नई दिल्ली : 28 अक्टूबर 2026। भारत और ऑस्ट्रिया के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत बनाने की दिशा में बुधवार को नई दिल्ली में महत्वपूर्ण कूटनीतिक बातचीत हुई। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने ऑस्ट्रिया की विदेश मंत्री बीटे मेनिल-रीसिंगर के साथ हैदराबाद हाउस में द्विपक्षीय वार्ता की। इस मुलाकात का प्रमुख उद्देश्य दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग, व्यापार, निवेश, तकनीक, सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर साझेदारी बढ़ाना रहा। जयशंकर ने इस अवसर पर अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए देशों के बीच मिलकर काम करने की आवश्यकता पर जोर दिया। दोनों देशों के सामने संयुक्त राष्ट्र सहित बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग बढ़ाने के अवसर भी हैं।
अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा पर विशेष जोर
भारत और ऑस्ट्रिया के विदेश मंत्रियों की बातचीत ऐसे समय में हुई है, जब दुनिया कई क्षेत्रीय संघर्षों, सुरक्षा चुनौतियों और आर्थिक अनिश्चितताओं का सामना कर रही है।दोनों देशों के बीच संवाद का एक प्रमुख विषय अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा में सहयोग की संभावनाएं रहा। भारत लंबे समय से कूटनीतिक बातचीत, अंतरराष्ट्रीय कानून और शांतिपूर्ण समाधान का समर्थन करता रहा है।ऑस्ट्रिया भी बहुपक्षीय संस्थाओं और अंतरराष्ट्रीय नियमों पर आधारित वैश्विक व्यवस्था को महत्व देता है।इस संदर्भ में दोनों देशों के बीच सहयोग संयुक्त राष्ट्र, शांति स्थापना अभियानों और वैश्विक सुरक्षा संबंधी चर्चाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।हालांकि, बैठक के दौरान किसी नए संयुक्त शांति प्रस्ताव या विशेष समझौते पर हस्ताक्षर होने की पुष्टि उपलब्ध रिपोर्टों में नहीं हुई है।
ऑस्ट्रिया की विदेश मंत्री सात दिवसीय भारत दौरे पर
ऑस्ट्रिया की यूरोपीय और अंतरराष्ट्रीय मामलों की संघीय मंत्री बीटे मेनिल-रीसिंगर 27 अक्टूबर से 2 नवंबर 2026 तक भारत की आधिकारिक यात्रा पर हैं।उनकी इस यात्रा का उद्देश्य दोनों देशों के बीच मौजूदा रणनीतिक, आर्थिक और राजनीतिक संबंधों को नई गति देना है।नई दिल्ली में विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ बातचीत उनकी यात्रा के प्रमुख कार्यक्रमों में शामिल थी।इसके बाद 29 अक्टूबर से 2 नवंबर तक वह जयपुर में विभिन्न कार्यक्रमों में भाग लेंगी।इस यात्रा के दौरान ऑस्ट्रियाई कंपनियों के लिए भारतीय बाजार में नए अवसरों और दोनों देशों के उद्योग जगत के बीच सहयोग बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सहयोग की संभावनाएं
भारत और ऑस्ट्रिया के बीच संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को लेकर भी महत्वपूर्ण साझा हित हैं।ऑस्ट्रिया को वर्ष 2027-28 के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अस्थायी सदस्यता मिली है। वहीं भारत वर्ष 2028-29 के कार्यकाल के लिए अस्थायी सदस्य बनने का उम्मीदवार है।दोनों देश संयुक्त राष्ट्र की कार्यप्रणाली में सुधार के समर्थक हैं।भारत लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में व्यापक सुधार और विकासशील देशों के अधिक प्रतिनिधित्व की मांग करता रहा है।ऐसे में भारत और ऑस्ट्रिया के बीच अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा, शांति स्थापना, आतंकवाद विरोधी प्रयासों और बहुपक्षीय संस्थाओं को प्रभावी बनाने जैसे मुद्दों पर सहयोग की संभावनाएं हैं।ऑस्ट्रिया की विदेश मंत्री की इस यात्रा में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से जुड़े आगामी दायित्वों की तैयारियां भी महत्वपूर्ण विषय हैं।
व्यापार और निवेश बढ़ाने पर बातचीत
भारत और ऑस्ट्रिया के आर्थिक संबंधों में पिछले कुछ वर्षों के दौरान विस्तार हुआ है।दोनों देश औद्योगिक तकनीक, इंजीनियरिंग, परिवहन, स्वच्छ ऊर्जा और विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के इच्छुक हैं।ऑस्ट्रिया की कंपनियों के पास रेलवे तकनीक, सुरंग निर्माण, मशीनरी और पर्यावरण अनुकूल औद्योगिक समाधानों का अनुभव है।वहीं भारत एक बड़े उपभोक्ता बाजार और तेजी से विकसित हो रहे औद्योगिक क्षेत्र के रूप में निवेश के अवसर प्रदान करता है।उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में भारत और ऑस्ट्रिया के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगभग 3.47 अरब डॉलर तक पहुंच गया था।दोनों देशों ने व्यापार और निवेश से जुड़ी व्यावहारिक बाधाओं को दूर करने के लिए 2026 में एक फास्ट-ट्रैक व्यवस्था भी स्थापित की थी।
