दिल्ली: पौधारोपण अभियानों के बाद पौधों की देखभाल में लापरवाही बरतने वालों पर अब कार्रवाई की तैयारी है। दिल्ली के उपराज्यपाल टीएस संधू ने साफ कर दिया है कि लगाए गए पौधे यदि सूखते हैं या नष्ट होते हैं तो इसके लिए संबंधित नोडल अधिकारी सीधे तौर पर जिम्मेदार होंगे। उन्होंने अधिकारियों को पौधों की नियमित निगरानी और उनकी देखभाल सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) के पौधारोपण अभियान के दौरान एलजी टीएस संधू ने कहा कि केवल पौधे लगाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनकी सुरक्षा और लंबे समय तक देखभाल करना भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने निर्देश दिया कि हर पौधारोपण स्थल पर एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाए, जो पौधों की स्थिति पर नजर रखेगा। यदि किसी स्थान पर पौधे सूखते हैं तो उस अधिकारी की जवाबदेही तय की जाएगी।
एलजी ने कहा कि अक्सर देखा जाता है कि बड़े स्तर पर पौधारोपण कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, लेकिन बाद में पौधों की देखभाल नहीं होने से बड़ी संख्या में पौधे खराब हो जाते हैं। उन्होंने इस पुरानी व्यवस्था को बदलने पर जोर दिया और कहा कि पौधारोपण को केवल एक कार्यक्रम की तरह नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की लगातार चलने वाली प्रक्रिया के रूप में देखा जाना चाहिए।
शुक्रवार को एलजी टीएस संधू ने कमला नेहरू रिज क्षेत्र में पौधारोपण अभियान में हिस्सा लिया। इस दौरान कॉलेज और स्कूल के छात्रों, आरडब्ल्यूए प्रतिनिधियों और सुबह की सैर करने वाले लोगों ने भी पौधे लगाए। एलजी ने लोगों से अपील की कि दिल्ली की हरियाली बढ़ाने के लिए जनभागीदारी जरूरी है और पर्यावरण संरक्षण को जन आंदोलन बनाया जाना चाहिए।
डीडीए ने शुक्रवार को दिल्ली के 77 अलग-अलग स्थानों पर एक दिवसीय बड़े पौधारोपण अभियान का आयोजन किया। इस अभियान के तहत एक लाख से अधिक देशी पेड़ और झाड़ियां लगाई गईं। अरावली जैव विविधता पार्क, आस्था कुंज पार्क, संजय वन, नरेला के हरित क्षेत्र, पश्चिम पुरी, हौज खास, वसंत उद्यान और दिलशाद गार्डन डियर पार्क समेत कई स्थानों पर पौधे लगाए गए।
कमला नेहरू रिज में भी अरावली क्षेत्र की स्थानीय प्रजातियों के पौधे लगाए गए। इनमें चमरोड, फालसा, दूधी, धोक और ढाक जैसी प्रजातियां शामिल हैं। एलजी संधू ने अरावली की खास प्रजाति ढाक यानी पलाश का पौधा लगाया। वहीं डीडीए के उपाध्यक्ष एन. सरवना कुमार ने भी पौधारोपण किया। रिज क्षेत्र में कुल 1100 पौधे लगाए गए।
इस मौके पर दिल्ली विश्वविद्यालय के वरिष्ठ वनस्पतिशास्त्री प्रो. सीआर बाबू, डॉ. फैयाज खुदसर और डॉ. एकता खुराना ने एलजी को रिज क्षेत्र में जंगल को दोबारा विकसित करने की तकनीकों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कैनोपी ओपनिंग और पारिस्थितिक अनुक्रमण जैसी तकनीकों के माध्यम से अरावली क्षेत्र की प्राकृतिक वनस्पति को वापस लाने का प्रयास किया जा रहा है।
एलजी ने सर्पेंटाइन झील और बटरफ्लाई कंजर्वेटरी का भी निरीक्षण किया। उन्होंने कमला नेहरू रिज को दिल्ली की “पारिस्थितिक जीवनरेखा” बताया। उन्होंने कहा कि रिज क्षेत्र दिल्ली के पर्यावरण संतुलन के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और इसे संरक्षित करना सभी की जिम्मेदारी है।
गौरतलब है कि यह अभियान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा सात जुलाई को शुरू किए गए “एक पेड़ मां के नाम” अभियान का हिस्सा है। इसके तहत देशभर में बड़े स्तर पर पौधारोपण किया जा रहा है। दिल्ली में 70 लाख पौधे लगाने के मिशन के अंतर्गत डीडीए को 23 लाख स्वदेशी पौधे लगाने की जिम्मेदारी दी गई है।
वर्तमान पौधारोपण सीजन में केवल रिज क्षेत्र में 1,81,700 पेड़ और झाड़ियां लगाने का लक्ष्य रखा गया है। एलजी के निर्देश के बाद अब इन पौधों की देखभाल और सुरक्षा पर विशेष निगरानी रखी जाएगी, ताकि दिल्ली को अधिक हरा-भरा और पर्यावरण के अनुकूल बनाया जा सके।