technological प्रौद्योगिकीय : देशभर में अब पेट्रोल पंपों पर E20 पेट्रोल की बिक्री शुरू हो चुकी है। E20 पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल का मिश्रण होता है। सरकार ने एथेनॉल ब्लेंडेड फ्यूल को बढ़ावा देने के तहत अप्रैल 2025 में तय समय से पहले पूरे देश में E20 पेट्रोल लागू कर दिया था। हालांकि, अब एक रिपोर्ट सामने आने के बाद पुराने वाहनों के मालिकों की चिंता बढ़ गई है।ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ज्यादा एथेनॉल मिश्रण वाले पेट्रोल का असर कुछ पुराने वाहनों के रबर पार्ट्स पर पड़ सकता है। रिपोर्ट में फ्यूल पाइप, गैसकेट, सील और ओ-रिंग्स जैसे हिस्सों के खराब होने की संभावना जताई गई है।
पुराने वाहनों के लिए क्यों बढ़ी चिंता?
एथेनॉल में कुछ ऐसे रासायनिक गुण होते हैं, जो लंबे समय तक संपर्क में रहने पर कुछ सामग्री को प्रभावित कर सकते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, पुराने वाहनों में इस्तेमाल किए गए कुछ रबर और प्लास्टिक पार्ट्स E20 ईंधन के साथ पूरी तरह अनुकूल नहीं हो सकते हैं।वाहन विशेषज्ञों का कहना है कि जिन गाड़ियों को E20 मानकों के अनुसार डिजाइन नहीं किया गया है, उनमें लंबे समय के बाद फ्यूल सिस्टम से जुड़ी समस्याएं सामने आ सकती हैं।हालांकि, इसका असर हर वाहन पर एक जैसा होगा, ऐसा जरूरी नहीं है।
ARAI टेस्ट में सामने आई अलग-अलग स्थिति
ARAI की जांच में अलग-अलग इंजनों पर E20 ईंधन के प्रभाव का परीक्षण किया गया। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ इंजनों ने बेहतर प्रदर्शन किया, जबकि कुछ में लंबे समय तक टेस्टिंग के बाद समस्याएं देखी गईं।फोर-व्हीलर इंजन की टेस्टिंग में एक BS-IV इंजन का प्रदर्शन सामान्य रहा। वहीं, एक BS-VI टर्बोचार्ज्ड इंजन ने करीब 265 घंटे की टेस्टिंग के बाद परेशानी दिखानी शुरू की। इसके अलावा, एक अन्य कार निर्माता कंपनी के इंजन में 809 घंटे की टेस्टिंग के बाद एग्जॉस्ट वाल्व में थर्मोमैकेनिकल फेलियर देखा गया।थर्मोमैकेनिकल फेलियर का मतलब है कि अधिक गर्मी और दबाव के कारण इंजन के वाल्व पर असर पड़ना, जिससे वह मुड़ या खराब हो सकता है।
विशेषज्ञों ने बताई सावधानी की जरूरत
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि इंजन में आई समस्याओं के लिए केवल E20 ईंधन को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। इसके पीछे इंजन की डिजाइन, रखरखाव, ड्राइविंग परिस्थितियां और अन्य तकनीकी कारण भी हो सकते हैं।विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि वाहन मालिक अपनी गाड़ी की सर्विस समय पर कराएं और निर्माता कंपनी के निर्देशों का पालन करें। खासतौर पर पुराने वाहनों में फ्यूल सिस्टम और रबर पार्ट्स की समय-समय पर जांच कराना फायदेमंद हो सकता है।
E20 पेट्रोल का उद्देश्य
सरकार ने एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को बढ़ावा देने का फैसला पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता कम करने और पर्यावरण प्रदूषण घटाने के उद्देश्य से लिया है। एथेनॉल एक जैव ईंधन है, जिसे गन्ने और अन्य कृषि उत्पादों से तैयार किया जाता है।E20 पेट्रोल को लेकर वाहन कंपनियों ने भी नए मॉडल्स में बदलाव किए हैं ताकि वे इस ईंधन के साथ बेहतर तरीके से काम कर सकें। हालांकि, पुराने वाहनों के लिए इसके प्रभाव को लेकर लगातार अध्ययन किए जा रहे हैं।फिलहाल वाहन मालिकों को घबराने के बजाय अपनी गाड़ी की स्थिति, मॉडल और निर्माता की सलाह के आधार पर जरूरी कदम उठाने की जरूरत है।