नई दिल्ली : भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने वैश्विक मंचों पर भारत के बढ़ते कद और उसकी विदेश नीति के मूल दर्शन को रेखांकित करते हुए एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत के लिए "वसुधैव कुटुंबकम" (पूरा विश्व एक परिवार है) केवल कोई सुंदर दार्शनिक विचार या भाषणों में दिया जाने वाला उपदेश नहीं है, बल्कि यह एक ऐसी भावना है जिसका भारत अपनी दैनिक कूटनीति और वैश्विक कार्यों में अभ्यास करता है।जयशंकर ने कहा कि दुनिया ने हाल के वर्षों में यह स्पष्ट रूप से देखा है कि जब भी किसी देश या सभ्यता पर संकट आया है, भारत ने बिना किसी भेदभाव के एक सच्चे 'विश्वबंधु' और परिवार के सदस्य की भांति सबसे पहले सहायता का हाथ बढ़ाया है।
1. सिद्धांत नहीं, आचरण है 'वसुधैव कुटुंबकम'
विदेश मंत्री ने भारतीय विदेश नीति की दिशा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कई बार अंतरराष्ट्रीय राजनीति में बड़े-बड़े सिद्धांत केवल कागजों और भाषणों तक सीमित रह जाते हैं। हालांकि, भारत का दृष्टिकोण इससे पूरी तरह भिन्न है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय संबंधों में कथनी और करनी के अंतर को समाप्त किया है। जब संकट की स्थिति उत्पन्न होती है, तो भारत केवल संवेदना व्यक्त करने के बजाय धरातल पर राहत सामग्री, दवाएं और बचाव दल भेजकर अपनी प्रतिबद्धता सिद्ध करता है।
2. 'वैक्सीन मैत्री' और मानवीय सहायता का विशाल उदाहरण
अपने वक्तव्य को प्रमाणित करते हुए डॉ. जयशंकर ने कोरोना महामारी (COVID-19) के दौर का उल्लेख किया। उन्होंने याद दिलाया कि जब दुनिया के शक्तिशाली और विकसित देश अपने संसाधनों को सीमित कर रहे थे, तब भारत ने 'वैक्सीन मैत्री' पहल के माध्यम से 100 से अधिक देशों को जीवनरक्षक टीकों और चिकित्सा सामग्रियों की आपूर्ति की। इसके अलावा, तुर्किये और सीरिया में आए विनाशकारी भूकंप के समय 'ऑपरेशन दोस्त' के जरिए तुरंत राहत सामग्री पहुंचाना हो या युद्धग्रस्त क्षेत्रों (यमन, यूक्रेन, सूडान) से विभिन्न देशों के नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकालना हो, भारत ने हर कदम पर अपनी वैश्विक जिम्मेदारी निभाई है।
3. 'ग्लोबल साउथ' का सशक्त नेतृत्व और G20 की सफलता
जयशंकर ने जोर देकर कहा कि भारत ने हमेशा से विकासशील और कम विकसित देशों (Global South) की आवाज को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रखरता से उठाया है। भारत की G20 अध्यक्षता के दौरान अफ्रीकी संघ (African Union) को स्थायी सदस्यता दिलाना इसका सबसे बड़ा ऐतिहासिक उदाहरण है। भारत खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा संकट, जलवायु परिवर्तन और ऋण संकट से जूझ रहे देशों के लिए निरंतर व्यावहारिक समाधान खोज रहा है। भारत का यह प्रयास दर्शाता है कि वह केवल अपनी नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की समावेशी प्रगति चाहता है।
4. तकनीकी नवाचारों और जनहितैषी मॉडल का साझाकरण
विदेश मंत्री के अनुसार, भारत अपने तकनीकी विकास का लाभ पूरे विश्व के साथ साझा कर रहा है। भारत का 'डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर' (DPI) जैसे UPI (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस), कोविन (CoWIN) और आधार मॉडल आज वैश्विक स्तर पर सराहे जा रहे हैं। भारत इन तकनीकों को अन्य देशों के साथ साझा कर रहा है ताकि वहां के आम नागरिकों का जीवन सुगम हो सके। यह इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि भारत अपने ज्ञान और तकनीक को एकाधिकार बनाने के बजाय लोक कल्याण का साधन मानता है।
5. एक भरोसेमंद और जिम्मेदार वैश्विक साझेदार के रूप में भारत
अंत में, डॉ. एस. जयशंकर ने कहा कि आज की अनिश्चित वैश्विक परिस्थितियों में विश्व को ऐसे देशों की आवश्यकता है जो जिम्मेदार, भरोसेमंद और पारदर्शी हों। भारत बहुध्रुवीय विश्व (Multipolar World) की वकालत करता है, जहां सभी राष्ट्रों की संप्रभुता का सम्मान हो। भारत का लक्ष्य उपदेश देना नहीं, बल्कि अपनी नीतियों और कार्यों से दुनिया के सामने एक उदाहरण प्रस्तुत करना है। यही 'वसुधैव कुटुंबकम' की वास्तविक आत्मा है, जिसे भारत हर दिन जी रहा है।