नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में नगर निगम की स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने और यातायात व्यवस्था को बेहतर करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। दिल्ली नगर निगम (MCD) की स्थायी समिति की अध्यक्ष सत्या शर्मा ने सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग में रिक्त पदों को भरने और दिल्ली की सीमाओं पर स्थित 126 टोल कलेक्शन पॉइंट को बैरियर-मुक्त बनाने की योजना पर जोर दिया है। इस पहल का उद्देश्य स्वास्थ्य विभाग की कार्यक्षमता बढ़ाने के साथ टोल नाकों पर लगने वाले जाम को कम करना और प्रदूषण नियंत्रण के प्रयासों को मजबूती देना है।दिल्ली में लंबे समय से नगर निगम के सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग में कर्मचारियों की कमी का मुद्दा उठता रहा है। इसका असर मच्छरजनित बीमारियों की रोकथाम, सफाई संबंधी निरीक्षण और स्वास्थ्य निगरानी जैसी गतिविधियों पर पड़ता है। अब रिक्त पदों को भरने की योजना से विभाग की कार्यप्रणाली में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है। हालांकि, भर्ती के लिए पदों की अंतिम संख्या और नियुक्ति प्रक्रिया की विस्तृत समयसीमा की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
इससे पहले सामने आई जानकारी के अनुसार, नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग में कर्मचारियों की काफी कमी रही है। वर्ष 2025 में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक, मलेरिया निरीक्षकों के 150 स्वीकृत पदों में से 92 खाली थे, जबकि सहायक मलेरिया निरीक्षकों के 600 पदों में से 391 रिक्त थे। इसी तरह कीटविज्ञान विशेषज्ञों के 12 पदों में से केवल पांच पर कर्मचारी कार्यरत थे। इस स्थिति के कारण कई अधिकारियों और कर्मचारियों को अतिरिक्त जिम्मेदारियां संभालनी पड़ रही थीं।सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग के रिक्त पदों को भरना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि दिल्ली में डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों की रोकथाम के लिए लगातार निगरानी की जरूरत होती है। कर्मचारियों की पर्याप्त संख्या होने पर घरों और व्यावसायिक परिसरों में मच्छरों के प्रजनन स्थलों की जांच, जागरूकता अभियान और आवश्यक कार्रवाई को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।
इस बीच दिल्ली नगर निगम की दूसरी प्रमुख योजना राजधानी के प्रवेश मार्गों पर टोल संग्रह व्यवस्था को आधुनिक बनाने की है। इसके अंतर्गत 126 टोल कलेक्शन पॉइंट पर बैरियर-फ्री मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) प्रणाली लागू करने का लक्ष्य रखा गया है। इस तकनीक की मदद से वाहनों को टोल भुगतान के लिए रुकने की आवश्यकता नहीं होगी।नई प्रणाली में रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (RFID) और ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) तकनीक का इस्तेमाल प्रस्तावित है। वाहनों के टोल संग्रह बिंदु से गुजरते समय उनकी पहचान इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से की जा सकेगी। इससे टोल भुगतान की प्रक्रिया तेज और अधिक व्यवस्थित होने की उम्मीद है।
