इस्लामाबाद। पाकिस्तान में शहरी परिवहन व्यवस्था को लेकर नई बहस छिड़ गई है। देश में आम लोगों के लिए सस्ती और सुविधाजनक सार्वजनिक बस सेवाओं का विस्तार करने की मांग तेज हो रही है। 'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान की परिवहन नीति में बड़े बदलाव की जरूरत है। विशेषज्ञों का कहना है कि निजी कारों और मोटरसाइकिलों पर निर्भरता कम करके सार्वजनिक परिवहन को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। इससे आम नागरिकों का सफर सस्ता हो सकता है, प्रदूषण कम करने में मदद मिल सकती है और देश में बस निर्माण उद्योग को भी बढ़ावा मिल सकता है।
परिवहन व्यवस्था में निजी वाहनों का दबदबा
बसकारो और पाकिस्तान एंड काउंटिंग की ओर से जारी मोबिलिटी इंडेक्स के अनुसार, परिवहन के विभिन्न साधनों में निजी मोटरसाइकिलों, कारों और रिक्शों का दबदबा बना हुआ है। इंडेक्स में इन वाहनों का संयुक्त हिस्सा 98.7 प्रतिशत है, जबकि सार्वजनिक परिवहन का भारांक 0.5 प्रतिशत से भी कम है।यहां ध्यान देने वाली बात है कि ये आंकड़े इंडेक्स में वाहनों की संख्या के आधार पर तय किए गए भारांक को दर्शाते हैं। इन्हें पाकिस्तान में सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करने वाले यात्रियों का वास्तविक प्रतिशत नहीं माना जाना चाहिए।रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान के बड़े शहरों में सार्वजनिक परिवहन की सीमित उपलब्धता और बुनियादी ढांचे की कमी के कारण लोगों को निजी वाहनों पर निर्भर रहना पड़ता है। इससे सड़क पर वाहनों की संख्या बढ़ती है और शहरी आवागमन की चुनौतियां भी गंभीर होती हैं।
एक किलोमीटर सफर का औसत खर्च 7.9 प्रतिशत घटा
मोबिलिटी इंडेक्स में मई से सितंबर 2026 के बीच परिवहन के आठ साधनों से एक किलोमीटर सफर करने की औसत लागत में 7.9 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। मई में यह खर्च 10.48 पाकिस्तानी रुपये था, जो सितंबर में घटकर 9.65 रुपये रह गयारिपोर्ट के अनुसार, इस गिरावट में पेट्रोल की कीमतों में कमी और ऐप आधारित टैक्सी सेवाओं के किराये में बदलाव की भूमिका रही। हालांकि, औसत लागत में गिरावट का अर्थ यह नहीं है कि सार्वजनिक परिवहन की स्थिति में भी सुधार हुआ है।इंडेक्स में निजी मोटरसाइकिलों, कारों और रिक्शों के ईंधन खर्च में मई से सितंबर के बीच 7.5 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। इसके विपरीत, सार्वजनिक परिवहन की प्रति सीट-किलोमीटर लागत में 77 प्रतिशत की वृद्धि हुई। यह खर्च 1.22 रुपये से बढ़कर 2.16 रुपये हो गया।
बस सेवाओं का किराया बढ़ने से बदले आंकड़े
रिपोर्ट में सार्वजनिक परिवहन की लागत बढ़ने की एक प्रमुख वजह पंजाब की मेट्रो बस, बस रैपिड ट्रांजिट (BRT) और ऑरेंज लाइन सेवाओं का किराया दोबारा लागू होना बताई गई है।इन सेवाओं पर अप्रैल से जून 2026 के बीच कुछ समय तक मुफ्त यात्रा की सुविधा दी गई थी। बाद में किराया बहाल होने से सार्वजनिक परिवहन के लागत सूचकांक में बढ़ोतरी दर्ज की गई।इसलिए सार्वजनिक परिवहन की लागत में 77 प्रतिशत वृद्धि को केवल परिचालन खर्च बढ़ने का परिणाम मानना सही नहीं होगा। इसमें किराये की बहाली का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा।
विशेषज्ञों ने बस नेटवर्क बढ़ाने की दी सलाह
ऑटोमोबाइल विशेषज्ञ मशूद अली खान के अनुसार, पाकिस्तान को ऐसी परिवहन नीति अपनानी चाहिए, जिसमें सार्वजनिक बसों को प्रमुख स्थान दिया जाए। उन्होंने कहा कि बड़े शहरों में परिवहन व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए बसों के मार्ग, उपलब्धता और यात्रियों की जरूरतों के बीच बेहतर तालमेल होना चाहिए।उन्होंने सरकार से सार्वजनिक परिवहन का विस्तार करने और इलेक्ट्रिक बसों को प्रोत्साहित करने की मांग की। उनके मुताबिक, बस सेवाओं को सुविधाजनक, स्वच्छ और किफायती बनाकर लोगों को निजी वाहनों के विकल्प उपलब्ध कराए जा सकते हैं।खान ने यह भी सुझाव दिया कि संघीय और प्रांतीय सरकारें मिलकर देशव्यापी परिवहन योजना तैयार करें, ताकि विभिन्न राज्यों की जरूरतों के अनुसार बस नेटवर्क विकसित किया जा सके।
देश में बस निर्माण को भी मिल सकता है बढ़ावा
विशेषज्ञ ने सार्वजनिक परिवहन के विस्तार को घरेलू उद्योग से जोड़ने पर भी जोर दिया। उनका कहना है कि पाकिस्तान को पूरी तरह आयातित बसों पर निर्भर रहने के बजाय अंतरराष्ट्रीय वाहन निर्माताओं के साथ साझेदारी करके देश में बस निर्माण की क्षमता विकसित करनी चाहिए।खान के अनुसार, पाकिस्तान में फिलहाल करीब 2,000 बसों का बेड़ा है, जबकि सालाना मांग 18,000 से 20,000 बसों तक पहुंच सकती है। यह उनका अनुमान है, आधिकारिक रूप से सत्यापित मांग का आंकड़ा नहीं।स्थानीय निर्माण को बढ़ावा मिलने से निवेश, रोजगार और इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग के विकास के अवसर पैदा हो सकते हैं।
बेहतर सार्वजनिक परिवहन की जरूरत
पाकिस्तान की परिवहन व्यवस्था से जुड़े ये आंकड़े बताते हैं कि निजी वाहनों पर निर्भरता कम करने के लिए केवल किराये में बदलाव पर्याप्त नहीं होगा। बसों की उपलब्धता बढ़ाना, सड़कों और परिवहन ढांचे में सुधार करना तथा विभिन्न सरकारों के बीच समन्वय स्थापित करना भी जरूरी होगा।विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सार्वजनिक परिवहन को सस्ता, सुरक्षित और सुविधाजनक बनाया जाता है, तो इससे आम नागरिकों को राहत मिलने के साथ-साथ प्रदूषण और यातायात की समस्याओं को कम करने में भी मदद मिल सकती है।