समुद्री उद्योग में भारत का बढ़ेगा दबदबा थूथुकुडी मेगा शिपयार्ड को लेकर बड़ी तैयारी
नई दिल्ली/सियोल : 28 अक्टूबर 2026। भारत को वैश्विक जहाज निर्माण उद्योग में बड़ी ताकत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल की दक्षिण कोरिया यात्रा के बीच तमिलनाडु के थूथुकुडी में प्रस्तावित मेगा शिपयार्ड परियोजना एक बार फिर चर्चा में है। दक्षिण कोरिया की प्रमुख जहाज निर्माण कंपनी एचडी हुंडई के सहयोग से विकसित की जाने वाली इस परियोजना के लिए विस्तृत तकनीकी अध्ययन और परियोजना रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।हालांकि, सोनोवाल और एचडी हुंडई के चेयरमैन चुंग की-सन के बीच सियोल में नई मुलाकात की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं हुई है। इससे पहले नवंबर 2025 में चुंग की-सन ने केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी से मुलाकात की थी। वहीं, सोनोवाल की वर्तमान दक्षिण कोरिया यात्रा का उद्देश्य दोनों देशों के बीच जहाज निर्माण, बंदरगाह विकास और समुद्री परिवहन में सहयोग बढ़ाना है।
थूथुकुडी मेगा शिपयार्ड परियोजना को मिली नई गति
तमिलनाडु के थूथुकुडी में प्रस्तावित मेगा शिपयार्ड भारत की सबसे महत्वाकांक्षी समुद्री औद्योगिक परियोजनाओं में शामिल है। इस परियोजना को दक्षिण कोरिया की एचडी कोरिया शिपबिल्डिंग एंड ऑफशोर इंजीनियरिंग (HD KSOE) के सहयोग से विकसित करने की योजना है।सितंबर 2026 में कंपनी के वरिष्ठ प्रतिनिधिमंडल ने परियोजना स्थल का विस्तृत सर्वेक्षण किया था। इस दौरान तमिलनाडु सरकार, वी.ओ. चिदंबरनार बंदरगाह प्राधिकरण और संबंधित अधिकारियों के साथ कई दौर की बातचीत हुई।बैठकों में जमीन, आधारभूत संरचना, सरकारी प्रोत्साहन, तकनीकी आवश्यकताओं और परियोजना की समयसीमा पर चर्चा की गई। कंपनी ने तमिलनाडु सरकार को परियोजना आगे बढ़ाने का भरोसा भी दिया।परियोजना के लिए विस्तृत व्यवहार्यता अध्ययन और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
करीब 38 हजार करोड़ रुपये की परियोजना का प्रस्ताव
थूथुकुडी मेगा शिपयार्ड में लगभग 38 हजार करोड़ रुपये के निवेश की संभावना जताई गई है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत अत्याधुनिक जहाज निर्माण सुविधाएं, समुद्री उपकरण निर्माण इकाइयां और संबंधित औद्योगिक बुनियादी ढांचा विकसित करने की योजना है।हालांकि, सितंबर 2026 तक एचडी हुंडई ने स्पष्ट किया था कि परियोजना में लगभग चार अरब डॉलर का निवेश अंतिम रूप से तय नहीं हुआ है। इसलिए प्रस्तावित निवेश और वास्तविक स्वीकृत राशि में अंतर हो सकता है।परियोजना के पूर्ण रूप से विकसित होने पर इसकी सालाना जहाज निर्माण क्षमता लगभग 25 लाख ग्रॉस टनेज रखने का लक्ष्य है।इससे बड़े वाणिज्यिक जहाजों के निर्माण में भारत की क्षमता बढ़ने की उम्मीद की जा रही है।
अप्रैल में हुआ था ऐतिहासिक समझौता
भारत और दक्षिण कोरिया के बीच समुद्री सहयोग को मजबूत बनाने के लिए 20 अप्रैल 2026 को महत्वपूर्ण त्रिपक्षीय समझौता हुआ था।इस समझौते में एचडी कोरिया शिपबिल्डिंग एंड ऑफशोर इंजीनियरिंग, नेशनल शिपबिल्डिंग एंड हेवी इंडस्ट्रीज पार्क तमिलनाडु लिमिटेड और सागरमाला फाइनेंस कॉरपोरेशन लिमिटेड शामिल थे।समझौता दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग की भारत यात्रा के दौरान केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल की मौजूदगी में हुआ था।इसका उद्देश्य थूथुकुडी में विश्वस्तरीय जहाज निर्माण केंद्र की स्थापना, वित्तपोषण, निर्माण और संचालन के लिए सहयोग का आधार तैयार करना है।
दक्षिण कोरिया की तकनीक से भारत को मिलेगा फायदा
