ताइवान में चुनाव से पहले साइबर हमले, विपक्षी उम्मीदवार को निशाना बनाने में चीन पर शक
ताइपे। ताइवान में आगामी स्थानीय चुनावों से पहले राजनीतिक माहौल गरमा गया है। चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने की आशंका के बीच एक प्रमुख विपक्षी उम्मीदवार के चुनाव प्रचार अभियान को साइबर हमलों के जरिए निशाना बनाए जाने का मामला सामने आया है। ताइवान की राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी को इन हमलों के पीछे चीन का हाथ होने का संदेह है। मामले की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा ब्यूरो (NSB) ने जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि इन साइबर हमलों के जरिए चुनावी अभियान से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां हासिल करने और डिजिटल व्यवस्था को बाधित करने की कोशिश की गई हो सकती है।यह मामला डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी (DPP) के ताइपे मेयर पद के उम्मीदवार प्यूमा शेन (Puma Shen) के चुनाव प्रचार अभियान से जुड़ा है। ताइवान में 28 नवंबर को स्थानीय निकायों के चुनाव होने हैं। इनमें शहरों के मेयर और काउंटी प्रमुखों का चुनाव किया जाएगा। ऐसे समय में एक प्रमुख उम्मीदवार के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर हुए हमले ने चुनावी सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं।
ताइपे टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, प्यूमा शेन के चुनाव कार्यालय ने बुधवार को बताया कि उसके महत्वपूर्ण डिजिटल बुनियादी ढांचे पर सुनियोजित और लगातार साइबर हमले किए गए। इनमें कर्मचारियों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली आंतरिक प्रणाली और सार्वजनिक वेबसाइटों को निशाना बनाया गया। कार्यालय के अनुसार, हमलों की शुरुआत पिछले सप्ताह शुक्रवार से हुई थी। हैकरों ने वेबसाइट के फाइल अपलोड करने वाले फीचर में मौजूद तकनीकी खामी का फायदा उठाकर सर्वर तक प्रशासनिक पहुंच हासिल कर ली थी।बताया गया कि हमलावरों ने सर्वर में बैकडोर और फर्जी एडमिन अकाउंट बनाने की कोशिश की। बैकडोर ऐसी तकनीकी व्यवस्था होती है, जिसके माध्यम से हैकर किसी सिस्टम में अनधिकृत प्रवेश बनाए रख सकते हैं। इससे भविष्य में दोबारा हमला करना या सिस्टम की गतिविधियों पर नजर रखना आसान हो सकता है।
हालांकि, उम्मीदवार के चुनाव कार्यालय ने दावा किया कि हैकर अपने मुख्य उद्देश्य में सफल नहीं हो सके। जिस सर्वर पर सेंधमारी हुई थी, उस पर चुनाव अभियान की आंतरिक प्रणाली और उसके लॉगिन से संबंधित संवेदनशील जानकारियां मौजूद नहीं थीं। इस वजह से हमलावर कर्मचारियों के आंतरिक सिस्टम तक पहुंच हासिल नहीं कर पाए।साइबर हमले का पता बुधवार सुबह चला, जिसके बाद चुनाव कार्यालय ने तत्काल सुरक्षा उपाय शुरू किए। प्रभावित सर्वर से संदिग्ध बैकडोर और फर्जी प्रशासनिक अकाउंट हटाए गए। इसके अलावा सभी लॉगिन क्रेडेंशियल बदलने के साथ डिजिटल सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया गया। कार्यालय ने दावा किया कि प्रभावित वेबसाइटों और वेब पेजों को बहाल कर दिया गया है।मामला यहीं तक सीमित नहीं रहा। चुनाव कार्यालय ने बताया कि एक नई वेबसाइट शुरू किए जाने के बाद भी उस पर साइबर हमला किया गया। यह वेबसाइट उम्मीदवार के 'ओशन वेव' (Ocean Wave) अभियान से जुड़े कार्यक्रमों में समर्थकों की उपस्थिति दर्ज करने के लिए बनाई गई थी। वेबसाइट शुरू होने के महज एक घंटे के भीतर विदेशों में स्थित IP एड्रेस से ऑथेंटिकेशन कोड हासिल करने के लिए 70 हजार से अधिक अनुरोध भेजे गए।
