नई दिल्ली : कांग्रेस संसदीय दल की नेता और पार्टी की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी ने पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को कोयला खदान आवंटन मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से मिली क्लीन चिट को सुप्रीम कोर्ट द्वारा सही ठहराए जाने के बाद पहली बार इस पूरे प्रकरण पर विस्तार से अपनी प्रतिक्रिया दी है। अंग्रेजी अखबार ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ में लिखे एक आलेख में सोनिया गांधी ने मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्री के रूप में कार्यकाल और उनके राजनीतिक योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि इतिहास उन्हें निश्चित तौर पर एक शांत, सौम्य और बेहद प्रभावशाली प्रधानमंत्री के रूप में याद करेगा।
सोनिया गांधी ने अपने लेख में मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्री के तौर पर 10 साल के कार्यकाल को प्रभावशाली बताते हुए कहा कि उनके खिलाफ एक सुनियोजित तरीके से राजनीतिक हमला किया गया। उन्होंने कहा कि मनमोहन सिंह ने अपने कार्यकाल के दौरान कई महत्वपूर्ण आर्थिक और सामाजिक फैसले लिए, लेकिन उनके काम और उपलब्धियों से लोगों का ध्यान हटाने के लिए उन्हें लगातार निशाना बनाया गया।
सोनिया गांधी ने मनमोहन सिंह के उस बयान को भी याद किया, जो उन्होंने प्रधानमंत्री पद पर रहते हुए अपने अंतिम प्रेस कॉन्फ्रेंस में 3 जनवरी 2014 को दिया था। उस समय मनमोहन सिंह ने मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए कहा था कि उन्हें पूरा विश्वास है कि समकालीन मीडिया या संसद में मौजूद विपक्षी दलों की तुलना में इतिहास उनके प्रति कहीं अधिक उदार रहेगा। सोनिया गांधी के मुताबिक, समय बीतने के साथ मनमोहन सिंह का यह आकलन सही साबित हुआ है।
अपने लेख में सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक पुराने बयान पर भी तीखी नाराजगी जताई। उन्होंने लिखा कि यह संयोग नहीं था कि नरेंद्र मोदी मनमोहन सिंह पर राजनीतिक हमलों के मुखर समर्थकों में शामिल थे। सोनिया गांधी ने 8 फरवरी 2017 को राज्यसभा में प्रधानमंत्री मोदी द्वारा की गई टिप्पणी का जिक्र करते हुए उसे संसदीय इतिहास के सबसे निचले स्तरों में से एक बताया।
सोनिया गांधी ने उस समय मोदी द्वारा मनमोहन सिंह पर की गई ‘रेनकोट’ वाली टिप्पणी का हवाला देते हुए कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री को जिस तरह से निशाना बनाया गया, वह अनुचित था। उनके मुताबिक, मनमोहन सिंह की ईमानदारी और व्यक्तिगत छवि पर सवाल उठाने की कोशिशें उनके लंबे सार्वजनिक जीवन और प्रधानमंत्री के रूप में किए गए कार्यों के अनुरूप नहीं थीं।
सोनिया गांधी ने हाल के छात्र आंदोलनों और जेन-जी युवाओं से जुड़े प्रधानमंत्री मोदी के बयानों का भी संदर्भ दिया। उन्होंने तंज कसते हुए लिखा कि जब प्रधानमंत्री आजकल अपने ऊपर होने वाले हमलों को लेकर भारत के छात्रों को माफ करने की बात कर रहे हैं, तो शायद वह इस मौके पर मनमोहन सिंह को अमर्यादित तरीके से बदनाम करने के लिए खुद को भी माफ कर सकते हैं। सोनिया का यह बयान सीधे तौर पर प्रधानमंत्री मोदी की पूर्व राजनीतिक टिप्पणियों पर निशाना माना जा रहा है।
लेख में सोनिया गांधी ने मनमोहन सिंह सरकार की आर्थिक उपलब्धियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने वैश्विक आर्थिक मंदी के दौर में भारत की अर्थव्यवस्था के प्रदर्शन को याद करते हुए कहा कि वर्ष 2008 में जब दुनिया की अर्थव्यवस्था गंभीर संकट से गुजर रही थी, तब भारत ने अपेक्षाकृत मजबूती बनाए रखी। उन्होंने दावा किया कि सकल घरेलू उत्पाद यानी GDP की गणना के तौर-तरीकों में बदलाव को ध्यान में रखने के बावजूद मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली सरकार के 10 वर्षों के दौरान आर्थिक विकास दर मोदी सरकार के 12 वर्षों की तुलना में बेहतर रही।
सोनिया गांधी ने यह भी दावा किया कि मनमोहन सिंह सरकार की आर्थिक नीतियों के कारण करोड़ों लोग गरीबी से बाहर आए। उन्होंने उनके कार्यकाल में शुरू की गई और आगे बढ़ाई गई कई महत्वपूर्ण नीतियों तथा सामाजिक योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि मनमोहन सिंह का योगदान केवल आर्थिक आंकड़ों तक सीमित नहीं था, बल्कि इसका व्यापक असर समाज के विभिन्न वर्गों पर पड़ा।
कोयला खदान आवंटन मामले में सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले ने इस राजनीतिक बहस को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। मामले में जांच और कानूनी प्रक्रिया के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की भूमिका को लेकर लंबे समय तक राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप होते रहे। अब अदालत द्वारा CBI की क्लीन चिट को बरकरार रखने के बाद कांग्रेस की ओर से इसे मनमोहन सिंह की प्रतिष्ठा को राहत देने वाला महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।
सोनिया गांधी ने अपने लेख के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की है कि मनमोहन सिंह की राजनीतिक विरासत को उन आरोपों और विवादों के आधार पर नहीं आंका जाना चाहिए, जिनके कारण उनके प्रधानमंत्री कार्यकाल के दौरान उन्हें लगातार निशाना बनाया गया। उन्होंने कहा कि इतिहास आखिरकार किसी नेता के पूरे कार्यकाल और उसके फैसलों का मूल्यांकन करता है।
सोनिया गांधी के मुताबिक, मनमोहन सिंह का शांत स्वभाव, आर्थिक समझ और नीतिगत योगदान उन्हें भारत के महत्वपूर्ण प्रधानमंत्रियों में शामिल करता है। उनके लेख ने मनमोहन सिंह की विरासत को लेकर कांग्रेस और बीजेपी के बीच पुरानी राजनीतिक बहस को एक बार फिर सामने ला दिया है।
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