बेंगलुरु। कर्नाटक में आय से अधिक संपत्ति से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) को बड़ी कानूनी सफलता मिली है। विशेष अदालत ने पूर्व आबकारी विभाग अधिकारी एम. रामचंद्र और उनकी बेटी आर. यूरेखा को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत दोषी करार दिया है। अदालत ने पिता और बेटी को क्रमशः पांच और तीन साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है।
ईडी के बेंगलुरु जोनल कार्यालय (BGZO) के अनुसार, यह मामला कर्नाटक लोकायुक्त द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू हुआ था। लोकायुक्त की जांच में पूर्व आबकारी अधिकारी के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का मामला सामने आया था। इसके बाद प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लॉन्ड्रिंग के पहलुओं की जांच शुरू की। जांच और अदालती कार्यवाही के बाद विशेष अदालत ने एम. रामचंद्र को पांच साल और उनकी बेटी आर. यूरेखा को तीन साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही दोनों पर कुल आठ लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है।
अदालत ने इस मामले से जुड़ी पांच अचल संपत्तियों को भी जब्त किए जाने योग्य घोषित किया है। इन संपत्तियों के संबंध में अदालत ने धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत आदेश जारी किया। इस मामले में अदालत ने बचाव पक्ष के एक गवाह के खिलाफ भी महत्वपूर्ण निर्देश दिया है। अदालत ने झूठी गवाही देने के मामले में संबंधित गवाह के विरुद्ध कानूनी कार्यवाही शुरू करने को कहा है।
आय से अधिक संपत्ति के मामलों में लोकायुक्त द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर ईडी धन शोधन से जुड़े वित्तीय लेनदेन की जांच कर सकती है। इस मामले में अदालत के फैसले के बाद दोनों दोषियों को कारावास और आर्थिक दंड की सजा सुनाई गई है। साथ ही पांच अचल संपत्तियों को जब्ती के दायरे में लाया गया है।
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