन के बीच अब सरकार की अगली पहल और छात्रों के साथ संभावित बातचीत पर नजरें टिकी हुई हैं।
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