रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एपी सिंह के नेतृत्व को सराहा, 31 अक्टूबर को होंगे सेवानिवृत्त
नई दिल्ली। भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमरप्रीत सिंह (एपी सिंह) की सेवानिवृत्ति से पहले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने उन्हें औपचारिक विदाई देते हुए देश की सुरक्षा में उनके योगदान की सराहना की। एयर चीफ मार्शल एपी सिंह 31 अक्टूबर 2026 को अपने 42 वर्षों के शानदार सैन्य करियर के बाद सेवानिवृत्त होने जा रहे हैं। रक्षा मंत्री ने उनके नेतृत्व, व्यावसायिक दक्षता और भारतीय वायुसेना की परिचालन क्षमताओं को मजबूत बनाने में निभाई गई भूमिका की प्रशंसा की। विशेष रूप से वर्ष 2025 में चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उनके नेतृत्व को महत्वपूर्ण बताया गया। रक्षा मंत्रालय ने शुक्रवार, 30 अक्टूबर को इस संबंध में जानकारी साझा की और विदाई समारोह की तस्वीरें जारी कीं। यह विदाई कार्यक्रम 26 अक्टूबर को आयोजित किया गया था।रक्षा मंत्रालय के अनुसार, राजनाथ सिंह ने एयर चीफ मार्शल एपी सिंह को भारतीय वायुसेना और राष्ट्र के प्रति उनकी विशिष्ट सेवाओं के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि देश की रक्षा तैयारियों को मजबूत बनाने और महत्वपूर्ण सैन्य अभियानों में नेतृत्व प्रदान करने में एपी सिंह का योगदान उल्लेखनीय रहा है। रक्षा मंत्री ने उनके भविष्य के जीवन के लिए शुभकामनाएं भी दीं।विदाई समारोह में भारतीय सैन्य नेतृत्व के वरिष्ठ अधिकारी और रक्षा मंत्रालय के उच्च अधिकारी मौजूद रहे। एयर चीफ मार्शल एपी सिंह की पत्नी सरिता सिंह भी कार्यक्रम में शामिल हुईं। इस अवसर पर रक्षा मंत्री ने दंपती को अमृतसर के स्वर्ण मंदिर की फ्रेम की हुई तस्वीर स्मृति चिह्न के रूप में भेंट की।रक्षा मंत्री ने वायुसेना प्रमुख के साथ उनके लंबे सेवाकाल के अनुभवों और राष्ट्र की सुरक्षा के लिए किए गए प्रयासों को याद किया। कार्यक्रम में उपस्थित अधिकारियों ने भी उनके नेतृत्व और सहयोग के लिए सम्मान व्यक्त किया।
ऑपरेशन सिंदूर में निभाई महत्वपूर्ण भूमिका
एयर चीफ मार्शल एपी सिंह के कार्यकाल की सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं में ऑपरेशन सिंदूर शामिल है। यह अभियान मई 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा चलाया गया था।22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत हो गई थी। इसके बाद 7 मई को भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकी ढांचों को निशाना बनाते हुए ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया।रक्षा मंत्रालय के अनुसार, अभियान के दौरान भारतीय वायुसेना ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। एयर चीफ मार्शल एपी सिंह के नेतृत्व में वायुसेना ने विभिन्न सैन्य गतिविधियों में भाग लिया और अपनी परिचालन तैयारियों का प्रदर्शन किया।रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने विदाई समारोह में विशेष रूप से ऑपरेशन सिंदूर के दौरान एपी सिंह की भूमिका की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि वायुसेना की क्षमताओं को मजबूत करने के लिए किए गए प्रयास आने वाले समय में भी उपयोगी साबित होंगे।
42 वर्षों की सेवा के बाद होंगे सेवानिवृत्त
एयर चीफ मार्शल अमरप्रीत सिंह का सैन्य करियर लगभग चार दशक से अधिक लंबा रहा है। वह वर्ष 1984 में भारतीय वायुसेना की लड़ाकू विमान शाखा में शामिल हुए थे।अपने सेवाकाल के दौरान उन्होंने अनेक महत्वपूर्ण परिचालन, प्रशिक्षण और प्रशासनिक पदों पर जिम्मेदारियां संभालीं। वह एक अनुभवी लड़ाकू विमान पायलट और परीक्षण पायलट रहे हैं।एपी सिंह ने 30 सितंबर 2024 को भारतीय वायुसेना के 28वें प्रमुख के रूप में कार्यभार संभाला था। इससे पहले वह वायुसेना के उपप्रमुख के पद पर कार्यरत थे।वायुसेना प्रमुख के रूप में उन्होंने करीब 25 महीने तक जिम्मेदारी निभाई। उनके कार्यकाल में युद्धक तैयारियों, लड़ाकू विमान बेड़े की क्षमता बढ़ाने, प्रशिक्षण और आधुनिक तकनीक के समावेश जैसे मुद्दे महत्वपूर्ण रहे।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से भी की मुलाकात
