पेरिस। फ्रांस में जारी राजनीतिक और सामाजिक तनाव के बीच शनिवार, 24 अक्टूबर 2026 को देशभर में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन की तैयारी है। 'येलो वेस्ट्स' आंदोलन, ट्रेड यूनियनों और छात्र संगठनों ने शिक्षा व्यवस्था, पढ़ाई की परिस्थितियों और आम लोगों की घटती क्रय शक्ति जैसे मुद्दों को लेकर सड़कों पर उतरने का आह्वान किया है। इस बीच पेरिस में प्रस्तावित प्रदर्शन के मार्ग में अंतिम समय पर किए गए बदलाव ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। वामपंथी नेताओं और प्रदर्शन आयोजकों ने पुलिस प्रशासन के फैसले की आलोचना करते हुए पूर्व निर्धारित रास्ते पर ही मार्च निकालने का ऐलान किया है।
पेरिस में प्रदर्शन का रास्ता बदलने पर विवाद
फ्रांसीसी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पेरिस में शनिवार को आयोजित होने वाला प्रदर्शन पहले प्लेस डे ला बास्टिल से प्लेस डे ला नेशन तक प्रस्तावित था। पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए इस मार्ग पर प्रदर्शन की अनुमति वापस ले ली।इसके स्थान पर प्रशासन ने पोर्ट डी'इटली से पोर्ट डी विन्सेनेस तक वैकल्पिक मार्ग निर्धारित किया है। आधिकारिक आदेश के अनुसार, इस मार्ग पर दोपहर एक बजे से शाम सात बजे तक प्रदर्शन की अनुमति दी गई है।प्रदर्शन आयोजकों का कहना है कि इतनी कम अवधि में मार्ग बदलने से प्रतिभागियों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है।
पुलिस के फैसले से नाराज ट्रेड यूनियन
ट्रेड यूनियन संगठनों ने पुलिस के इस फैसले को अनुचित बताते हुए विरोध जताया है। संगठनों का कहना है कि पहले निर्धारित मार्ग को मंजूरी दिए जाने के बाद अचानक इसमें बदलाव करना प्रदर्शन की तैयारियों को प्रभावित करेगासीजीटी ट्रेड यूनियन के पेरिस क्षेत्र के सह-महासचिव कार्ल गाजी ने नए मार्ग को सुरक्षा व्यवस्था के लिहाज से अनुपयुक्त बताया है।प्रदर्शन आयोजकों ने पुलिस के आदेश को अदालत में चुनौती देने की भी कार्रवाई की है। उनका कहना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना नागरिकों का लोकतांत्रिक अधिकार है।
वामपंथी नेताओं ने जताई गंभीर चिंता
फ्रांस की पर्यावरणवादी नेता मरीन टोंडेलियर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर पुलिस के फैसले को लेकर चिंता व्यक्त की।उन्होंने सवाल उठाया कि जो लोग पहले से निर्धारित बास्टिल क्षेत्र में एकत्र होंगे, क्या पुलिस उन्हें अनधिकृत प्रदर्शनकारी मानेगी?टोंडेलियर ने पिछले सप्ताहांत हुई हिंसक घटनाओं का उल्लेख करते हुए चेतावनी दी कि मौजूदा स्थिति प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच टकराव का कारण बन सकती है।वहीं, वामपंथी दल ला फ्रांस इंसौमिस के नेता ज्यां-ल्यूक मेलनचॉन ने भी प्रशासन के कदम की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार प्रदर्शन के आयोजन में बाधा डाल रही है और आयोजकों को तैयारी के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया जा रहा।
पिछले प्रदर्शन में हुई थी हिंसा
फ्रांस में 17 अक्टूबर को हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान कई शहरों में हिंसक घटनाएं सामने आई थीं। कुछ स्थानों पर दुकानों और सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुंचा था।इन्हीं घटनाओं को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने नए प्रदर्शनों को लेकर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की है।पेरिस के अलावा लियोन, मार्सेई और अन्य शहरों में भी प्रदर्शन तथा सुरक्षा प्रतिबंधों को लेकर प्रशासन सतर्क है। कई शहरों में प्रदर्शन के रास्तों और सार्वजनिक सभाओं पर विशेष नियम लागू किए गए हैं।
शिक्षा और महंगाई से जुड़ी मांगों पर जोर
प्रदर्शनकारी संगठनों की प्रमुख मांगों में बेहतर शिक्षा सुविधाएं, विद्यार्थियों की समस्याओं का समाधान और लोगों की क्रय शक्ति बढ़ाने के उपाय शामिल हैं।ट्रेड यूनियनों का कहना है कि आम नागरिकों की आर्थिक परेशानियों को दूर करने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाने चाहिए।वहीं, छात्र संगठन शिक्षा व्यवस्था में सुधार और विद्यार्थियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग कर रहे हैं।
पूरे फ्रांस में सुरक्षा एजेंसियां सतर्क
शनिवार के प्रदर्शनों को देखते हुए फ्रांस की सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हैं। प्रशासन का कहना है कि नागरिकों के प्रदर्शन के अधिकार के साथ सार्वजनिक सुरक्षा बनाए रखना भी जरूरी हैदूसरी ओर, प्रदर्शन आयोजक पुलिस के संशोधित मार्ग को स्वीकार करने के बजाय अपने पहले से निर्धारित रास्ते पर मार्च निकालने के फैसले पर कायम हैं।ऐसे में पेरिस सहित फ्रांस के विभिन्न शहरों में दिनभर तनावपूर्ण स्थिति बने रहने की आशंका जताई जा रही है।
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