MoU से झारखंड में उद्योगों को बढ़ावा

Update: 2026-07-10 05:52 GMT

Jharkhand झारखंड : नई दिल्ली में आयोजित दो दिवसीय नेशनल स्टेकहोल्डर्स कंसल्टेशन के समापन दिवस पर झारखंड के औद्योगिक विकास को लेकर बड़ा कदम उठाया गया। गुरुवार को राज्य में निवेश को बढ़ावा देने के लिए कुल 14 समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। इन समझौतों के तहत झारखंड में करीब 99,639 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव है।

समापन सत्र को संबोधित करते हुए झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि ये एमओयू केवल कागजी समझौते नहीं हैं, बल्कि राज्य के भविष्य को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धियां हैं। उन्होंने कहा कि इन निवेश प्रस्तावों से झारखंड में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य झारखंड को एक मजबूत औद्योगिक केंद्र के रूप में विकसित करना है। इसके लिए सरकार निवेशकों को बेहतर माहौल, जरूरी सुविधाएं और सहयोग उपलब्ध कराने के लिए लगातार काम कर रही है।

सीएम सोरेन ने बताया कि इस आयोजन के दौरान टेक्सटाइल सेक्टर से जुड़े उद्योग प्रतिनिधियों ने रोजगार सृजन की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की है। उन्होंने कहा कि टेक्सटाइल क्षेत्र के प्रतिनिधियों की ओर से करीब 70,000 रोजगार के अवसर पैदा करने के लिए लेटर ऑफ इंटेंट (एलओआई) भी सौंपा गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड में प्राकृतिक संसाधनों, कुशल मानव संसाधन और बेहतर औद्योगिक संभावनाओं की भरपूर क्षमता है। सरकार का प्रयास है कि राज्य में निवेश बढ़े और इसका लाभ सीधे यहां के लोगों तक पहुंचे।

दो दिवसीय नेशनल स्टेकहोल्डर्स कंसल्टेशन में देश के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े उद्योगपतियों, निवेशकों और विशेषज्ञों ने भाग लिया। बैठक के दौरान झारखंड में निवेश की संभावनाओं, औद्योगिक नीतियों और विकास की योजनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई।

राज्य सरकार ने निवेशकों को भरोसा दिलाया कि झारखंड में उद्योग स्थापित करने के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। सरकार का फोकस उद्योगों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने, रोजगार बढ़ाने और आर्थिक विकास को गति देने पर है।

एमओयू के माध्यम से आने वाले निवेश से राज्य के कई क्षेत्रों में औद्योगिक गतिविधियां बढ़ने की उम्मीद है। इससे मैन्युफैक्चरिंग, टेक्सटाइल, ऊर्जा, आधारभूत संरचना और अन्य क्षेत्रों में नई परियोजनाएं शुरू हो सकती हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड की पहचान केवल खनिज संपदा वाले राज्य के रूप में नहीं, बल्कि उद्योग और रोजगार के नए केंद्र के रूप में भी बननी चाहिए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार निवेशकों के साथ मिलकर विकास की नई कहानी लिखने के लिए प्रतिबद्ध है।

उन्होंने कहा कि सरकार की नीतियों का उद्देश्य स्थानीय युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराना और राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाना है। बड़े निवेश से छोटे और मध्यम उद्योगों को भी फायदा मिलेगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

कार्यक्रम के दौरान उद्योग प्रतिनिधियों ने भी झारखंड में निवेश की संभावनाओं को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। उन्होंने राज्य की नीतियों और उपलब्ध संसाधनों की सराहना की।

अधिकारियों के अनुसार, इन एमओयू को जमीन पर उतारने के लिए आगे की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी। संबंधित विभाग निवेश प्रस्तावों की निगरानी करेंगे ताकि परियोजनाओं को समय पर लागू किया जा सके।

राज्य सरकार का मानना है कि लगभग एक लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव झारखंड की अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे सकते हैं। इससे औद्योगिक विकास के साथ-साथ रोजगार और व्यापारिक गतिविधियों में भी तेजी आने की संभावना है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर ये निवेश योजनाएं सफलतापूर्वक लागू होती हैं तो झारखंड में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और राज्य की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।

नेशनल स्टेकहोल्डर्स कंसल्टेशन के समापन के साथ झारखंड ने निवेश आकर्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम आगे बढ़ाया है। 14 एमओयू और रोजगार से जुड़े प्रस्तावों को राज्य के औद्योगिक भविष्य के लिए अहम माना जा रहा है।

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