दक्षिण कोरिया दुनिया के प्रमुख जहाज निर्माण देशों में शामिल है। वहां की कंपनियां बड़े मालवाहक जहाजों, गैस वाहकों, कंटेनर जहाजों और अत्याधुनिक समुद्री प्लेटफॉर्म के निर्माण में विशेषज्ञता रखती हैं।भारत इस अनुभव का उपयोग अपने जहाज निर्माण उद्योग को आधुनिक बनाने के लिए करना चाहता है।एचडी हुंडई जैसी कंपनियों के साथ सहयोग से भारतीय शिपयार्ड को आधुनिक डिजाइन, स्वचालित उत्पादन प्रणाली, डिजिटल तकनीक और बेहतर निर्माण प्रक्रियाओं का लाभ मिल सकता है।इसके अलावा पर्यावरण के अनुकूल जहाज निर्माण तकनीक और ऊर्जा दक्ष समुद्री परिवहन को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है।
युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर
थूथुकुडी मेगा शिपयार्ड परियोजना का एक प्रमुख उद्देश्य रोजगार सृजन भी है। परियोजना के निर्माण और संचालन के दौरान तकनीकी एवं गैर-तकनीकी क्षेत्रों में बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर उत्पन्न हो सकते हैं।जहाज निर्माण उद्योग में मरीन इंजीनियर, वेल्डर, इलेक्ट्रिशियन, डिजाइनर, मशीन ऑपरेटर, तकनीशियन और परियोजना प्रबंधन से जुड़े विशेषज्ञों की आवश्यकता होती है।तमिलनाडु सरकार ने इस दिशा में कौशल विकास की योजना पर काम शुरू किया है। राज्य कौशल विकास मिशन के सहयोग से युवाओं को जहाज निर्माण से संबंधित प्रशिक्षण देने की तैयारी है।इसके अंतर्गत कुछ कर्मचारियों को दक्षिण कोरिया में प्रशिक्षण देकर बाद में थूथुकुडी परियोजना में नियुक्त करने की संभावना भी तलाशी जा रही है।
2047 तक शीर्ष पांच जहाज निर्माण देशों में शामिल होने का लक्ष्य
केंद्र सरकार ने वर्ष 2047 तक भारत को दुनिया के शीर्ष पांच जहाज निर्माण देशों में शामिल करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।सर्बानंद सोनोवाल ने अपनी दक्षिण कोरिया यात्रा के दौरान भारतीय पेशेवरों से इस लक्ष्य को हासिल करने में योगदान देने का आह्वान किया।उन्होंने कहा कि भारत को बड़ी संख्या में जहाज निर्माता, मरीन इंजीनियर, तकनीकी विशेषज्ञ और कुशल श्रमिकों की जरूरत होगी।सरकार की मैरीटाइम इंडिया विजन 2030 और मैरीटाइम अमृत काल विजन 2047 योजनाओं के तहत जहाज निर्माण, जहाज मरम्मत और समुद्री लॉजिस्टिक्स को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है।
भारत-दक्षिण कोरिया के रिश्तों में नया अध्याय
भारत और दक्षिण कोरिया ने अप्रैल 2026 में 'VOYAGES' नामक समुद्री सहयोग ढांचा अपनाया था। इसके अंतर्गत जहाज निर्माण, समुद्री परिवहन और लॉजिस्टिक्स में संयुक्त प्रयासों को बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है।थूथुकुडी परियोजना इस सहयोग के प्रमुख उदाहरणों में से एक है।दक्षिण कोरिया की तकनीकी विशेषज्ञता और भारत की बढ़ती औद्योगिक क्षमता का संयोजन भविष्य में दोनों देशों के लिए नए व्यापारिक अवसर पैदा कर सकता है।इसके साथ ही भारतीय जहाज निर्माण उद्योग को अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में भी मदद मिल सकती है।
थूथुकुडी बन सकता है बड़ा समुद्री औद्योगिक केंद्र
तमिलनाडु का थूथुकुडी बंदरगाह व्यापारिक दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थान रखता है। यहां बड़े शिपयार्ड की स्थापना से बंदरगाह आधारित उद्योगों, इस्पात आपूर्ति, भारी इंजीनियरिंग और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में विकास की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।परियोजना के अगले चरणों में विस्तृत परियोजना रिपोर्ट, आवश्यक अनुमतियों, भूमि और वित्तपोषण संबंधी फैसलों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।यदि ये प्रक्रियाएं योजनानुसार पूरी होती हैं, तो थूथुकुडी मेगा शिपयार्ड भारत की समुद्री औद्योगिक क्षमता बढ़ाने में अहम योगदान दे सकता है।