नई दिल्ली। हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ती सामरिक चुनौतियों और चीन की नौसैनिक गतिविधियों के बीच भारत अपनी समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठा रहा है। इसी क्रम में केंद्र सरकार ने भारतीय नौसेना के लिए आठ अत्याधुनिक युद्धपोतों के निर्माण की परियोजना को मंजूरी दे दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली सुरक्षा मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCS) ने 40 हजार करोड़ रुपये से अधिक की इस परियोजना को स्वीकृति दी है। इसके तहत आठ नेक्स्ट जेनरेशन कॉर्वेट (Next Generation Corvettes) तैयार किए जाएंगे। ये आकार में अपेक्षाकृत छोटे लेकिन तेज रफ्तार, आधुनिक हथियारों और स्टील्थ तकनीक से लैस बहुउद्देश्यीय युद्धपोत होंगे। इनका निर्माण भारत में ही किया जाएगा। परियोजना से न केवल भारतीय नौसेना की मारक क्षमता बढ़ने की उम्मीद है, बल्कि स्वदेशी रक्षा उत्पादन और रोजगार के अवसरों को भी बढ़ावा मिलेगा। पहला युद्धपोत वर्ष 2030 तक नौसेना को मिलने का लक्ष्य रखा गया है।
40 हजार करोड़ की परियोजना को मिली मंजूरी
रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक और बड़ा निर्णय लिया है।बुधवार, 28 अक्टूबर 2026 को हुई सुरक्षा मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति की बैठक में आठ अत्याधुनिक कॉर्वेट युद्धपोतों के निर्माण को स्वीकृति दी गई।इस परियोजना की अनुमानित लागत 40 हजार करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है।ये युद्धपोत भारतीय नौसेना की समुद्री निगरानी, पनडुब्बी रोधी अभियान और समुद्री युद्ध क्षमता को मजबूत करेंगे।इस परियोजना को जून 2022 में रक्षा अधिग्रहण परिषद से आवश्यकता की स्वीकृति मिली थी। उस समय इसकी अनुमानित लागत लगभग 36 हजार करोड़ रुपये थी।अब उच्चस्तरीय मंजूरी मिलने के बाद निर्माण संबंधी अनुबंधों को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
कोलकाता और गोवा में बनेंगे युद्धपोत
आठों युद्धपोतों का निर्माण देश की दो प्रमुख सरकारी जहाज निर्माण कंपनियों के माध्यम से किया जाएगा।इनमें कोलकाता स्थित गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड (GRSE) और गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (GSL) शामिल हैं।रक्षा क्षेत्र से जुड़ी रिपोर्टों के अनुसार, दोनों कंपनियों के साथ जल्द ही निर्माण अनुबंध पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद है।इन कंपनियों के पास नौसेना और तटरक्षक बल के लिए विभिन्न प्रकार के जहाज बनाने का अनुभव है।परियोजना में जहाजों के निर्माण से लेकर उनके आधुनिक उपकरणों के एकीकरण तक कई तकनीकी कार्य शामिल होंगे।इससे देश की जहाज निर्माण क्षमता को और विस्तार मिलने की संभावना है।
क्या हैं नेक्स्ट जेनरेशन कॉर्वेट?
