Working पेरेंट्स ध्यान दें! डेकेयर में बच्चे की सुरक्षा के लिए ये सवाल पूछना जरूरी

Update: 2026-07-13 15:49 GMT

Lifestyle लाइफ स्टाइल :  आज के समय में ज्यादातर माता-पिता नौकरीपेशा हैं। ऐसे में बच्चों की देखभाल करना उनके लिए बड़ी चुनौती बन गया है। पहले के समय में संयुक्त परिवारों में बच्चे दादा-दादी, चाचा-चाची और परिवार के अन्य सदस्यों के बीच बड़े होते थे, लेकिन अब न्यूक्लियर फैमिली का चलन बढ़ने से बच्चों की जिम्मेदारी अक्सर नैनी या डेकेयर सेंटर पर आ गई है।

बड़े शहरों में कामकाजी माता-पिता के लिए डेकेयर एक सुविधाजनक विकल्प बन चुका है। सुबह से शाम तक बच्चे को सुरक्षित माहौल में रखने के लिए कई परिवार स्कूलों और निजी डेकेयर सेंटर का सहारा लेते हैं। माता-पिता को भरोसा रहता है कि उनका बच्चा दिनभर सुरक्षित रहेगा और उनकी अनुपस्थिति में उसकी अच्छी देखभाल होगी।

हालांकि, हाल के दिनों में कुछ ऐसी घटनाएं सामने आई हैं, जिन्होंने डेकेयर सेंटर की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बेंगलुरु में सामने आई एक घटना ने कई माता-पिता को चिंता में डाल दिया है। आरोप है कि कुछ केयरटेकर्स ने बच्चों को शांत कराने के लिए उनके साथ बेहद अमानवीय व्यवहार किया। बच्चों को बाथरूम में बंद करने, टॉयलेट सीट पर बैठाने, वॉशिंग मशीन में डालने और पानी की तेज धार से परेशान करने जैसे आरोप सामने आए हैं।

इस तरह की घटनाओं ने यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि बच्चे को डेकेयर भेजने से पहले माता-पिता को केवल सुविधाओं पर नहीं, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था पर भी ध्यान देना चाहिए।

डेकेयर चुनने से पहले पूछें ये सवाल

1. बच्चों की निगरानी कैसे की जाती है?

माता-पिता को यह जरूर जानना चाहिए कि डेकेयर में बच्चों की निगरानी के लिए कितने कर्मचारी मौजूद हैं। एक कर्मचारी के जिम्मे कितने बच्चों की जिम्मेदारी है, यह भी पता करना जरूरी है।

2. क्या सीसीटीवी कैमरे लगे हैं?

डेकेयर सेंटर में सीसीटीवी कैमरों की व्यवस्था होना बेहद जरूरी है। माता-पिता को पूछना चाहिए कि क्या उन्हें कभी-कभी बच्चे की गतिविधियां देखने की सुविधा मिलेगी या नहीं।

3. कर्मचारियों की जांच हुई है या नहीं?

बच्चों की देखभाल करने वाले कर्मचारियों का बैकग्राउंड वेरिफिकेशन होना चाहिए। माता-पिता को यह जानकारी जरूर लेनी चाहिए कि स्टाफ को बच्चों के साथ व्यवहार और सुरक्षा की ट्रेनिंग दी गई है या नहीं।

4. इमरजेंसी की स्थिति में क्या व्यवस्था है?

बच्चे की तबीयत खराब होने, चोट लगने या किसी आपात स्थिति में डेकेयर का क्या प्लान है, यह जानना जरूरी है। पास में अस्पताल या मेडिकल सुविधा उपलब्ध है या नहीं, इसकी जानकारी भी लेनी चाहिए।

5. बच्चे के साथ अनुशासन कैसे रखा जाता है?

माता-पिता को यह समझना चाहिए कि डेकेयर में बच्चों को शांत कराने या अनुशासन सिखाने के लिए कौन-से तरीके अपनाए जाते हैं। किसी भी तरह की सख्ती, डराने या शारीरिक दंड की अनुमति नहीं होनी चाहिए।

बच्चे के व्यवहार में बदलाव पर दें ध्यान

अगर डेकेयर जाने के बाद बच्चा अचानक डरने लगे, चुप रहने लगे, वहां जाने से मना करे या उसके व्यवहार में बदलाव नजर आए तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। माता-पिता को बच्चे से प्यार से बात करनी चाहिए और उसकी परेशानी समझने की कोशिश करनी चाहिए।

डेकेयर बच्चों की देखभाल में मददगार साबित हो सकते हैं, लेकिन सही जगह का चुनाव करना बेहद जरूरी है। माता-पिता को केवल सुविधा और फीस नहीं, बल्कि बच्चे की सुरक्षा, कर्मचारियों के व्यवहार और डेकेयर के माहौल को प्राथमिकता देनी चाहिए। छोटी-सी सावधानी बच्चों को सुरक्षित रखने में बड़ी भूमिका निभा सकती है।

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