सूडान: दक्षिण दारफुर प्रांत की राजधानी न्याला में एक भीड़भाड़ वाले बाजार पर हुए ड्रोन हमले में बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई है। मीडिया रिपोर्ट में मृतकों की संख्या 112 बताई गई है और इनमें बच्चों के शामिल होने की भी खबर है। हालांकि, अलग-अलग संगठनों की ओर से जारी हताहतों के आँकड़ों में अंतर है। मानवाधिकार संगठन इमरजेंसी लॉयर्स ने हमले के लिए सूडानी सेना को जिम्मेदार ठहराते हुए 100 से अधिक लोगों की मौत और 113 लोगों के घायल होने की जानकारी दी है।
यह हमला सोमवार, 26 अक्टूबर की शाम उस समय हुआ, जब बाजार में बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे। न्याला शहर अर्धसैनिक संगठन रैपिड सपोर्ट फोर्सेज यानी आरएसएफ के नियंत्रण में है। सूडानी सेना और आरएसएफ के बीच चल रहे संघर्ष के कारण यह इलाका लगातार हमलों और असुरक्षा का सामना कर रहा है। बाजार पर ताजा हमले ने युद्ध के बीच आम नागरिकों की सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ा दी है।
मेडिकल सहायता संगठन डॉक्टर्स विदाउट बॉर्डर्स यानी एमएसएफ के अनुसार, स्थानीय समयानुसार रात करीब आठ बजे न्याला के पश्चिमी हिस्से में स्थित व्यस्त बाजार पर ड्रोन हमला हुआ। संगठन ने बताया कि एक अन्य हमला नागरिक रिहायशी इलाके में भी हुआ। एमएसएफ समर्थित न्याला टीचिंग अस्पताल में 36 मृतकों के शव लाए गए। इनमें से 21 लोगों ने सामान्य नागरिक कपड़े पहन रखे थे। अस्पताल की आपातकालीन इकाई में 150 से अधिक घायल मरीज पहुँचे। ये आँकड़े अस्पताल तक पहुँचे लोगों के हैं।
एमएसएफ के कर्मचारियों के मुताबिक, अस्पताल आने वाले लोगों में छर्रे लगने और गंभीर रूप से झुलसने के मामले शामिल थे। घायलों को बाजार से तिपहिया वाहनों और गधागाड़ियों के जरिए अस्पताल पहुँचाया गया। इलाज पाने वालों में महिलाएँ और बच्चे भी शामिल थे। अचानक बड़ी संख्या में मरीज आने के बाद चिकित्सा कर्मचारियों को लगातार काम करना पड़ा। संगठन ने बाजारों, घरों और नागरिक सुविधाओं की सुरक्षा पर जोर देते हुए संघर्ष में शामिल सभी पक्षों से आम लोगों को बचाने की अपील की।
स्थानीय अधिकारियों ने भी भारी जनहानि की जानकारी दी है। आरएसएफ समर्थित तासीस प्रशासन के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. अला अल-दीन नुगुद ने रेडियो तमाजुज को बताया कि डुमाया इलाके के बाजार पर हमले में 102 नागरिक मारे गए और 113 घायल हुए। उनके अनुसार, घटना के बाद चिकित्सा दल मौके पर भेजा गया तथा अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों को घायलों के इलाज के लिए सतर्क किया गया। मृतकों और घायलों की संख्या को लेकर उपलब्ध रिपोर्टों में अंतर बना हुआ है। इमरजेंसी लॉयर्स ने घटना की स्वतंत्र जाँच की माँग की है। संगठन ने बाजार पर हमले को नागरिकों के लिए गंभीर खतरा बताया है। फिलहाल 112 मौतों के आँकड़े को सभी उपलब्ध स्रोत एक समान रूप से पुष्ट नहीं करते। इसी तरह मृतक बच्चों की सटीक संख्या भी स्पष्ट नहीं है। ऐसे में स्थानीय प्रशासन, मानवाधिकार संगठनों और अस्पतालों के आँकड़ों को उनके संबंधित स्रोतों के साथ देखना जरूरी है। हमले की जिम्मेदारी को लेकर सेना पर लगाए गए आरोपों का उल्लेख भी इसी आधार पर किया जा रहा है।
न्याला में हाल के दिनों में हवाई हमले तेज हुए हैं। सूडान ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, सेना ने शहर और आसपास आरएसएफ से जुड़े कई ठिकानों को निशाना बनाया है। इनमें कमान केंद्र, सैन्य परिसर और कमांडरों से जुड़े स्थान शामिल बताए गए हैं। सोमवार शाम हुए हमलों में बाजार भी प्रभावित हुआ। रिपोर्ट में स्थानीय सूत्रों के हवाले से कहा गया कि वहाँ नागरिकों के साथ आरएसएफ के सदस्य भी मौजूद थे। हालांकि, इस जानकारी से बाजार में मारे गए सभी लोगों की पहचान या उनकी भूमिका स्पष्ट नहीं होती।
इससे पहले 16 अक्टूबर को भी न्याला के अल-मवाशी बाजार पर ड्रोन हमला हुआ था। एमएसएफ ने उस घटना में कम से कम चार लोगों की मौत और कई लोगों के घायल होने की जानकारी दी थी। संगठन के अनुसार, लगातार हो रहे ऐसे हमले नागरिकों की जान लेने के साथ भोजन और जरूरी सामान तक उनकी पहुँच भी बाधित कर रहे हैं। जिन बाजारों पर लोग दैनिक जरूरतों के लिए निर्भर हैं, उन्हीं स्थानों पर हमले होने से संकट और गहरा रहा है। कुपोषण की बढ़ती चिंता के बीच यह स्थिति विशेष रूप से गंभीर है।
सूडान में अप्रैल 2023 से सेना और आरएसएफ के बीच युद्ध चल रहा है। इस संघर्ष में हजारों लोगों की जान गई है और लाखों लोग विस्थापित हुए हैं। लड़ाई ने स्वास्थ्य सेवाओं, आवास और अन्य जरूरी सुविधाओं को व्यापक नुकसान पहुँचाया है। हाल के दिनों में बिजली ढाँचे पर भी हमलों की खबरें आई हैं, जिनसे कई इलाकों में आपूर्ति प्रभावित हुई। न्याला की ताजा घटना ऐसे समय हुई है, जब देश पहले से गंभीर मानवीय संकट से जूझ रहा है। नागरिक इलाकों में बढ़ते ड्रोन हमले राहत और उपचार के काम को भी मुश्किल बना रहे हैं।
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