कॉर्वेट एक प्रकार का युद्धपोत होता है, जिसका आकार आमतौर पर फ्रिगेट और विध्वंसक युद्धपोतों से छोटा होता है।लेकिन आधुनिक कॉर्वेट युद्धपोत कई प्रकार के सैन्य अभियानों में भाग लेने में सक्षम होते हैं।इनका उपयोग तटीय सुरक्षा, समुद्री निगरानी, दुश्मन के जहाजों का मुकाबला करने और पनडुब्बियों के खिलाफ अभियान चलाने के लिए किया जा सकता है।भारतीय नौसेना के लिए प्रस्तावित नए कॉर्वेट लगभग 2,000 टन विस्थापन वाले होंगे।इनकी अधिकतम गति लगभग 30 नॉट्स रहने की उम्मीद है।यह गति लगभग 56 किलोमीटर प्रति घंटे के बराबर होती है।इन युद्धपोतों को समुद्र में तेजी से दिशा बदलने और विभिन्न प्रकार के अभियानों में तैनात होने के उद्देश्य से डिजाइन किया जा रहा है।
स्टील्थ तकनीक से होंगे लैस
नए युद्धपोतों की एक महत्वपूर्ण विशेषता उनका स्टील्थ डिजाइन होगा।भारतीय नौसेना ने इन जहाजों का डिजाइन अपने स्तर पर विकसित किया है।स्टील्थ तकनीक का उद्देश्य जहाज की पहचान करना दुश्मन के रडार और अन्य निगरानी प्रणालियों के लिए अधिक कठिन बनाना होता है।हालांकि, स्टील्थ तकनीक किसी युद्धपोत को पूरी तरह अदृश्य नहीं बनाती।यह उसकी पहचान से जुड़ी संभावना और दूरी को प्रभावित कर सकती है।नए जहाजों में आधुनिक सेंसर, संचार
प्रणालियों
और युद्ध प्रबंधन संबंधी तकनीकों को शामिल किए जाने की योजना है।इनकी अंतिम हथियार प्रणाली और उपकरणों का पूरा विवरण अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है।
पनडुब्बियों के खिलाफ बढ़ेगी ताकत
भारतीय नौसेना के लिए पनडुब्बी रोधी युद्ध क्षमता बेहद महत्वपूर्ण है।समुद्र के भीतर सक्रिय पनडुब्बियों का पता लगाना और उनसे निपटना तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण काम होता है।प्रस्तावित कॉर्वेट युद्धपोतों को पनडुब्बी रोधी अभियान के लिए भी तैयार किया जाएगा।इनके जरिए समुद्री क्षेत्रों की निगरानी और संभावित खतरों की पहचान में मदद मिल सकती है।नए जहाज दुश्मन के सतही युद्धपोतों और अन्य समुद्री खतरों से निपटने की क्षमता भी बढ़ाएंगे।भारतीय नौसेना के पास पहले से चार कमोर्ता श्रेणी के कॉर्वेट युद्धपोत मौजूद हैं।नई परियोजना के आठ युद्धपोत इन मौजूदा जहाजों की क्षमताओं को पूरक रूप से मजबूत करेंगे।
हिंद महासागर में सुरक्षा होगी मजबूत
हिंद महासागर भारत के लिए व्यापारिक और सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।देश का बड़ा हिस्सा समुद्री व्यापार के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जुड़ा हुआ है।इसके अलावा ऊर्जा आपूर्ति और महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों की सुरक्षा भी राष्ट्रीय हितों से संबंधित है।पिछले कुछ वर्षों में चीन ने हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी नौसैनिक गतिविधियों और उपस्थिति का विस्तार किया है।ऐसे में भारत लगातार अपनी समुद्री निगरानी और रक्षा तैयारियों को मजबूत कर रहा है।नए कॉर्वेट युद्धपोतों की तैनाती से भारतीय नौसेना को व्यापक समुद्री क्षेत्र में अभियान संचालित करने के लिए अतिरिक्त जहाज उपलब्ध होंगे।इनसे समुद्री सुरक्षा और निगरानी के अभियानों में बड़े युद्धपोतों पर निर्भरता भी कुछ हद तक कम हो सकती है।
चीन और पाकिस्तान की चुनौती के बीच तैयारी