सेवानिवृत्ति से एक दिन पहले शुक्रवार को एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से राष्ट्रपति भवन में मुलाकात की। इस दौरान उनकी पत्नी सरिता सिंह भी उपस्थित रहीं।राष्ट्रपति से मुलाकात उनके सैन्य करियर के अंतिम औपचारिक कार्यक्रमों में शामिल रही। इससे पहले उन्हें विभिन्न सैन्य आयोजनों में विदाई दी जा चुकी थी।जानकारी के अनुसार, 26 अक्टूबर को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की ओर से विदाई समारोह आयोजित किया गया। इसके बाद 27 अक्टूबर को इंडिया गेट के पास आकाश ऑफिसर्स मेस में वरिष्ठ वायुसेना कमांडरों ने विदाई रात्रिभोज आयोजित किया। वहीं 28 अक्टूबर को सुब्रतो पार्क स्थित वायुसेना सभागार में एक अन्य कार्यक्रम हुआ।
31 अक्टूबर को मिलेगा गार्ड ऑफ ऑनर
एयर चीफ मार्शल एपी सिंह की औपचारिक विदाई 31 अक्टूबर को होगी। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, वह सबसे पहले नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय समर स्मारक पहुंचकर देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे।इसके बाद एयर फोर्स स्टेशन, नई दिल्ली में उनके सम्मान में विशेष गार्ड ऑफ ऑनर आयोजित किया जाएगा। इस समारोह के साथ वह भारतीय वायुसेना की सक्रिय सेवा से सेवानिवृत्त हो जाएंगे।इस बार गार्ड ऑफ ऑनर का आयोजन वायु भवन के बजाय रेस कोर्स एयर फोर्स स्टेशन के परेड मैदान में किया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, बड़े समारोह के लिए पर्याप्त स्थान उपलब्ध कराने के उद्देश्य से यह व्यवस्था की गई है।
अंतिम उड़ान ने ताजा की पुरानी यादें
सेवानिवृत्ति से पहले एपी सिंह ने 20 अक्टूबर को एचजेटी-16 किरण एमके-1 प्रशिक्षण विमान में अपनी विशेष अंतिम उड़ान भरी थी। इस उड़ान में उनके साथ उनके पहले फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर सेवानिवृत्त विंग कमांडर वीएस कोचर भी मौजूद थे।यह उड़ान उनके लंबे सैन्य करियर की शुरुआत और समापन को जोड़ने वाला भावनात्मक अवसर रही। भारतीय वायुसेना में चार दशक से अधिक की सेवा के दौरान उन्होंने विभिन्न लड़ाकू विमानों और प्रशिक्षण प्रणालियों के साथ काम किया।
एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित संभालेंगे कमान
एयर चीफ मार्शल एपी सिंह की सेवानिवृत्ति के बाद एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित भारतीय वायुसेना के नए प्रमुख होंगे। वह 31 अक्टूबर 2026 को पदभार संभालेंगे और वायुसेना के 29वें प्रमुख बनेंगे।आशुतोष दीक्षित वर्तमान में वायुसेना के उपप्रमुख हैं। वह अनुभवी लड़ाकू और परीक्षण पायलट हैं तथा उनके पास 3,500 घंटे से अधिक उड़ान का अनुभव है।नए वायुसेना प्रमुख के सामने लड़ाकू विमानों की उपलब्धता, नई तकनीकों का समावेश, स्वदेशी रक्षा उत्पादन और परिचालन तैयारियों को मजबूत करने जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां होंगी।
भारतीय वायुसेना के आधुनिकीकरण पर रहेगा जोर
भारतीय वायुसेना वर्तमान में लड़ाकू विमान बेड़े के आधुनिकीकरण और स्वदेशी रक्षा क्षमताओं के विस्तार की दिशा में काम कर रही है। तेजस लड़ाकू विमानों की आपूर्ति, आधुनिक हथियार प्रणालियों और नई युद्धक तकनीकों का विकास प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल हैं।एपी सिंह ने अपने कार्यकाल में लड़ाकू विमानों की आपूर्ति में देरी और परिचालन तैयारियों से जुड़े मुद्दों पर भी स्पष्ट रुख अपनाया था। उनके उत्तराधिकारी को इन परियोजनाओं को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी मिलेगी।रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की ओर से आयोजित विदाई समारोह में एपी सिंह के चार दशक लंबे सैन्य जीवन और देश की सुरक्षा में उनके योगदान को सम्मान दिया गया। 31 अक्टूबर को होने वाले अंतिम गार्ड ऑफ ऑनर के साथ भारतीय वायुसेना के नेतृत्व में एक नया अध्याय शुरू होगा।