इतनी बड़ी संख्या में अनुरोध आने के कारण वेबसाइट की सामान्य कार्यप्रणाली प्रभावित होने का खतरा पैदा हो गया था। इसके बाद वेबसाइट के प्रशासनिक अधिकारियों ने सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव किया। अब कार्यक्रम में उपस्थिति दर्ज करने के लिए वैध अकाउंट से लॉगिन करना अनिवार्य कर दिया गया। चुनाव कार्यालय का कहना है कि इस बदलाव के बाद हमलों को रोकने में सफलता मिली।इस पूरे घटनाक्रम पर ताइवान की राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी ने गंभीरता दिखाई है। राष्ट्रीय सुरक्षा ब्यूरो के उप महानिदेशक चेन सुंग-ची ने गुरुवार को संसद की विदेश मामलों और राष्ट्रीय रक्षा समिति की बैठक में बताया कि एजेंसी इस मामले की जांच कर रही है। उन्होंने कहा कि खुफिया विभाग की टीमें चुनाव में चीन की संभावित दखलअंदाजी से जुड़े पहलुओं की संयुक्त रूप से जांच कर रही हैं।अधिकारियों के मुताबिक, जांच में यदि किसी व्यक्ति या समूह की संलिप्तता के पर्याप्त सबूत मिलते हैं तो उनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि, अभी तक हमलों के पीछे किसी विशेष संगठन या व्यक्ति की आधिकारिक पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है। चीन की भूमिका को लेकर भी जांच पूरी होने से पहले किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।
दरअसल, ताइवान में चुनाव से पहले साइबर हमलों और ऑनलाइन दुष्प्रचार का मुद्दा लगातार गंभीर होता जा रहा है। ताइवान के राष्ट्रीय सुरक्षा ब्यूरो की 21 अक्टूबर को सामने आई रिपोर्ट के अनुसार, 2026 के शुरुआती नौ महीनों में चीन से उत्पन्न मानी गई भ्रामक और विवादित ऑनलाइन सामग्री की संख्या 25 लाख से अधिक रही। यह पिछले साल की समान अवधि में दर्ज लगभग 16.9 लाख सामग्री के मुकाबले करीब 48 प्रतिशत अधिक है।रिपोर्ट में कहा गया कि इस तरह की सामग्री के जरिए ऊर्जा सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा, रक्षा नीति और चुनावी उम्मीदवारों से जुड़े मुद्दों को प्रभावित करने की कोशिश की गई। फेसबुक, थ्रेड्स, यूट्यूब और ऑनलाइन मंचों पर फर्जी अकाउंट, एआई से तैयार वीडियो और समन्वित टिप्पणियों के इस्तेमाल की बात भी सामने आई है। इसके अतिरिक्त, ताइवान के सरकारी नेटवर्क पर प्रतिदिन औसतन 25.8 लाख साइबर हमलों के प्रयास दर्ज किए गए।
ताइवान लंबे समय से चीन पर साइबर हमलों, दुष्प्रचार और राजनीतिक दबाव के जरिए लोकतांत्रिक व्यवस्था को प्रभावित करने का आरोप लगाता रहा है। दूसरी ओर, बीजिंग ताइवान को अपना हिस्सा मानता है और वहां की राजनीतिक स्थिति को लेकर उसका रुख लगातार सख्त रहा है। चीन पहले भी चुनावों में हस्तक्षेप और दुष्प्रचार फैलाने के आरोपों से इनकार करता रहा है।फिलहाल प्यूमा शेन के चुनाव प्रचार अभियान पर हुए हमले की जांच जारी है। ताइवान के सामने सबसे बड़ी चुनौती 28 नवंबर के चुनावों से पहले राजनीतिक दलों, उम्मीदवारों और सरकारी डिजिटल नेटवर्क की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। यह मामला केवल एक उम्मीदवार की वेबसाइट पर हुए हमले तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे चुनावी पारदर्शिता, मतदाताओं की स्वतंत्र पसंद और डिजिटल सुरक्षा से जुड़े व्यापक सवाल भी खड़े हो गए हैं।