OYO IPO पर उठे सवाल, JoStel ने SEBI से की जांच की मांग

Update: 2026-07-09 11:15 GMT

New Delhi नई दिल्ली :  होटल और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर की चर्चित कंपनी ओयो की पैरेंट कंपनी प्रिज्म (पुराना नाम- ओरावेल स्टेज) के प्रस्तावित आईपीओ को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। जोस्टेल कंपनी ने भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) से प्रिज्म की आईपीओ फाइलिंग में दी गई जानकारियों की जांच करने की मांग की है।

जोस्टेल का आरोप है कि प्रिज्म की ओर से जमा किए गए अपडेटेड ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (UDRHP) में दोनों कंपनियों के बीच चल रहे करीब 11 साल पुराने कानूनी विवाद की पूरी जानकारी नहीं दी गई है। जोस्टेल ने दावा किया है कि आईपीओ दस्तावेजों में मामले से जुड़ी कुछ जानकारियां अधूरी और चुनिंदा तरीके से पेश की गई हैं।

जोस्टेल के इन आरोपों के बाद ओयो की आईपीओ प्रक्रिया एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। हालांकि, कंपनी की ओर से इस मामले पर अभी कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

क्या है विवाद का मामला?

जोस्टेल और ओयो के बीच विवाद काफी पुराना है। दोनों कंपनियों के बीच यह कानूनी मामला करीब 11 साल से चल रहा है। जोस्टेल का कहना है कि इस विवाद का कंपनी के कारोबार और आईपीओ से जुड़े दस्तावेजों पर असर पड़ सकता है, इसलिए निवेशकों के हितों को ध्यान में रखते हुए इसकी पूरी जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए।

जोस्टेल ने SEBI से अनुरोध किया है कि वह प्रिज्म द्वारा जमा किए गए आईपीओ दस्तावेजों की समीक्षा करे और यह सुनिश्चित करे कि निवेशकों को सभी महत्वपूर्ण जानकारियां सही और पूरी तरह उपलब्ध कराई जाएं।

प्रिज्म की आईपीओ तैयारी

ओयो का संचालन करने वाली ओरावेल स्टेज ने सितंबर 2025 में अपना नाम बदलकर प्रिज्म कर लिया था। कंपनी हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में बड़ा नाम है और दुनिया के कई देशों में अपना कारोबार संचालित करती है।

प्रिज्म 35 से अधिक देशों में 43 ब्रांडों का संचालन करती है। कंपनी बजट होटल, ट्रैवल और हॉस्पिटैलिटी सेवाओं से जुड़े कारोबार में सक्रिय है। आईपीओ के जरिए कंपनी की योजना पूंजी जुटाने और अपने कारोबार को और विस्तार देने की है।

SEBI की भूमिका अहम

आईपीओ प्रक्रिया में SEBI की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। बाजार नियामक यह सुनिश्चित करता है कि कंपनियां निवेशकों के सामने सही और पूरी जानकारी रखें। अगर किसी कंपनी के दस्तावेजों में महत्वपूर्ण जानकारी छिपाने या गलत तरीके से पेश करने का आरोप लगता है, तो SEBI इसकी जांच कर सकता है।

जोस्टेल की शिकायत के बाद अब नजर इस बात पर है कि SEBI इस मामले में क्या कदम उठाता है। यदि नियामक जांच शुरू करता है तो प्रिज्म को अपने आईपीओ दस्तावेजों में दिए गए तथ्यों को स्पष्ट करना पड़ सकता है।

पहले भी चर्चा में रहा है ओयो का IPO

ओयो का आईपीओ लंबे समय से बाजार में चर्चा का विषय रहा है। कंपनी ने पहले भी आईपीओ लाने की योजना बनाई थी, लेकिन कई कारणों से प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। अब कंपनी नए नाम और अपडेटेड दस्तावेजों के साथ बाजार में उतरने की तैयारी कर रही है।हालांकि, जोस्टेल के आरोपों के बाद कंपनी की आईपीओ यात्रा में नई चुनौती सामने आ गई है। अब निवेशकों और बाजार की नजर SEBI की संभावित कार्रवाई और कंपनी के अगले कदम पर टिकी हुई है।

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