दरअसल, दिल्ली की सीमाओं पर स्थित कई टोल नाकों पर व्यावसायिक वाहनों की लंबी कतारें लगती हैं। विशेष रूप से व्यस्त समय में वाहन चालकों को काफी देर तक इंतजार करना पड़ता है। इससे यातायात प्रभावित होने के साथ ईंधन की खपत और वाहनों के उत्सर्जन की समस्या भी बढ़ती है।सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी 2026 में दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) की सिफारिशों पर विचार किया था। आयोग ने सुझाव दिया था कि दिल्ली नगर निगम सभी 126 टोल संग्रह बिंदुओं पर अक्टूबर 2026 तक बैरियर-फ्री MLFF प्रणाली को पूरी तरह संचालित करे। इसका मुख्य उद्देश्य सीमावर्ती क्षेत्रों में वाहनों के रुकने और यातायात जाम की समस्या को कम करना है।
सुप्रीम कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत सिफारिशों में यह भी कहा गया था कि यदि निर्धारित समयसीमा तक नई प्रणाली लागू नहीं होती है, तो नवंबर से जनवरी के बीच प्रदूषण के चरम महीनों में नौ चिह्नित टोल प्लाजा पर वैकल्पिक व्यवस्था पर विचार किया जा सकता है। हालांकि, इसे सभी वाहनों के लिए टोल माफी का लागू हो चुका आदेश नहीं समझना चाहिए।नई टोल प्रणाली को लागू करने के लिए नगर निगम को विभिन्न एजेंसियों के साथ समन्वय करना पड़ रहा है। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की अनुमति भी कुछ स्थानों पर आवश्यक है। सितंबर 2026 में NHAI ने दो स्थानों पर मल्टी-लेन फ्री फ्लो प्रणाली के लिए जरूरी ढांचे की स्थापना को अनापत्ति प्रमाणपत्र दिया था। अन्य राष्ट्रीय राजमार्ग स्थलों पर तकनीकी व्यवहार्यता और स्थान निरीक्षण की प्रक्रिया चल रही थी।
नगर निगम ने टोल चोरी रोकने के लिए नियमों में बदलाव की दिशा में भी कदम उठाए हैं। जून 2026 में निगम सदन ने दिल्ली नगर निगम टोल टैक्स उपनियम, 2007 में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत डिजिटल तकनीक के माध्यम से टोल भुगतान नहीं करने वाले वाहनों की पहचान और संबंधित वाहन मालिकों को नोटिस जारी करने की व्यवस्था की बात कही गई है।प्रस्ताव के अनुसार, यदि किसी वाहन का टोल भुगतान नहीं होता है, तो संबंधित मालिक के खिलाफ निर्धारित प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की जा सकेगी। हालांकि, संशोधित नियमों के अंतिम क्रियान्वयन के लिए आवश्यक प्रशासनिक और वैधानिक औपचारिकताओं का पूरा होना जरूरी है।
दिल्ली में नई तकनीक का इस्तेमाल केवल यातायात सुविधा से जुड़ा विषय नहीं है, बल्कि इसे प्रदूषण नियंत्रण की व्यापक रणनीति का भी हिस्सा माना जा रहा है। राजधानी में सर्दियों के दौरान वायु गुणवत्ता अक्सर खराब हो जाती है। ऐसे में सीमा क्षेत्रों पर वाहनों की लंबी कतारों को कम करना उत्सर्जन घटाने के उपायों में से एक हो सकता है।दूसरी ओर, सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग में खाली पदों को भरने से निगम की जमीनी स्वास्थ्य निगरानी व्यवस्था को मजबूत बनाने में मदद मिल सकती है। दोनों योजनाओं का सफल क्रियान्वयन कर्मचारियों की उपलब्धता, वित्तीय संसाधनों और संबंधित एजेंसियों के बीच प्रभावी समन्वय पर निर्भर करेगा।
फिलहाल दिल्ली नगर निगम के सामने प्रमुख चुनौती इन योजनाओं को निर्धारित प्रक्रियाओं के अनुरूप लागू करने की है। अक्टूबर 2026 की समयसीमा के मद्देनजर सभी 126 टोल बिंदुओं पर बैरियर-मुक्त व्यवस्था के पूरी तरह चालू होने की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं मिली है।यदि स्वास्थ्य विभाग की रिक्तियों को भरने और टोल संग्रह व्यवस्था के आधुनिकीकरण की योजनाएं प्रभावी ढंग से लागू होती हैं, तो इससे राजधानी की स्वास्थ्य सेवाओं, यातायात प्रबंधन और प्रदूषण नियंत्रण प्रयासों को लाभ मिल सकता है।
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