लंदन : 26 अक्टूबर 2026। ब्रिटेन में चीन से जुड़े कथित प्रभाव अभियानों और जासूसी गतिविधियों को लेकर सुरक्षा विशेषज्ञों ने गंभीर चिंता जताई है। विश्लेषकों का कहना है कि चीन से संबंधित कुछ नेटवर्क ब्रिटेन की लोकतांत्रिक संस्थाओं, शैक्षणिक क्षेत्रों और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए चुनौती बन सकते हैं। इन गतिविधियों में राजनीतिक हस्तक्षेप, साइबर जासूसी, संवेदनशील जानकारियों तक पहुंच बनाने और विदेशों में रहने वाले असंतुष्ट लोगों पर दबाव डालने जैसे आरोप शामिल हैं।समाचार एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार, ताइवान के विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि चीन से जुड़े प्रभाव अभियान ब्रिटेन की लोकतांत्रिक व्यवस्था और कानूनी संप्रभुता को प्रभावित कर सकते हैं। ब्रिटिश सुरक्षा एजेंसी MI5 भी चीन से संबंधित जासूसी और विदेशी हस्तक्षेप के खतरों को लेकर पहले चेतावनी जारी कर चुकी है।
ब्रिटेन की लोकतांत्रिक संस्थाओं में हस्तक्षेप की आशंका
ताइवान की तुंगहाई यूनिवर्सिटी के सेंटर फॉर मेनलैंड चाइना एंड रीजनल डेवलपमेंट रिसर्च के निदेशक लिन त्जुली ने कहा कि ब्रिटेन के राजनीतिक और सुरक्षा अधिकारी चीन से जुड़े कथित घुसपैठ अभियानों को गंभीर चुनौती के रूप में देख रहे हैं।उनके अनुसार, कुछ गतिविधियां सीधे टकराव के बजाय अप्रत्यक्ष तरीकों से संचालित की जाती हैं। इनमें व्यावसायिक संस्थाओं, सलाहकार कंपनियों और शैक्षणिक संपर्कों के माध्यम से प्रभाव स्थापित करने के प्रयास शामिल हो सकते हैं।विश्लेषकों ने इन्हें 'ग्रे-जोन ऑपरेशन' बताया है, जिनमें ऐसी गतिविधियां शामिल होती हैं जो खुले संघर्ष की सीमा तक पहुंचे बिना दूसरे देश के हितों को प्रभावित कर सकती हैं।
चीनी नागरिकों की जांच पर बढ़ा विवाद
रिपोर्ट के मुताबिक, 20 अक्टूबर को लंदन स्थित चीनी दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म वीचैट पर दावा किया कि ब्रिटेन के सीमा अधिकारियों ने कई चीनी यात्रियों से लंबे समय तक पूछताछ की और उनके इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए।इन यात्रियों में व्यापारिक प्रतिनिधिमंडलों के सदस्य, पर्यटक और पारिवारिक मुलाकात के लिए पहुंचे लोग शामिल बताए गए। चीन ने इस कार्रवाई पर गंभीर चिंता जताते हुए ब्रिटेन के समक्ष औपचारिक विरोध दर्ज कराया।ब्रिटेन के अधिकारियों ने संबंधित जांच राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े कानूनी प्रावधानों के तहत की थी। हालांकि, इन मामलों में पूछताछ का सामना करने वाले सभी व्यक्तियों के किसी गैरकानूनी गतिविधि में शामिल होने की पुष्टि नहीं हुई है।
MI5 ने जासूसी और विदेशी हस्तक्षेप पर जताई चिंता