भारत-यूरोपीय संघ व्यापार समझौता भी महत्वपूर्ण
ऑस्ट्रिया यूरोपीय संघ का सदस्य देश है। इसलिए भारत और यूरोपीय संघ के बीच व्यापारिक संबंधों का विस्तार ऑस्ट्रिया के लिए भी महत्वपूर्ण है।जनवरी 2026 में भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौते पर वार्ताएं पूरी होने के बाद अब इसे लागू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।इस समझौते का उद्देश्य व्यापारिक बाधाओं को कम करना, निवेश को प्रोत्साहन देना और दोनों पक्षों की कंपनियों को बाजार तक बेहतर पहुंच उपलब्ध कराना है।ऑस्ट्रिया की विदेश मंत्री की भारत यात्रा में इस समझौते से मिलने वाले संभावित आर्थिक अवसरों पर भी ध्यान केंद्रित किया गया है।विशेष रूप से ऑस्ट्रियाई उद्योगों को भारतीय बाजार में अधिक अवसर देने और व्यावसायिक सहयोग बढ़ाने की संभावनाएं महत्वपूर्ण हैं।
आतंकवाद के खिलाफ सहयोग बढ़ाने की तैयारी
भारत और ऑस्ट्रिया के बीच सुरक्षा सहयोग भी लगातार महत्वपूर्ण होता जा रहा है।इससे पहले 6 अक्टूबर 2026 को विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने ऑस्ट्रिया के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार पीटर वोर्होफर के साथ बैठक की थी।इस बैठक में दोनों देशों के बीच सुरक्षा, रणनीतिक मामलों और आतंकवाद विरोधी सहयोग को मजबूत बनाने पर चर्चा हुई थी।दोनों पक्षों ने क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया था।भारत आतंकवाद के सभी रूपों के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने पर जोर देता रहा है।ऐसे में ऑस्ट्रिया के साथ सुरक्षा संबंधी संवाद दोनों देशों के व्यापक कूटनीतिक संबंधों का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकता है।
प्रधानमंत्री मोदी की 2024 की यात्रा से रिश्तों को मिली गति
भारत और ऑस्ट्रिया के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना 10 नवंबर 1949 को हुई थी।वर्ष 2024 में दोनों देशों ने अपने राजनयिक संबंधों की 75वीं वर्षगांठ मनाई थी।इसी अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जुलाई 2024 में ऑस्ट्रिया की ऐतिहासिक यात्रा की थी।उस यात्रा के दौरान भारत और ऑस्ट्रिया ने द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने के लिए उन्नत साझेदारी को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई थी।इसके बाद अप्रैल 2026 में ऑस्ट्रिया के चांसलर क्रिश्चियन स्टॉकर की भारत यात्रा ने भी संबंधों को नई दिशा दी।दोनों देशों के बीच रक्षा औद्योगिक सहयोग, आतंकवाद विरोधी व्यवस्था, कौशल विकास और अन्य क्षेत्रों से जुड़े कई समझौतों तथा आशय पत्रों पर काम आगे बढ़ा है।
तकनीक, शिक्षा और नवाचार में भी बढ़ेगा सहयोग
भारत और ऑस्ट्रिया की साझेदारी केवल व्यापार और सुरक्षा तक सीमित नहीं है।दोनों देश कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम तकनीक, नवीकरणीय ऊर्जा, कौशल विकास और उच्च शिक्षा जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग की संभावनाएं तलाश रहे हैं।भारत-ऑस्ट्रिया स्टार्टअप ब्रिज जैसी पहल तकनीकी नवाचार और नए उद्यमों के बीच संपर्क बढ़ाने में सहायक है।इसके अलावा दोनों देशों के बीच प्रवासन और आवागमन से जुड़ी साझेदारी भी है, जिसका उद्देश्य वैध रोजगार, शैक्षणिक आदान-प्रदान और कौशल आधारित अवसरों को बेहतर बनाना है।इन क्षेत्रों में सहयोग से भारतीय विद्यार्थियों, पेशेवरों और उद्योगों के लिए नए अवसर पैदा हो सकते हैं।
वैश्विक चुनौतियों के बीच भारत-ऑस्ट्रिया साझेदारी महत्वपूर्ण
जयशंकर और बीटे मेनिल-रीसिंगर की मुलाकात से यह स्पष्ट होता है कि भारत और ऑस्ट्रिया अपने संबंधों को पारंपरिक कूटनीति से आगे बढ़ाकर आर्थिक, तकनीकी और सुरक्षा सहयोग के नए क्षेत्रों तक ले जाना चाहते हैं।बदलती अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में दोनों देशों के लिए शांति, सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता जैसे मुद्दों पर सहयोग का महत्व बढ़ गया है।आगामी वर्षों में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से जुड़ी गतिविधियां और भारत-यूरोपीय संघ आर्थिक संबंध दोनों देशों के बीच समन्वय के महत्वपूर्ण अवसर उपलब्ध करा सकते हैं।इस बातचीत के बाद अब निगाहें दोनों देशों द्वारा साझा प्राथमिकताओं को ठोस परियोजनाओं और सहयोग कार्यक्रमों में बदलने पर रहेंगी।