फुलवारी शरीफ (पटना)। मेहनत, लगन और आत्मविश्वास के दम पर फुलवारी शरीफ की बेटी नुबूघ हसन चांद ने री-नीट 2026 परीक्षा में शानदार सफलता हासिल कर परिवार और पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया है। नुबूघ ने कठिन मानी जाने वाली मेडिकल प्रवेश परीक्षा में ऑल इंडिया स्तर पर 11,257वीं रैंक प्राप्त की है। वहीं सामान्य वर्ग में उनकी रैंक 4,589 रही। उनकी इस उपलब्धि के बाद परिवार, रिश्तेदारों और क्षेत्र के लोगों में खुशी का माहौल है।
नुबूघ हसन चांद की सफलता की कहानी केवल एक परीक्षा में अच्छे प्रदर्शन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उनकी मेहनत, अनुशासन और बहुमुखी प्रतिभा का उदाहरण है। बचपन से ही पढ़ाई में रुचि रखने वाली नुबूघ ने शिक्षा के साथ-साथ धार्मिक और रचनात्मक क्षेत्रों में भी अपनी अलग पहचान बनाई है।
नुबूघ ने महज 10 वर्ष की उम्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की थी। उन्होंने सऊदी अरब के जेद्दा में रहते हुए पूरा कुरआन कंठस्थ कर लिया था। कम उम्र में हासिल की गई यह उपलब्धि उनके धैर्य, एकाग्रता और मेहनत को दर्शाती है। धार्मिक शिक्षा के साथ-साथ उन्होंने अपनी स्कूली पढ़ाई में भी लगातार बेहतर प्रदर्शन किया और सफलता के नए आयाम स्थापित किए।
नुबूघ शुरू से ही मेधावी छात्रा रही हैं। उन्होंने दसवीं की परीक्षा में 97 प्रतिशत अंक हासिल किए थे, जबकि 12वीं कक्षा में 92 प्रतिशत अंक प्राप्त कर विद्यालय में शानदार प्रदर्शन किया। अपनी मेहनत और लगन के बल पर वह अपने विद्यालय की छात्राओं में भी शीर्ष स्थान पर रहीं। पढ़ाई के प्रति उनकी गंभीरता और लक्ष्य को पाने का जुनून उन्हें लगातार आगे बढ़ाता रहा।
री-नीट 2026 में मिली सफलता के पीछे नुबूघ की कड़ी मेहनत और निरंतर तैयारी रही। मेडिकल क्षेत्र में करियर बनाने के लक्ष्य के साथ उन्होंने लंबे समय तक परीक्षा की तैयारी की। उन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी अपने आत्मविश्वास को बनाए रखा और आखिरकार अपनी मेहनत का परिणाम सफलता के रूप में हासिल किया।
नुबूघ की प्रतिभा केवल शिक्षा तक सीमित नहीं है। वह रचनात्मक गतिविधियों में भी काफी रुचि रखती हैं। उन्हें केक बनाने और कथा लेखन का शौक है। इसके अलावा वह ताइक्वांडो में ब्लैक बेल्ट भी हैं। पढ़ाई के साथ खेल और रचनात्मक क्षेत्र में उनकी उपलब्धियां उनकी बहुमुखी प्रतिभा को दिखाती हैं।
नुबूघ हसन चांद नवाबजादा हसन चांद की पुत्री हैं और स्वर्गीय डॉ. अली हसन चांद (डॉ. चांद) की पोती हैं। उनकी सफलता पर परिवार के सदस्यों ने खुशी जाहिर की है। परिवार का कहना है कि नुबूघ ने अपनी मेहनत और लगन से पूरे परिवार का गौरव बढ़ाया है।
अपनी सफलता का श्रेय नुबूघ ने अपने माता-पिता, परिवार के सहयोग, शिक्षकों के मार्गदर्शन और अपनी लगातार मेहनत को दिया है। उनका कहना है कि किसी भी लक्ष्य को हासिल करने के लिए मेहनत के साथ अनुशासन, धैर्य और आत्मविश्वास बेहद जरूरी हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को संदेश दिया कि कठिनाइयों से घबराने के बजाय अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
नुबूघ की कहानी उन विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा है, जो बड़े सपने देखते हैं और उन्हें पूरा करने के लिए मेहनत करते हैं। कम उम्र में कुरआन कंठस्थ करने से लेकर री-नीट जैसी कठिन परीक्षा में सफलता हासिल करने तक का उनका सफर यह साबित करता है कि सही दिशा, दृढ़ संकल्प और लगातार प्रयास से कोई भी मुकाम हासिल किया जा सकता है।
फुलवारी शरीफ की इस बेटी ने अपनी उपलब्धियों से यह दिखा दिया है कि प्रतिभा किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं होती। अगर मेहनत और लगन के साथ प्रयास किया जाए तो शिक्षा, खेल, कला और अन्य क्षेत्रों में भी सफलता प्राप्त की जा सकती है। नुबूघ अब मेडिकल शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने की तैयारी कर रही हैं और भविष्य में एक सफल चिकित्सक बनने का सपना देख रही हैं।