ब्रिटेन की घरेलू खुफिया एजेंसी MI5 के महानिदेशक केन मैक्कलम ने 13 अक्टूबर को अपने वार्षिक सुरक्षा आकलन में चीन से जुड़े जासूसी, दबाव बनाने और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में हस्तक्षेप के खतरों का उल्लेख किया।इससे पहले 30 सितंबर को MI5 ने चीन जनरल टेक्नोलॉजी रिसर्च इंस्टीट्यूट (CGTRI) को लेकर चेतावनी जारी की थी। एजेंसी के अनुसार, ब्रिटेन से जुड़े 100 से अधिक शिक्षाविद ऐसे अनुसंधान कार्यों में योगदान दे चुके हैं, जिन्हें इस संस्थान के माध्यम से चीन के राज्य सुरक्षा मंत्रालय से वित्तीय सहायता मिली थी।MI5 ने स्पष्ट किया कि कुछ शोधकर्ताओं को वित्तपोषण के वास्तविक स्रोत की जानकारी नहीं रही होगी। ब्रिटिश विश्वविद्यालयों को ऐसे सहयोग की समीक्षा करने की सलाह दी गई है।
साइबर हमलों और राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोप
इंटर-पार्लियामेंट्री अलायंस ऑन चाइना (IPAC) की रिपोर्ट का हवाला देते हुए विश्लेषकों ने दावा किया कि वर्ष 2024 में ब्रिटेन को निशाना बनाने वाली चीन से जुड़ी साइबर जासूसी गतिविधियों में 150 प्रतिशत वृद्धि हुई थी।रिपोर्ट में वित्तीय संस्थानों, मीडिया, विनिर्माण क्षेत्र और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को संभावित निशाना बताया गया। इसके अलावा ब्रिटेन के चुनाव आयोग के सिस्टम में पहले हुई सेंधमारी और सांसदों से संबंधित जानकारियां जुटाने के मामलों का भी उल्लेख किया गया।विश्लेषकों का कहना है कि ऐसी गतिविधियां संवेदनशील सूचनाओं की सुरक्षा और लोकतांत्रिक संस्थाओं में जनता के विश्वास को प्रभावित कर सकती हैं।
व्यापार और शिक्षा संबंधों पर पड़ सकता है असर
विश्लेषकों ने आशंका जताई है कि ब्रिटेन और चीन के बीच बढ़ते सुरक्षा विवाद का असर व्यापार, शिक्षा और निवेश संबंधों पर भी पड़ सकता है।चीन की ओर से संभावित जवाबी कदमों में ब्रिटिश नागरिकों की सीमा पर अतिरिक्त जांच और व्यापारिक प्रतिबंध जैसी कार्रवाइयों की आशंका व्यक्त की गई है। हालांकि, ये विश्लेषकों की संभावनाएं हैं, किसी घोषित नई कार्रवाई की पुष्टि नहीं।ब्रिटिश सरकार ने भी स्वीकार किया है कि चीन के साथ आर्थिक सहयोग बनाए रखते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा करना एक जटिल चुनौती है। सरकार का कहना है कि वह साइबर हमलों, जासूसी और विदेशी हस्तक्षेप से निपटने के साथ चीन के साथ व्यावहारिक आर्थिक संबंध बनाए रखना चाहती है।
राष्ट्रीय सुरक्षा मजबूत करने पर जोर
सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ब्रिटेन को अपने लोकतांत्रिक संस्थानों, विश्वविद्यालयों और संवेदनशील तकनीकी क्षेत्रों की सुरक्षा मजबूत करनी होगी। इसके लिए साइबर सुरक्षा, विदेशी वित्तपोषण की पारदर्शिता और संदिग्ध गतिविधियों की निगरानी को महत्वपूर्ण बताया गया है।वहीं, ब्रिटेन और चीन के बीच बढ़ता तनाव यह सवाल भी खड़ा कर रहा है कि दोनों देश राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी मतभेदों के बावजूद आर्थिक और राजनयिक सहयोग कैसे बनाए रखेंगे। आने वाले समय में ब्रिटेन की सुरक्षा नीतियां और चीन की प्रतिक्रिया दोनों देशों के संबंधों की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।