युवा इनोवेटर्स ने दिखाई नई राह खेती से लेकर स्वच्छ ऊर्जा तक अनोखे प्रयोग
नई दिल्ली। भारत में युवा इनोवेटर्स और उद्यमी अपने नए विचारों को व्यावहारिक तकनीक और व्यवसाय में बदलकर कृषि तथा स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में बदलाव लाने का प्रयास कर रहे हैं। दिल्ली-एनसीआर में संचालित पारिवारिक उद्यम 'ऑर्गेनिक थियो' प्राकृतिक खेती को खाद्य प्रसंस्करण से जोड़कर नए उत्पाद तैयार कर रहा है। वहीं, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) जोधपुर में ग्रीन हाइड्रोजन और स्वच्छ ऊर्जा से जुड़ी तकनीकों पर शोध किया जा रहा है। ये पहल टिकाऊ कृषि, रोजगार के अवसर, पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण संभावनाएं प्रस्तुत करती हैं।विशेषज्ञों के अनुसार, कृषि उत्पादों का मूल्य संवर्धन और नई ऊर्जा तकनीकों का विकास भविष्य की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इसी दिशा में भारतीय उद्यमी और शोधकर्ता अपने प्रयासों को आगे बढ़ा रहे हैं।
परिवार ने ऑर्गेनिक खेती को बनाया व्यवसाय
दिल्ली-एनसीआर से जुड़े राकेश आनंद और रूपिका आनंद ने 'ऑर्गेनिक थियो' नाम से एक पारिवारिक उद्यम विकसित किया है। इसका उद्देश्य प्राकृतिक तरीकों से कृषि उत्पादन करना और उससे विभिन्न खाद्य उत्पाद तैयार करना है।इस उद्यम के माध्यम से जैम, केचप, आइसक्रीम और अन्य प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ तैयार किए जाते हैं। परिवार का प्रयास खेती से प्राप्त उपज का बेहतर उपयोग करना और उपभोक्ताओं तक विभिन्न प्रकार के उत्पाद पहुंचाना है।ऑर्गेनिक थियो की शुरुआत छोटे स्तर पर हुई थी। वर्ष 2018 में शुरू हुआ यह उद्यम अब लगभग 15 एकड़ में फैली कृषि गतिविधियों तक पहुंच चुका है। इसके अंतर्गत फल, सब्जियां, अनाज और अन्य कृषि उत्पाद उगाए जाते हैं।
बेटी ईशा संभाल रही हैं डिजिटल प्रचार
राकेश और रूपिका आनंद के साथ उनकी बेटी ईशा भी इस पारिवारिक व्यवसाय से जुड़ी हैं। वह वेबसाइट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से उद्यम की गतिविधियों को लोगों तक पहुंचाने में सहयोग करती हैं।डिजिटल माध्यमों पर प्राकृतिक खेती, कृषि उत्पादों और खाद्य प्रसंस्करण से जुड़ी जानकारी साझा की जाती है।इस तरह व्यवसाय केवल कृषि उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि उपभोक्ताओं को खेती की प्रक्रिया के बारे में जागरूक करने का भी प्रयास करता है।डिजिटल प्रचार से छोटे कृषि उद्यमों को अपने उत्पादों की जानकारी सीधे ग्राहकों तक पहुंचाने में मदद मिल सकती है।
खेती के साथ फूड प्रोसेसिंग पर जोर
ऑर्गेनिक थियो की विशेषता कृषि और खाद्य प्रसंस्करण का एकीकरण है। सामान्य तौर पर किसान अपनी उपज सीधे बाजार में बेचते हैं, लेकिन मूल्य संवर्धन के जरिए उसी उपज से नए उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं।फल और अन्य कृषि उत्पादों से जैम, आइसक्रीम तथा प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ बनाना इसी प्रक्रिया का हिस्सा है।उद्यम के तहत कोल्ड-प्रेस्ड तेल, आटा, अचार और अन्य खाद्य उत्पाद भी तैयार किए जाते हैं। इससे कृषि उपज के उपयोग के नए रास्ते खुलते हैं और व्यवसाय को विभिन्न उत्पाद श्रेणियों में विस्तार करने का अवसर मिलता है।
IIT जोधपुर में ग्रीन हाइड्रोजन पर शोध
दूसरी ओर, राजस्थान स्थित IIT जोधपुर में स्वच्छ ऊर्जा और ग्रीन हाइड्रोजन से जुड़ी तकनीकों के विकास पर काम किया जा रहा है।संस्थान में जोधपुर हाइड्रोजन वैली इनोवेशन क्लस्टर जैसी पहल के माध्यम से ग्रीन हाइड्रोजन के क्षेत्र में अनुसंधान, उद्योगों के साथ सहयोग और नई तकनीकों के विकास को बढ़ावा दिया जा रहा है।इसके अतिरिक्त, संस्थान का ऋषभ सेंटर फॉर रिसर्च एंड इनोवेशन इन क्लीन एनर्जी ऊर्जा भंडारण, वैकल्पिक ईंधन और ऊर्जा दक्षता से जुड़े अनुसंधान को आगे बढ़ा रहा है।
क्या है ग्रीन हाइड्रोजन और क्यों है महत्वपूर्ण?
ग्रीन हाइड्रोजन को भविष्य के स्वच्छ ईंधन के एक संभावित विकल्प के रूप में देखा जाता है। इसे सामान्यतः नवीकरणीय बिजली की सहायता से पानी के इलेक्ट्रोलिसिस के जरिए तैयार किया जाता है।इस प्रक्रिया में पानी को हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में विभाजित किया जाता है। यदि उत्पादन के लिए उपयोग की जाने वाली बिजली नवीकरणीय स्रोतों से प्राप्त होती है, तो हाइड्रोजन उत्पादन से जुड़े कार्बन उत्सर्जन को कम किया जा सकता है।ग्रीन हाइड्रोजन का संभावित उपयोग इस्पात, उर्वरक, परिवहन और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में किया जा सकता है। हालांकि, इसके व्यापक इस्तेमाल के लिए उत्पादन लागत, भंडारण और परिवहन से संबंधित चुनौतियों का समाधान आवश्यक है।
रोजगार और पर्यावरण संरक्षण की नई संभावनाएं
ऑर्गेनिक खेती और ग्रीन हाइड्रोजन अनुसंधान जैसे प्रयास अलग-अलग क्षेत्रों में काम कर रहे हैं, लेकिन दोनों का उद्देश्य संसाधनों के बेहतर उपयोग और टिकाऊ विकास को बढ़ावा देना है।कृषि आधारित उद्यम ग्रामीण क्षेत्रों में प्रसंस्करण, पैकेजिंग और विपणन से जुड़े रोजगार के अवसर विकसित कर सकते हैं। वहीं, स्वच्छ ऊर्जा अनुसंधान भविष्य में नई तकनीकों, औद्योगिक निवेश और कौशल आधारित रोजगार को बढ़ावा दे सकता है।भारत में ऐसे प्रयास दर्शाते हैं कि कृषि और ऊर्जा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में नवाचार की संभावनाएं लगातार विकसित हो रही हैं। इन परियोजनाओं की दीर्घकालिक सफलता उनकी आर्थिक व्यवहार्यता, तकनीकी क्षमता और बाजार की मांग पर निर्भर करेगी।