छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का आदेश: आरक्षकों की पदोन्नति प्रक्रिया जारी रहेगी, अंतिम आदेश पर रोक

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Update: 2026-07-07 07:53 GMT
Bilaspur. बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य पुलिस विभाग में आरक्षकों की पदोन्नति प्रक्रिया को लेकर महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश जारी किया है। अदालत ने विभाग को पदोन्नति की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की अनुमति दी है, लेकिन अगली सुनवाई तक किसी भी आरक्षक का अंतिम पदोन्नति आदेश जारी नहीं करने के निर्देश दिए हैं। इस आदेश के बाद पुलिस विभाग की प्रमोशन प्रक्रिया जारी रहेगी, लेकिन अंतिम निर्णय न्यायालय की अगली सुनवाई के बाद ही हो सकेगा। यह मामला आरक्षकों की वरिष्ठता सूची को लेकर
दायर याचिका
से जुड़ा है। याचिकाकर्ता सुरेंद्र कुमार देशमुख ने राज्य शासन सहित अन्य संबंधित पक्षों को प्रतिवादी बनाते हुए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। याचिका में आरोप लगाया गया है कि स्वयं के अनुरोध पर दूसरे जिले में स्थानांतरण कराने वाले आरक्षकों की वरिष्ठता तय करने में सेवा नियमों का सही तरीके से पालन नहीं किया जा रहा है।
याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि छत्तीसगढ़ पुलिस कार्यपालिक बल, आरक्षक (भर्ती, पदोन्नति तथा सेवा की शर्तें) नियम, 2007 में वरिष्ठता निर्धारण को लेकर स्पष्ट प्रावधान मौजूद हैं। नियमों के अनुसार, जो आरक्षक अपनी इच्छा से दूसरे जिले में स्थानांतरण कराते हैं, उन्हें नए जिले की वरिष्ठता सूची में सबसे नीचे स्थान दिया जाना चाहिए। याचिका में कहा गया है कि इसके बावजूद विभाग कुछ ऐसे आरक्षकों की वरिष्ठता उनके मूल नियुक्ति दिवस के आधार पर निर्धारित कर रहा है और उन्हें पदोन्नति प्रक्रिया में शामिल किया जा रहा है। याचिकाकर्ता ने इसे नियमों के विपरीत बताते हुए हाईकोर्ट से हस्तक्षेप की मांग की है।
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति बिभु दत्ता गुरु की एकलपीठ में हुई। सुनवाई के दौरान अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुना और पुलिस विभाग के सेवा नियमों में वरिष्ठता से संबंधित प्रावधानों का अध्ययन किया। इसके बाद हाईकोर्ट ने मामले में अंतरिम आदेश जारी करते हुए पदोन्नति प्रक्रिया को लेकर स्थिति स्पष्ट की। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि विभागीय स्तर पर पदोन्नति की प्रक्रिया को जारी रखा जा सकता है, लेकिन मामले की अगली सुनवाई तक किसी भी आरक्षक के संबंध में अंतिम पदोन्नति आदेश जारी नहीं किया जाएगा। यानी विभाग चयन और अन्य औपचारिक प्रक्रियाएं पूरी कर सकता है, लेकिन अंतिम प्रमोशन देने पर रोक रहेगी।
अदालत ने इस मामले में सभी संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया है और उन्हें तीन सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। अब अगली सुनवाई में यह तय किया जाएगा कि स्थानांतरित आरक्षकों की वरिष्ठता किस नियम के आधार पर निर्धारित की जानी चाहिए और वर्तमान पदोन्नति प्रक्रिया नियमों के अनुरूप है या नहीं। इस अंतरिम आदेश के बाद छत्तीसगढ़ पुलिस विभाग में चल रही आरक्षक पदोन्नति प्रक्रिया पर न्यायालय की निगरानी बनी रहेगी। वहीं, आरक्षकों की वरिष्ठता और प्रमोशन से जुड़े नियमों को लेकर अंतिम फैसला हाईकोर्ट की आगामी सुनवाई में सामने आएगा।
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