कंगाल Pakistan में आटे की किल्लत: कुप्रबंधन ने बढ़ाई मुसीबत, भारी आयात की तैयारी

Update: 2026-07-11 12:40 GMT

Lahore , लाहौर : 'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान में गेहूं की सप्लाई को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं। अधिकारियों, इंडस्ट्री के प्रतिनिधियों और प्रांतीय अधिकारियों ने उत्पादन में भारी कमी की चेतावनी दी है, जिससे खाद्य सुरक्षा संकट को रोकने के लिए बड़े पैमाने पर आयात की मांग फिर से उठने लगी है।

'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' के अनुसार, इस्लामाबाद में नेशनल फूड सिक्योरिटी के लिए फेडरल मिनिस्टर राणा तनवीर हुसैन की अध्यक्षता में व्हीट बोर्ड की बैठक हुई। इस बैठक में देश में गेहूं के घटते भंडार और उत्पादन व मांग के बीच बढ़ते अंतर पर चर्चा की गई। आटा मिलों, अनाज व्यापारियों, किसान संगठनों और सीरियल एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने अनुमान लगाया कि पाकिस्तान को 3.5 मिलियन टन से अधिक गेहूं की कमी का सामना करना पड़ सकता है।

स्टेकहोल्डर्स का तर्क था कि सप्लाई को स्थिर करने के लिए कम से कम 2 मिलियन टन गेहूं का आयात करना ज़रूरी हो गया है। प्राइवेट सेक्टर के प्रतिनिधियों ने सरकार से यह भी आग्रह किया कि आयात नीति पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आयात परमिट कुछ ही कंपनियों तक सीमित रखने के बजाय सभी योग्य आटा मिल मालिकों और व्यापारियों को उपलब्ध कराए जाने चाहिए, क्योंकि खास कंपनियों को प्राथमिकता देने से बाजार में गड़बड़ी हो सकती है।

बैठक में चारों प्रांतों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। खैबर पख्तूनख्वा के मुख्य सचिव ने प्रतिभागियों को बताया कि प्रांत में अभी केवल 30,000 टन गेहूं का भंडार है और संघीय मदद मिलने के बाद पाकिस्तान एग्रीकल्चरल स्टोरेज एंड सर्विसेज कॉरपोरेशन (PASSCO) से 250,000 टन गेहूं हासिल किया जा चुका है। 'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने यह भी बताया कि पंजाब प्रांत की आटे की 70 प्रतिशत से अधिक ज़रूरतें पूरी करता रहता है।

सिंध के अधिकारियों ने गेहूं की घटती उपलब्धता के कारण बढ़ती कीमतों का ज़िक्र किया और कहा कि बाजार की स्थिति सुधारने के लिए अधिकारियों ने कथित जमाखोरी के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है। वहीं, पंजाब के अधिकारियों ने प्रांत के उत्पादन प्रदर्शन का बचाव करते हुए दावा किया कि उसने 21.9 मिलियन टन गेहूं उत्पादन का लक्ष्य हासिल कर लिया है। 'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने वित्तीय दबाव के बावजूद आटे और ब्रेड की कीमतें किफायती बनाए रखने के लिए प्रांतीय सरकार की प्रतिबद्धता को भी दोहराया।

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