भारत की समुद्री सुरक्षा रणनीति में चीन और पाकिस्तान दोनों महत्वपूर्ण क्षेत्रीय कारक हैं।चीन की नौसेना ने पिछले वर्षों में युद्धपोतों, पनडुब्बियों और अन्य समुद्री क्षमताओं का विस्तार किया है।वहीं, पाकिस्तान भी अपनी नौसैनिक क्षमताओं का आधुनिकीकरण कर रहा है।भारत के सामने समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा, तटीय क्षेत्रों की निगरानी और संभावित सैन्य चुनौतियों से निपटने की जिम्मेदारी है।हालांकि, आठ नए कॉर्वेट युद्धपोतों की परियोजना को किसी एक देश के खिलाफ विशेष कार्रवाई के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।यह भारतीय नौसेना के दीर्घकालिक आधुनिकीकरण कार्यक्रम का हिस्सा है।इसका उद्देश्य समुद्री सुरक्षा से संबंधित विभिन्न प्रकार की जरूरतों के लिए नौसेना की तैयारी बढ़ाना है।
70 प्रतिशत से ज्यादा स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल
इस परियोजना में आत्मनिर्भर भारत अभियान को विशेष महत्व दिया गया है।रिपोर्टों के अनुसार, नए युद्धपोतों में 70 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री इस्तेमाल करने का लक्ष्य है।इसमें जहाज निर्माण से संबंधित विभिन्न उपकरण, प्रणालियां और तकनीकी सामग्री शामिल हो सकती हैं।भारत में युद्धपोतों का निर्माण होने से घरेलू रक्षा कंपनियों को नए अवसर मिलेंगे।इसके अलावा सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को भी आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ने का मौका मिलेगा।इससे देश की रक्षा औद्योगिक क्षमता को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।हालांकि, परियोजना में वास्तविक स्वदेशी सामग्री का प्रतिशत निर्माण और अंतिम उपकरणों के चयन के बाद स्पष्ट होगा।
हजारों लोगों को मिल सकते हैं रोजगार के अवसर
आठ युद्धपोतों के निर्माण से जहाज निर्माण उद्योग में गतिविधियां बढ़ने की उम्मीद है।इसके लिए इंजीनियरों, तकनीशियनों, डिजाइन विशेषज्ञों और विभिन्न कुशल कर्मचारियों की जरूरत होगी।इसके अलावा मशीनरी, इलेक्ट्रॉनिक्स, धातु निर्माण और अन्य संबंधित क्षेत्रों की कंपनियों को भी काम मिल सकता है।रिपोर्टों के अनुसार, परियोजना से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हजारों रोजगार अवसर उत्पन्न होने की संभावना है।हालांकि, रोजगार की अंतिम संख्या निर्माण अनुबंध, परियोजना की अवधि और कंपनियों की वास्तविक जरूरतों पर निर्भर करेगी।
2030 तक मिलेगा पहला युद्धपोत
भारतीय नौसेना को पहला नेक्स्ट जेनरेशन कॉर्वेट वर्ष 2030 तक सौंपने का लक्ष्य रखा गया है।निर्माण कार्य शुरू होने के बाद अन्य जहाजों की आपूर्ति चरणबद्ध तरीके से की जाएगी।इससे पहले युद्धपोतों की डिजाइन संबंधी प्रक्रिया, निर्माण, उपकरणों का एकीकरण और विभिन्न परीक्षण पूरे करने होंगे।समुद्री परीक्षणों में जहाज की गति, संचालन क्षमता, सुरक्षा और अन्य प्रणालियों की जांच की जाती है।सभी जरूरी मानकों को पूरा करने के बाद ही युद्धपोत नौसेना की सेवा में शामिल किए जाते हैं।इसलिए परियोजना को मंजूरी मिलने का अर्थ यह नहीं है कि युद्धपोत तुरंत तैनात हो जाएंगे।
नौसेना के आधुनिकीकरण को मिलेगी गति
भारतीय नौसेना पहले से ही विभिन्न श्रेणियों के नए युद्धपोतों और सहायक जहाजों के निर्माण पर काम कर रही है।इसमें नीलगिरि श्रेणी के फ्रिगेट, भविष्य के विध्वंसक युद्धपोत और फ्लीट सपोर्ट शिप जैसी परियोजनाएं शामिल हैं।नेक्स्ट जेनरेशन कॉर्वेट परियोजना इस व्यापक आधुनिकीकरण कार्यक्रम में नई क्षमता जोड़ेगी।इसके जरिए भारतीय नौसेना को अपेक्षाकृत छोटे लेकिन तेज और बहुउद्देश्यीय युद्धपोत उपलब्ध होंगे।केंद्र सरकार की इस मंजूरी के बाद अब निर्माण अनुबंधों और परियोजना के क्रियान्वयन पर नजर रहेगी।
Tags: