सावन में रहेगा मानसून का कहर, देशभर में बारिश के औसत बढ़ने के संकेत
IMD ने जारी किया बड़ा पूर्वानुमान
नई दिल्ली। मानसून का सीजन भारत में जुलाई माह से शुरू होकर सितंबर माह के आखरी तक रहता है। अमूमन मानसून की अच्छी शुरुआत होने पर इसी तरीके का मानसून पूरे भारत में दिखता है। सावन के महीने में महादेव की कृपा से पूरे माह भारत में रह-रहकर बारिश और मानसून का कहर औसत से ज्यादा दिखने वाला है। देशभर में मानसून का दौर जारी है और अधिकांश राज्यों में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश देखने को मिल रही है। इसी बीच भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अगस्त और सितंबर 2026 के लिए मानसून का नया पूर्वानुमान जारी किया है। मौसम विभाग के मुताबिक, मानसून सक्रिय बना रहेगा, लेकिन पूरे देश में कुल वर्षा सामान्य से थोड़ी ज्यादा रहने की संभावना है। साथ ही कई राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश, गरज-चमक और बिजली गिरने की चेतावनी भी जारी की गई है।
भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून सामान्य रूप से जून से सितंबर तक सक्रिय रहता है और कृषि, जल संसाधन तथा पेयजल व्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इस वर्ष मानसून की शुरुआत कई क्षेत्रों में अच्छी रही है, जिससे खरीफ फसलों की बुवाई को फायदा मिला। हालांकि मौसम विभाग का ताजा अनुमान बताता है कि अगस्त और सितंबर के दौरान देशभर में होने वाली कुल वर्षा लॉन्ग पीरियड एवरेज (LPA) के 94 प्रतिशत से कम रह सकती है। इसका अर्थ यह नहीं है कि पूरे देश में सूखे जैसी स्थिति बनेगी, बल्कि कुछ क्षेत्रों में सामान्य से कम और कुछ क्षेत्रों में सामान्य या उससे अधिक वर्षा देखने को मिल सकती है। आईएमडी के अनुसार अगस्त महीने में देश के अधिकांश हिस्सों में अधिकतम तापमान सामान्य से अधिक रहने की संभावना है। हालांकि उत्तर-पश्चिम भारत के कुछ क्षेत्रों, मध्य भारत के कुछ हिस्सों और दक्षिण भारत के चुनिंदा इलाकों में अधिकतम तापमान सामान्य या सामान्य से कम रह सकता है।
वहीं न्यूनतम तापमान की बात करें तो अधिकांश राज्यों में रात का तापमान सामान्य से अधिक रहने का अनुमान है, जिससे उमस और गर्मी का असर बना रह सकता है। मौसम विभाग ने कई राज्यों के लिए भारी बारिश का अलर्ट भी जारी किया है। जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के पर्वतीय इलाकों में अगले कुछ दिनों तक तेज बारिश की संभावना जताई गई है। इन क्षेत्रों में भूस्खलन, सड़क अवरोध और अचानक जलभराव जैसी स्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं। इसके अलावा हरियाणा, पंजाब, चंडीगढ़ और दिल्ली में भी भारी बारिश का दौर देखने को मिल सकता है, जिससे शहरी क्षेत्रों में जलभराव और यातायात प्रभावित होने की आशंका है।
पूर्वी राजस्थान के कुछ इलाकों में बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। मौसम विभाग का कहना है कि कम समय में अधिक बारिश होने से निचले इलाकों में पानी भर सकता है और स्थानीय प्रशासन को सतर्क रहने की आवश्यकता है। मध्य भारत की बात करें तो पश्चिमी और पूर्वी मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और विदर्भ क्षेत्र में कई स्थानों पर बारिश के साथ गरज-चमक और बिजली गिरने की संभावना जताई गई है। किसानों, खुले क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों और यात्रियों को खराब मौसम के दौरान विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। बिजली चमकने के दौरान पेड़ों के नीचे खड़े होने या खुले मैदान में रहने से बचने की अपील की गई है।