NCL मुआवजे के नाम पर किसान से साइबर ठगी, फर्जी कर्मचारी बनकर ठगा

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Update: 2026-07-11 09:48 GMT
Bilaspur. बिलासपुर। सिंगरौली जिले में साइबर ठगों ने अब सरकारी मुआवजे के नाम पर लोगों को अपना शिकार बनाना शुरू कर दिया है। ताजा मामला चितरंगी तहसील के ग्राम नौगई प्रथम का है, जहां एक किसान से NCL परियोजना के मुआवजे के नाम पर साइबर ठगी कर ली गई। ठगों ने खुद को NCL कर्मचारी बताकर किसान को झांसे में लिया और अलग-अलग मोबाइल नंबरों पर पैसे ट्रांसफर करवाकर करीब 12 हजार रुपये की ऑनलाइन धोखाधड़ी कर दी। जानकारी के अनुसार, ग्राम नौगई प्रथम निवासी अंबिकेश सिंह चौहान की जमीन NCL परियोजना से प्रभावित है। परियोजना के तहत उन्हें मुआवजा राशि मिलनी है। इसी बात की जानकारी का फायदा उठाते हुए साइबर ठग ने उन्हें फोन किया और खुद को NCL का अधिकारी या कर्मचारी बताया। फोन करने वाले व्यक्ति ने किसान को विश्वास में लेते हुए कहा कि उनकी 2 लाख 80 हजार रुपये की मुआवजा राशि बैंक खाते में ट्रांसफर नहीं हो पा रही है, क्योंकि उनका खाता सेविंग अकाउंट है। ठग ने समस्या का समाधान करने और मुआवजा राशि जल्द दिलाने का झांसा देकर किसान से बातचीत शुरू की।

इसके बाद ठग ने तकनीकी प्रक्रिया पूरी करने और राशि जारी कराने के नाम पर किसान को भ्रमित किया। इसी दौरान किसान के मोबाइल पर कुछ असफल ट्रांजैक्शन के मैसेज भी आए। बताया जा रहा है कि मोबाइल पर 10 हजार रुपये और 25 हजार रुपये के असफल लेन-देन से जुड़े संदेश आने के बाद ठग ने किसान को और अधिक विश्वास में लिया। आरोपी ने किसान से कहा कि मुआवजा राशि ट्रांसफर करने के लिए अलग-अलग मोबाइल नंबरों पर कुछ राशि भेजनी होगी। किसान ठग की बातों में आ गया और उसके बताए अनुसार अलग-अलग नंबरों पर कुल 12 हजार रुपये ट्रांसफर कर दिए। पैसे भेजने के कुछ समय बाद जब कोई मुआवजा राशि प्राप्त नहीं हुई तो किसान को अपने साथ हुई धोखाधड़ी का एहसास हुआ। ठगी का पता चलते ही पीड़ित किसान ने तुरंत साइबर अपराध की शिकायत के लिए साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क किया।

इसके बाद उन्होंने गढ़वा थाना पहुंचकर मामले की लिखित शिकायत भी दर्ज कराई। पुलिस ने शिकायत के आधार पर जांच शुरू कर दी है और ठगी में इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबरों तथा बैंक खातों की जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस और साइबर विशेषज्ञ लगातार लोगों को ऑनलाइन ठगी से सावधान रहने की अपील करते रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी सरकारी योजना, मुआवजा, बैंक खाते या दस्तावेज से जुड़ी जानकारी के लिए फोन पर आने वाले अनजान लोगों पर भरोसा नहीं करना चाहिए। किसी भी व्यक्ति को ओटीपी, बैंक जानकारी या पैसे ट्रांसफर करने से पहले पूरी तरह सत्यापन करना जरूरी है। NCL जैसी बड़ी परियोजनाओं से जुड़े मुआवजे के मामलों में साइबर अपराधी पहले से जानकारी जुटाकर लोगों को निशाना बना रहे हैं। ऐसे मामलों में ठग खुद को अधिकारी बताकर लोगों को विश्वास में लेते हैं और फिर किसी बहाने से पैसे ऐंठ लेते हैं। फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है। अब यह देखना होगा कि साइबर टीम की मदद से किसान के खाते से निकाली गई रकम वापस मिल पाती है या नहीं। वहीं, इस घटना ने एक बार फिर लोगों को साइबर अपराधों के प्रति सतर्क रहने की जरूरत को सामने ला दिया है।
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