नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वर्ष 2026 के आधिकारिक विदेश दौरों पर हुए खर्च का विस्तृत विवरण सामने आया है। संसद में प्रस्तुत आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार, फरवरी से जुलाई 2026 के बीच प्रधानमंत्री ने 13 देशों की यात्राएं कीं, जिन पर अब तक लगभग 74.5 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि कुछ दौरों के अंतिम बिलों का भुगतान अभी शेष है, इसलिए यह राशि आगे चलकर बदल सकती है। विशेष रूप से फ्रांस यात्रा का खर्च अभी इस कुल राशि में शामिल नहीं किया गया है।
संसदीय दस्तावेजों के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष की शुरुआत फरवरी में मलेशिया और इजरायल की यात्रा से की। 7 से 8 फरवरी के बीच मलेशिया दौरे पर करीब 5.57 करोड़ रुपये खर्च हुए। इसके बाद 25 और 26 फरवरी को इजरायल की यात्रा पर लगभग 11.92 करोड़ रुपये का व्यय दर्ज किया गया। दोनों यात्राएं द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने और व्यापार, रक्षा तथा रणनीतिक सहयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की गई थीं।
मई 2026 में प्रधानमंत्री का सबसे बड़ा विदेश दौरा हुआ, जिसमें उन्होंने संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली का दौरा किया। 15 से 20 मई के बीच हुई इन यात्राओं पर अलग-अलग देशों के अनुसार खर्च का विवरण भी जारी किया गया। यूएई यात्रा पर लगभग 1.97 करोड़ रुपये, नीदरलैंड पर 3.60 करोड़ रुपये, स्वीडन पर 6.33 करोड़ रुपये और इटली पर 4.23 करोड़ रुपये खर्च हुए। वहीं, नॉर्वे की यात्रा इस वर्ष की सबसे महंगी विदेश यात्रा साबित हुई, जिस पर लगभग 17.46 करोड़ रुपये का खर्च दर्ज किया गया। यह अब तक किसी एक देश की यात्रा पर सबसे अधिक खर्च है।
जून 2026 में प्रधानमंत्री ने फ्रांस, स्लोवाक रिपब्लिक और सेशेल्स का दौरा किया। 13 से 18 जून के दौरान स्लोवाक रिपब्लिक की यात्रा पर लगभग 4.77 करोड़ रुपये खर्च हुए। हालांकि इसी दौरान हुई फ्रांस यात्रा का अंतिम भुगतान अभी प्रक्रिया में है, इसलिए उसका खर्च आधिकारिक कुल राशि में शामिल नहीं किया गया है। इसके बाद 27 से 29 जून के बीच सेशेल्स की यात्रा पर लगभग 8.22 करोड़ रुपये खर्च किए गए। यह यात्रा हिंद महासागर क्षेत्र में भारत के रणनीतिक और समुद्री सहयोग को मजबूत करने के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी गई।
जुलाई 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड का दौरा किया। 6 से 11 जुलाई के बीच हुए इस दौरे में इंडोनेशिया यात्रा पर लगभग 3.87 करोड़ रुपये, ऑस्ट्रेलिया पर 1.18 करोड़ रुपये और न्यूजीलैंड यात्रा पर लगभग 5.43 करोड़ रुपये खर्च हुए। इन यात्राओं का उद्देश्य इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग बढ़ाना, आर्थिक साझेदारी को मजबूत करना तथा विभिन्न वैश्विक मुद्दों पर भारत की भूमिका को और प्रभावी बनाना था।
सरकार द्वारा जारी दस्तावेजों में यह भी उल्लेख किया गया है कि कुछ देशों के सामने विशेष चिन्ह लगाया गया है। इसका अर्थ है कि उन यात्राओं से जुड़े होटल, सुरक्षा, परिवहन और अन्य सेवाओं के सभी बिलों का अंतिम भुगतान अभी पूरा नहीं हुआ है। इसलिए भविष्य में इन यात्राओं पर कुल खर्च का आंकड़ा संशोधित हो सकता है। खास तौर पर फ्रांस यात्रा का पूरा खर्च अभी लंबित है और उसके जुड़ने के बाद कुल राशि वर्तमान 74.5 करोड़ रुपये से अधिक हो सकती है।
सरकार ने स्पष्ट किया कि विदेश यात्राओं पर होने वाले खर्च में विमान संचालन, सुरक्षा व्यवस्था, आवास, स्थानीय परिवहन, आधिकारिक बैठकों और अन्य प्रशासनिक व्यवस्थाओं का व्यय शामिल होता है। प्रधानमंत्री के विदेश दौरे केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं रहते, बल्कि व्यापार, निवेश, रक्षा सहयोग, ऊर्जा सुरक्षा, वैश्विक कूटनीति और भारतीय समुदाय से संवाद जैसे कई महत्वपूर्ण उद्देश्यों को भी पूरा करते हैं।
संसद में पेश इस विस्तृत ब्यौरे के सामने आने के बाद प्रधानमंत्री के विदेश दौरों पर होने वाले खर्च को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि सरकार का कहना है कि इन यात्राओं के माध्यम से भारत के रणनीतिक, आर्थिक और वैश्विक हितों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण सफलता मिली है। वहीं, अंतिम बिलों के निपटान के बाद वर्ष 2026 में प्रधानमंत्री के विदेश दौरों पर कुल खर्च का अंतिम आंकड़ा और अधिक स्पष्ट हो सकेगा।