नई दिल्ली : देश की राजनीति में युवाओं की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है। हाल के छात्र आंदोलनों और युवाओं से जुड़े राजनीतिक घटनाक्रमों के बीच सामने आए एक सी-वोटर स्नैप पोल ने भारत की Gen Z की राजनीतिक सोच और प्राथमिकताओं को लेकर कई अहम संकेत दिए हैं। सर्वे के मुताबिक, देश के करीब 10 में से 6 युवा मानते हैं कि राजनीतिक पार्टियां उनकी चिंताओं और प्राथमिकताओं को सही तरीके से नहीं समझती हैं। यह आंकड़ा राजनीतिक दलों के लिए चिंता का विषय माना जा सकता है, क्योंकि आने वाले वर्षों में यही युवा मतदाता चुनावी राजनीति में बड़ी भूमिका निभाने वाले हैं।
सी-वोटर के इस स्नैप पोल में 18 से 35 वर्ष की उम्र के करीब 1,270 युवाओं को शामिल किया गया। सर्वे में युवाओं से राजनीतिक दलों, चुनावी मुद्दों, मतदान की प्राथमिकताओं, राष्ट्रवाद और सोशल मीडिया के प्रभाव से जुड़े सवाल पूछे गए। सर्वे के नतीजे बताते हैं कि युवाओं के बीच पारंपरिक राजनीतिक मुद्दों के मुकाबले रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और महंगाई जैसे रोजमर्रा से जुड़े विषय अधिक महत्वपूर्ण होते जा रहे हैं।
सर्वे में 58.7 प्रतिशत युवाओं ने कहा कि राजनीतिक पार्टियां Gen Z की चिंताओं को नहीं समझती हैं। इसके विपरीत सिर्फ 20.7 प्रतिशत युवाओं ने माना कि राजनीतिक दल उनकी चिंताओं और अपेक्षाओं को समझते हैं। करीब 20.5 प्रतिशत युवा इस सवाल पर तटस्थ रहे या उन्होंने कोई स्पष्ट राय नहीं दी। इससे संकेत मिलता है कि राजनीतिक दलों के प्रति युवाओं के एक बड़े वर्ग में दूरी और असंतोष की भावना मौजूद है।
खास बात यह है कि राजनीतिक दलों के समर्थकों के बीच भी यह धारणा दिखाई देती है। सर्वे के अनुसार, बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए का समर्थन करने वाले करीब 54 प्रतिशत युवाओं ने माना कि राजनीतिक पार्टियां Gen Z की चिंताओं को नहीं समझती हैं। वहीं केवल करीब 26 प्रतिशत एनडीए समर्थक युवाओं ने माना कि पार्टियां उनकी प्राथमिकताओं को समझती हैं। कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्ष का समर्थन करने वाले युवाओं में यह आंकड़ा और अधिक रहा। करीब 64 प्रतिशत ने कहा कि राजनीतिक दल युवाओं की सोच और चिंताओं से मेल नहीं खाते। अन्य दलों का समर्थन करने वाले करीब 58.5 प्रतिशत युवाओं की राय भी इसी दिशा में रही।
सर्वे का एक अहम पहलू यह है कि युवाओं की राजनीतिक प्राथमिकताओं में रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य सबसे ऊपर दिखाई दिए। करीब 53 प्रतिशत युवाओं ने इन तीनों मुद्दों को चुनाव के दौरान सबसे महत्वपूर्ण बताया। यानी युवा मतदाताओं के लिए सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी या वैचारिक मुद्दे ही महत्वपूर्ण नहीं हैं, बल्कि उनकी रोजमर्रा की जिंदगी और भविष्य से जुड़े सवाल अधिक मायने रखते हैं।
महंगाई करीब 13.1 प्रतिशत युवाओं के लिए प्रमुख चुनावी मुद्दा रही, जबकि 11.9 प्रतिशत युवाओं ने भ्रष्टाचार को सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा बताया। बिजली, पानी और सड़क जैसे बुनियादी मुद्दे करीब 8.2 प्रतिशत युवाओं के लिए अहम रहे। वहीं कानून-व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा को करीब 4.8 प्रतिशत युवाओं ने अपनी प्राथमिकता बताया।
राष्ट्रवाद और राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर भी सर्वे में एक दिलचस्प तस्वीर सामने आई। केवल 2.7 प्रतिशत युवाओं ने राष्ट्रीय सुरक्षा को चुनाव में अपना सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा बताया। इससे यह संकेत मिलता है कि युवा मतदाताओं का एक बड़ा हिस्सा चुनाव के समय स्थानीय और व्यक्तिगत जीवन से जुड़े मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर के भावनात्मक मुद्दों से ऊपर रख सकता है।
मतदान के आधार को लेकर भी युवाओं की सोच स्पष्ट नजर आई। करीब 33.3 प्रतिशत युवाओं ने कहा कि वे वोट देने का फैसला मुख्य रूप से मुद्दों के आधार पर करेंगे। करीब 20 प्रतिशत युवाओं के लिए नेता महत्वपूर्ण आधार रहेगा। वहीं केवल 13.9 प्रतिशत ने पार्टी को प्राथमिक आधार बताया। उम्मीदवार को सबसे महत्वपूर्ण मानने वाले युवाओं की हिस्सेदारी करीब 7.7 प्रतिशत रही।
इन आंकड़ों से यह भी संकेत मिलता है कि आने वाले चुनावों में राजनीतिक दलों के लिए केवल पारंपरिक वोट बैंक और पुराने चुनावी मुद्दे पर्याप्त नहीं होंगे। युवाओं को अपने साथ जोड़ने के लिए रोजगार के अवसर, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाएं, महंगाई पर नियंत्रण और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर ठोस नीतियां और परिणाम दिखाने की जरूरत होगी।
सोशल मीडिया के दौर में Gen Z की राजनीतिक सोच बनने और बदलने का तरीका भी पारंपरिक मतदाताओं से अलग दिखाई देता है। युवा सूचनाओं के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म पर निर्भर हैं और राजनीतिक दलों के बयानों, नीतियों तथा नेताओं के प्रदर्शन का मूल्यांकन तेजी से करते हैं। हाल के छात्र आंदोलनों ने भी यह संकेत दिया है कि युवा अपनी मांगों को लेकर सार्वजनिक रूप से आवाज उठाने से पीछे नहीं हट रहे हैं।
कुल मिलाकर सी-वोटर स्नैप पोल राजनीतिक दलों के सामने एक स्पष्ट संदेश रखता है। देश का युवा मतदाता केवल किसी पार्टी या नेता के नाम पर वोट देने के बजाय अपने मुद्दों और भविष्य से जुड़े सवालों को अधिक महत्व देता दिखाई दे रहा है। यदि राजनीतिक दल Gen Z के बीच अपना प्रभाव बढ़ाना चाहते हैं तो उन्हें युवाओं की भाषा, उनकी चिंताओं और उनकी अपेक्षाओं को समझना होगा। रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे मुद्दों पर भरोसेमंद नीतियां और उनका प्रभावी क्रियान्वयन आने वाले समय में युवा मतदाताओं को आकर्षित करने की सबसे बड़ी कुंजी बन सकता है।
Tags: